बांग्लादेश में हिंदुओं के पलायन की चेतावनी देने वाले अर्थशास्त्री अबुल बरकत भ्रष्टाचार मामले में जेल भेजे गए
कट्टरपंथी इस्लाम के आलोचक और बांग्लादेश के जाने-माने अर्थशास्त्री प्रोफेसर अबुल बरकत को शुक्रवार को भ्रष्टाचार के एक मामले में जेल भेज दिया..
नयी दिल्ली/ढाका। कट्टरपंथी इस्लाम के आलोचक और बांग्लादेश के जाने-माने अर्थशास्त्री प्रोफेसर अबुल बरकत को शुक्रवार को भ्रष्टाचार के एक मामले में जेल भेज दिया गया।
ढाका मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट मोहम्मद ज्वेल राणा ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। यह आदेश तब दिया गया जब Anti-Corruption Commission (ACC) ने अदालत में उनकी हिरासत की मांग करते हुए आवेदन दिया। यह जानकारी The Daily Star ने अदालत में मौजूद एक एसीसी अधिकारी के हवाले से दी।
बरकत को गुरुवार रात ढाका शहर के धनमंडी-3 स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था।
अबुल बरकत पहले जनता बैंक पीएलसी के चेयरमैन के पद पर कार्यरत रह चुके हैं। 20 फरवरी 2025 को एसीसी ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान रेडीमेड गारमेंट्स कंपनी AnonTex Group को ऋण देने में अनियमितता बरती, जिससे बैंक को 297 करोड़ टका (बांग्लादेशी मुद्रा) का नुकसान हुआ। इस मामले में कुल 23 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
इस बीच, बरकत की बेटी अरुनी बरकात ने बताया कि "गुरुवार रात को 20-25 लोग, जो खुद को डिटेक्टिव ब्रांच (DB) पुलिस बता रहे थे, अचानक मेरे पिता के बेडरूम में घुसे और उन्हें अपने साथ ले गए। उन्होंने कोई वारंट नहीं दिखाया। हम कानूनी लड़ाई के लिए तैयार हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "हमें इस केस के बारे में सिर्फ मीडिया से पता चला। किसी ने हमें इसकी जानकारी नहीं दी, न ही कोई जांच करने आया। अगर कोई जांच के लिए आता, तो हम अवश्य सहयोग करते। मेरे पिता ने 40 साल तक ढाका विश्वविद्यालय में पढ़ाया है। वे स्वतंत्रता सेनानी भी रहे हैं। मेरी मां भी शिक्षिका थीं। मैंने अपने पिता को हमेशा लोगों की भलाई करते देखा है। हमें बहुत दुख है कि उन्हें बिना किसी जांच के गिरफ्तार किया गया।"
अबुल बरकत वही अर्थशास्त्री हैं, जिन्होंने 2016 में प्रकाशित अपनी किताब Political Economy of Reforming Agriculture-Land-Water Bodies in Bangladesh में चेतावनी दी थी कि अगर हिंदुओं के पलायन की मौजूदा दर बनी रही, तो अगले 30 वर्षों में बांग्लादेश में एक भी हिंदू नहीं बचेगा।
उन्होंने लिखा था, "पिछले 49 वर्षों में हिंदुओं के पलायन की दर को देखें, तो यह स्पष्ट संकेत है कि अगर यही प्रवृत्ति जारी रही, तो बांग्लादेश से हिंदू समुदाय पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।"
उनकी इस चेतावनी को Dhaka Tribune ने अपने 2016 के एक रिपोर्ट में उद्धृत किया था।
अबुल बरकत की गिरफ्तारी को लेकर बांग्लादेश में राजनीतिक और मानवाधिकार हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं, और कई लोग इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई मान रहे हैं।
What's Your Reaction?