बंगाल में SIR पर विवाद: टीएमसी ने मतदाता संशोधन के उद्देश्य पर उठाए सवाल, पूछा कि क्या बंगालियों की पहचान पर शक जताने की कोशिश?
ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 10 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से मुलाकात कर पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) प्रक्रिया पर कड़ी आपत्ति ..
नयी दिल्ली। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 10 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से मुलाकात कर पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) प्रक्रिया पर कड़ी आपत्ति जताई। पार्टी ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया “दंडात्मक” बन चुकी है, बंगालियों को अनुपातहीन रूप से निशाना बना रही है, और इसकी वजह से बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) की मौतें तक हो चुकी हैं।
टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने बैठक के बाद कहा, “हमने लगभग 40 मृतकों की सूची CEC को सौंपी। हमने बैठक की शुरुआत ही इस कहकर की कि श्री कुमार और चुनाव आयोग के हाथ खून से सने हैं।”
प्रतिनिधिमंडल में डोला सेना, साकेत गोखले, ममता ठाकुर और महुआ मोइत्रा सहित कई सांसद मौजूद थे।
क्या SIR वाकई मतदाता सत्यापन के लिए है या बंगालियों की पहचान पर सवाल उठाने की कोशिश?
टीएमसी ने पूछा कि जब अन्य सीमावर्ती राज्यों में SIR नहीं हो रहा, तो केवल बंगाल को ही इतनी व्यापक प्रक्रिया से क्यों गुजरना पड़ रहा है?
मेमोरेंडम में कहा गया, “क्या SIR का उद्देश्य मतदाता सत्यापन है, या बंगालियों की पहचान पर ही संदेह खड़ा करना? यदि घुसपैठ मुद्दा है, तो त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर जैसे सीमावर्ती राज्यों को इससे बाहर क्यों रखा गया?”
टीएमसी ने यह भी कहा कि असम में भी वास्तविक SIR लागू नहीं किया गया, बल्कि “स्पेशल रिविज़न” के नाम पर औपचारिकता निभाई गई।
“सिर्फ बंगाल को निशाना क्यों बनाया जा रहा है?”—टीएमसी ने सवाल उठाया।
चुनाव आयोग वर्तमान में SIR देश के कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कर रहा है, जिनमें पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, केरल, गुजरात, गोवा, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु आदि शामिल हैं।
यदि मतदाता सूची ‘अविश्वसनीय’ है, तो 2024 के लोकसभा चुनाव इन्हीं सूचियों से कैसे कराए गए?
टीएमसी ने ध्यान दिलाया कि यही मतदाता सूची पिछले एक वर्ष में हुए बड़े चुनावों लोकसभा और विधानसभा चुनावों में इस्तेमाल की गई थी।
मेमोरेंडम में प्रश्न उठाया गया
“यदि यही सूचियाँ अब अविश्वसनीय हैं, तो पिछले वर्ष लोकसभा इन्हीं मतदाताओं से कैसे चुनी गई? यदि ये सूचियाँ विश्वसनीय नहीं थीं, तो क्या लोकसभा को भंग किया जाना चाहिए?”
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले NDA ने सत्ता बरकरार रखी थी। पश्चिम बंगाल में टीएमसी ने 42 में से 29 सीटें जीती थीं।
BLOs की मौतों के लिए कौन जिम्मेदार?
टीएमसी की शिकायत का मुख्य बिंदु SIR प्रक्रिया के दौरान BLOs की मौतें रहीं।
पार्टी का दावा है..
- कई राज्यों में BLOs की मौतें हुईं
- कुछ ने “अमानवीय दबाव” के कारण आत्महत्या की
- कई की मौत काम के भारी बोझ और स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी बताई गई
टीएमसी ने पूछा
“इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा—चुनाव आयोग या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार?” पार्टी ने आरोप लगाया कि BLOs को अपर्याप्त प्रशिक्षण दिया गया, अवास्तविक समयसीमाएँ थोप दी गईं और संस्थागत सहयोग न के बराबर था। पश्चिम बंगाल में अब तक लगभग 40 BLOs की मौत रिपोर्ट की गई हैं।
क्या SIR प्रक्रिया पक्षपातपूर्ण तरीके से लागू हो रही है?
टीएमसी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग विपक्ष की चिंताओं को नज़रअंदाज़ करता है, लेकिन भाजपा की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करता है।
उन्होंने बाहरी बूथ लेवल एजेंटों, डेटा-एंट्री ऑपरेटर्स को बंगला सहायता केंद्रों से बाहर रखने और अन्य फैसलों को “पूर्वाग्रहपूर्ण” बताया।
क्या ECI भाजपा समर्थित नैरेटिव को बढ़ावा दे रहा है?
टीएमसी ने बिहार का हवाला देते हुए कहा कि वहां आचार संहिता में बदलाव भाजपा के अनुकूल दिखे।
बंगाल में भाजपा नेताओं द्वारा “1 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने” की सार्वजनिक टिप्पणियों पर भी चुनाव आयोग की चुप्पी पर सवाल उठाया।
पार्टी ने पूछा: “क्या चुनाव आयोग भाजपा के आदेश पर काम कर रहा है?”
बंगाल में SIR की वर्तमान स्थिति
- SIR की शुरुआत 4 नवंबर 2025 को हुई
- अब तक 7.6 करोड़ में से 3.8 करोड़ फॉर्म डिजिटाइज़ किए जा चुके हैं (लगभग 49.3%)
- फॉर्म जमा और डिजिटाइज़ेशन का काम 4 दिसंबर 2025 तक चलेगा
- ड्राफ्ट मतदाता सूची 9 दिसंबर 2025 को आएगी
- अंतिम मतदान सूची 7 फरवरी 2026 को प्रकाशित होगी
टीएमसी का आरोप है कि SIR राजनीतिक रूप से प्रेरित है, जबकि चुनाव आयोग दावा करता है कि यह एक नियमित प्रक्रिया है।
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