अजमेर दरगाह की अंजुमन समिति ने वक्फ संशोधन कानून 2025 का विरोध किया, देशव्यापी आंदोलन का आह्वान
अजमेर शरीफ दरगाह की अंजुमन कमेटी ने वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे “सदियों पुराने मुस्लिम धार्मिक संस्थानों की जमीन पर कब्जे की साजिश” करार दिया है..
जयपुर/अजमेर। अजमेर शरीफ दरगाह की अंजुमन कमेटी ने वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे “सदियों पुराने मुस्लिम धार्मिक संस्थानों की जमीन पर कब्जे की साजिश” करार दिया है। बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कमेटी ने इस कानून के खिलाफ देशव्यापी लोकतांत्रिक आंदोलन छेड़ने का आह्वान किया।
अंजुमन कमेटी के सचिव सैयद सरवर चिश्ती ने कहा, “यह कानून किसी सुधार का हिस्सा नहीं, बल्कि इतिहास का सबसे बड़ा ज़मीन कब्जा है। सरकार 700-800 सालों से हमारे पूर्वजों द्वारा वक्फ की गई ज़मीन हड़पना चाहती है।”
मोदी सरकार पर तीखा हमला
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा संशोधन को गरीब मुसलमानों के हित में बताने के दावे पर चिश्ती ने कहा, “अगर मोदी को वाकई मुस्लिम महिलाओं की चिंता होती, तो उनकी सरकार बिल्कीस बानो के दोषियों को रिहा क्यों करती, जिन्होंने एक बच्ची समेत उसके 14 परिजनों की हत्या की थी?”
‘मुस्लिमों को हाशिए पर धकेलने की साजिश’
चिश्ती ने आरोप लगाया कि भाजपा और दक्षिणपंथी ताकतें पिछले एक दशक से मुस्लिम समुदाय को व्यवस्थित रूप से कमजोर कर रही हैं। उन्होंने कहा..
- “योगी आदित्यनाथ ने सड़कों पर ईद की नमाज़ पर रोक लगाई।”
- “उत्तराखंड के सीएम पुष्कर धामी मुस्लिमों को राज्य से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं।”
- “दिल्ली के विधायक रविंदर नेगी मुस्लिम कारोबारियों पर हमले कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “ये सब सुधार नहीं, बल्कि मुसलमानों को मिटाने की साजिश है और इस साजिश को मोदी का समर्थन प्राप्त है।”
सांप्रदायिक एकता की अपील
चिश्ती ने सभी सूफी दरगाहों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने और इस कानून के खिलाफ जन-जागरूकता फैलाने की अपील की। उन्होंने कहा, “अगर मुस्लिम समुदाय अब नहीं जागा, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। यह लड़ाई केवल संपत्ति की नहीं, बल्कि विरासत, आस्था और भविष्य की है।”
भीतरघात का आरोप
चिश्ती ने आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग इस कानून का समर्थन कर रहे हैं क्योंकि “उन्हें अपने अवैध धंधों की सुरक्षा चाहिए। वे दरगाह के नाम का दुरुपयोग कर रहे हैं। वे समुदाय के प्रतिनिधि नहीं बल्कि उसके शोषकों के साथ खड़े हैं।”
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का समर्थन
अंजुमन समिति ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ एकजुटता जताते हुए कहा कि देशभर की दरगाहें इस कानून का पुरज़ोर विरोध करेंगी।
दरगाह दीवान और उनके बेटे ने किया समर्थन
हालांकि, अजमेर दरगाह के दीवान सैयद जैनुल आबेदीन और उनके बेटे सैयद नसीरुद्दीन (ऑल इंडिया सूफी सज्जादनशीन काउंसिल के अध्यक्ष) ने संशोधित कानून का समर्थन किया है।
नसीरुद्दीन ने कहा, “यह कानून वक्फ संपत्तियों को गरीब मुसलमानों के हित में इस्तेमाल करने में मदद करेगा। इससे बहुसंख्यक समुदाय को लाभ पहुंचेगा।”
What's Your Reaction?