यूएफओ के पायलटों के शवों से क्या कर रहा अमेरिका...! अफसर के दावे से हड़कंप
<p><em><strong>अमेरिकी एयरफोर्स के एक पूर्व पायलट और इंटेलिजेंस अफसर ने दावा किया है कि पृथ्वी के बाहर भी जीवन है। इतना ही नहीं, इस अफसर का दावा है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के पास दूसरे ग्रह से जुड़ी बेहद खुफिया और अहम जानकारियां हैं।</strong></em></p>
इस इंटेलिजेंस अफसर का नाम डेविड चार्ल्स ग्रुश है। उसके मुताबिक अमेरिकी इंटेलिजेंस के पास उड़नतश्तरियों के पायलट्स की डेड बॉडीज और इन यूएफओ का मलबा मौजूद है। अमेरिकी साइंटिस्ट्स रिवर्स इंजीनियरिंग के जरिए इनका इस्तेमाल बेजोड़ हथियार बनाने में करना चाहते हैं। डेविड चार्ल्स ग्रुश अमेरिकी एयरफोर्स में पायलट रह चुके हैं। 36 साल के ग्रुश ने पेंटागन की सीक्रेट यूनिट में बतौर इंटेलिजेंस अफसर भी काम किया।
पहली बार खुलासा
अन आईडेन्टिफाइड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट्स (यूएफओ) को हिंदी में उड़नतश्तरी कहा जाता है। करीब 70 साल से इनको लेकर कई कहानियां सुनने को मिलती रही हैं। ग्रुश से पहले भी कई लोग इन्हें देखने का दावा कर चुके हैं। बहरहाल, ग्रुश का दावा इसलिए वजनदार लगता है, क्योंकि वो अमेरिकी एयरफोर्स में पायलट रह चुके हैं। बाद में इसी यूएफओ सेक्शन में वो इंटेलिजेंस ऑफिसर भी रहे। अब व्हिसल ब्लोअर बन चुके हैं और अमेरिकी सरकार से उनकी मांग है कि इस मिस्ट्री को दुनिया के सामने लाया जाए। ग्रुश ने सोमवार को एक अमेरिकी टीवी चैनल को इंटरव्यू में यूएफओ से जुड़े कई खुलासे किए। कहा- अमेरिकी डिफेंस साइंटिस्ट कई साल से प्रोजेक्ट यूएफओ पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कई यूएफओ को या तो मार गिराया या फिर वो खुद ही क्रैश हो गए। इनका मलबा बरामद किया गया। इनके पायलट्स की डेड बॉडीज बरामद की गई। ये सभी एक स्पेशल यूनिट के पास हैं।
मानव के अलावा भी लोग हैं
ग्रुश आगे कहते हैं- इसमें कोई दो राय नहीं कि ‘नॉन ह्यूमन्स’ का वजूद मौजूद है। अमेरिका के पास इसके पुख्ता सबूत हैं। यूएफओ में मौजूद लोगों को आप कोई भी नाम दे सकते हैं। कुछ लोग इन्हें एलियन भी कहते हैं। मैं खुद पहले एयरफोर्स और बाद में नेशनल जियोस्पेक्टिल इंटेलिजेंस एजेंसी में रहा। अमेरिका और शायद कुछ दूसरे देश एक नई तरह की आर्म्स रेस में शामिल हैं। अमेरिका तो यूएफओ की रिवर्स इंजीनियरिंग के काफी करीब है।
संसद को सबूत भी देंगे
ग्रुश ने कहा है कि वो अमेरिकी कांग्रेस और इंटेलिजेंस कम्युनिटी इंस्पेक्टर जनरल को यूएफओ से जुड़े दावों के सबूत भी देने जा रहे हैं। उन्होंने कहा- यूएफओ के पायलट्स की डेड बॉडीज और इसके पार्ट्स पर अमेरिका बहुत लंबे वक्त से काम कर रहा है। ग्रुश पेंटागन की स्पेशल यूनिट अन-आईडेन्टिफाइड फिनोमिना (यूएफ) के मेंबर थे। इसकी एक यूनिट समंदर की गहराई में काम करने वाले कुछ सीक्रेट ऑब्जेक्ट्स पर भी काम करती रही है। ग्रुश के मुताबिक मैंने कभी यूएफओ पायलट्स की डेड बॉडीज या यूएफओ के पार्ट्स नहीं देखे। वहां सिर्फ चुनिंदा अफसर ही जा सकते हैं। इन लोगों ने ही मुझे जुबान बंद रखने को कहा था।
क्या चाहता है अमेरिका
इसका खुलासा भी ग्रुश ने ही किया। कहा- मेरे पास जानकारी और सबूत हैं कि अमेरिका यूएफओ की रिवर्स इंजीनियरिंग कर रहा है। वो एलियन टेक्नोलॉजी के भी काफी करीब है। मेरी यूनिट के कई लोगों को इस बारे में कभी जानकारी नहीं दी गई। ग्रुश जिस रिवर्स इंजीनियरिंग की बात कर रहे हैं, वो दरअसल एक प्रोसेस है। इसमें किसी क्रैश या तबाह हुई चीजों के हिस्सों को फिर वैसा ही बनाने की कोशिश की जाती है, जैसा वो पहले रहा होगा।
क्रैश चॉपर को ब्लास्ट के जरिए उड़ाया
2 मई 2011 को जब अमेरिकी कमांडोज ने ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान के ऐबटाबाद में मार गिराया था तो इस ऑपरेशन में उनका एक स्पेशल चॉपर क्रैश हो गया था। मिशन लादेन पूरा करने के बाद जब कमांडोज लौटने लगे तो उन्होंने इस क्रैश हुए चॉपर को ब्लास्ट के जरिए उड़ा दिया था। ऐसा इसलिए किया गया था ताकि पाकिस्तान चॉपर का मलबा चीन को न बेच सके। चीन मलबे की रिवर्स इंजीनियरिंग करके उसी तरह का एक नया चॉपर बना सकता था। डेविड ग्रुश का दावा है कि अमेरिकी साइंटिस्ट्स की स्पेशल टीम यूएफओ की रिवर्स इंजीनियरिंग करके इनका इस्तेमाल सीक्रेट वेपन्स बनाने में करना चाहती है।
क्या कहती है अमेरिकी रिपोर्ट
जून 2021 में यूएफओ की जांच के लिए बनाई गई अमेरिकी टास्क फोर्स ने एक रिपोर्ट जारी की थी। 9 पेज की इस रिपोर्ट में अमेरिकी गवर्नमेंट सोर्स के जरिए 2004 से 2021 के बीच 144 यूएफओ के बारे में जानकारी दी गई थी। पेंटागन इन्हें अन-आइडेंटिफाइड एरियल फिनॉमिना कहता है।
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