इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की नागरिकता से जुड़े मामले को नए सबूतों के आधार पर फिर से खोला

कांग्रेस नेता राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता को लेकर दायर जनहित याचिका में नया मोड़ आ गया है। याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में एक पुनर्विचार याचिका दायर ..

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की नागरिकता से जुड़े मामले को नए सबूतों के आधार पर फिर से खोला
13-07-2025 - 07:20 AM
22-04-2026 - 05:53 PM

लखनऊ। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता को लेकर दायर जनहित याचिका में नया मोड़ आ गया है। याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में एक पुनर्विचार याचिका दायर की है। इसमें लंदन, वियतनाम और उज़्बेकिस्तान से प्राप्त कुछ नए वीडियो और दस्तावेज़ पेश किए गए हैं।

इससे पहले 14 मई 2025 को हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को इस मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके तहत गृह मंत्रालय के नागरिकता प्रकोष्ठ ने भारतीय दूतावास के माध्यम से ब्रिटिश सरकार से राहुल गांधी की नागरिकता और पासपोर्ट से जुड़ी जानकारी मांगी थी।

याचिकाकर्ता के अनुसार, यूके सरकार ने अब भारत को वांछित जानकारी सौंप दी है और इसकी सूचना उन्हें भी दे दी गई है। वर्तमान में यह मामला सीबीआई (नई दिल्ली) की भ्रष्टाचार-रोधी शाखा-2 के पास जांचाधीन है।

राहुल गांधी पर आरोप है कि उन्होंने विदेशी नागरिकता की जानकारी छिपाकर न सिर्फ अपने संवैधानिक पद की शपथ का उल्लंघन किया, बल्कि चुनावी घोषणा पत्र में भी भ्रामक सूचना दी।

इस याचिका में चुनाव आयोग, प्रवर्तन निदेशालय (ED), आयकर विभाग, रायबरेली के रिटर्निंग ऑफिसर और लोकसभा अध्यक्ष को भी प्रतिवादी बनाया गया है।

इससे पहले हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से नागरिकता की स्थिति पर ठोस रिपोर्ट न आने के कारण इस याचिका को खारिज कर दिया था और कहा था कि मामला अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता। अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि अगर कोई रिपोर्ट मिले, तो उसे याचिकाकर्ता को साझा किया जाए और अदालत में दाखिल किया जाए। इसके बाद याचिकाकर्ता विग्नेश ने पुनर्विचार याचिका दायर की।

21 अप्रैल 2025 को हुई सुनवाई में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सूर्यभान पांडे ने केंद्र की ओर से स्थिति रिपोर्ट दाखिल की, लेकिन अदालत ने इसे अपर्याप्त मानते हुए कहा कि इतने संवेदनशील राष्ट्रीय मुद्दे में देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। कोर्ट ने केंद्र सरकार को 10 दिनों के भीतर राहुल गांधी की नागरिकता की स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए।

इस सुनवाई में राहुल गांधी की ओर से कोई कानूनी प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ। कर्नाटक निवासी याचिकाकर्ता विग्नेश शिशिर ने अपनी याचिका में दावा किया है कि राहुल गांधी ने यूके की एक कंपनी में निदेशक पद संभालते हुए खुद को ब्रिटिश नागरिक घोषित किया था। उन्होंने चुनाव आयोग के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि दोहरी नागरिकता रखने वाला व्यक्ति भारत में चुनाव नहीं लड़ सकता। इसलिए उन्होंने नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 9(2) के तहत राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता रद्द करने की मांग की है।

इससे पहले 24 मार्च 2025 को हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति ए.आर. मंसूरी और न्यायमूर्ति अजय कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने राज्य सरकार को चार हफ्तों के भीतर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था लेकिन सरकार ने आठ सप्ताह का समय मांगा था। अगली सुनवाई 21 अप्रैल को तय की गई थी।

19 दिसंबर 2024 को, न्यायमूर्ति रंजन रॉय और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने एएसजी सूर्यभान पांडे को गृह मंत्रालय से जानकारी प्राप्त करने का निर्देश दिया था। इसके बाद मंत्रालय ने अदालत को सूचित किया था कि राहुल गांधी की नागरिकता स्पष्ट करने हेतु ब्रिटिश सरकार को पत्र भेजा गया है।

केंद्र सरकार ने अदालत से अतिरिक्त समय मांगा था और कहा था कि यह एक व्यापक जांच है, जिसकी रिपोर्ट आठ सप्ताह में प्राप्त होगी।

ध्यान देने योग्य है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में इसी तरह की याचिका को खारिज कर दिया था। उस समय तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने टिप्पणी की थी कि अगर किसी कंपनी के दस्तावेज में राहुल गांधी को ब्रिटिश नागरिक बताया गया है, तो इससे स्वतः यह प्रमाणित नहीं होता कि वे ब्रिटिश नागरिक हैं।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।