CJI ने मांगा जस्टिस वर्मा का इस्तीफा, उन्होंने इनकार किया; सुप्रीम कोर्ट ने जांच रिपोर्ट और जज का जवाब प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति को भेजा
एक तीन-सदस्यीय समिति द्वारा जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास पर नकदी मिलने के आरोपों को प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना ने उनसे इस्तीफा मांगा था। हालांकि, जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया..
नयी दिल्ली। एक तीन-सदस्यीय समिति द्वारा जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास पर नकदी मिलने के आरोपों को प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना ने उनसे इस्तीफा मांगा था। हालांकि, जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया।
इसके बाद CJI ने जांच समिति की रिपोर्ट और जस्टिस वर्मा का उत्तर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है। यह बताया गया है कि CJI ने राष्ट्रपति को जस्टिस वर्मा को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की सिफारिश भी की है।
गुरुवार को जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया कि CJI ने “इन-हाउस प्रक्रिया के तहत” राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है, जिसमें “3-सदस्यीय समिति की दिनांक 03.05.2025 की रिपोर्ट और श्रीमान जस्टिस यशवंत वर्मा से प्राप्त दिनांक 06.05.2025 का पत्र/प्रतिक्रिया संलग्न की गई है।”
मुख्य न्यायाधीश ने 22 मार्च को इस समिति का गठन किया था। समिति में शामिल थे:
- जस्टिस शील नागू, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश;
- जस्टिस जी एस संधावालिया, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश; और
- जस्टिस अनु शिवरामन, कर्नाटक उच्च न्यायालय की न्यायाधीश।
समिति का गठन उस घटना की जांच के लिए किया गया था जिसमें पूर्व दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस वर्मा के निवास पर आग लगने के बाद नकदी मिलने का मामला सामने आया था।
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