भूमि के बदले नौकरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव पर आरोप तय करने की प्रक्रिया रोकने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को बड़ा झटका देते हुए 'भूमि के बदले नौकरी' घोटाले में उनके खिलाफ दिल्ली की ट्रायल कोर्ट में आरोप तय करने की कार्यवाही टालने..
नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को बड़ा झटका देते हुए 'भूमि के बदले नौकरी' घोटाले में उनके खिलाफ दिल्ली की ट्रायल कोर्ट में आरोप तय करने की कार्यवाही टालने से इनकार कर दिया।
लालू यादव ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही 12 अगस्त तक स्थगित रखने की मांग की थी क्योंकि उस दिन दिल्ली हाईकोर्ट में उनके द्वारा CBI की FIR को रद्द कराने की याचिका पर सुनवाई प्रस्तावित है।
लेकिन, न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने निर्देश देने से इंकार करते हुए कहा, "हाईकोर्ट में लंबित याचिका बेअसर नहीं हो जाएगी, भले ही ट्रायल कोर्ट आरोप तय करने की कार्यवाही आगे बढ़ा दे।"
पीठ ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही, जिसमें आरोप तय करना भी शामिल है, दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित रद्दीकरण याचिका के परिणाम पर निर्भर करेगी।
इससे पहले, 18 जुलाई को, न्यायमूर्ति सुंदरेश की अध्यक्षता वाली पीठ ने ट्रायल रोकने से इनकार कर दिया था और कहा था कि ऐसे मामूली मामलों को सुप्रीम कोर्ट नहीं देखेगा, और यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा ही तय किया जाना चाहिए।
लालू यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका (SLP) सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने उनके उस अनुरोध को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दाखिल चार्जशीट के आधार पर ट्रायल की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की थी।
हाईकोर्ट में अपनी अर्जी में, पूर्व रेल मंत्री लालू यादव ने दलील दी थी कि किसी लोक सेवक द्वारा उसके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन से संबंधित फैसले/सिफारिश की जांच बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के अवैध है।
इसलिए FIR का पंजीकरण ही गैरकानूनी है और इसके बाद की पूरी जांच, चार्जशीट और कोर्ट की संज्ञान प्रक्रिया भी शून्य (void ab initio) हो जाती है।
हाईकोर्ट ने उनकी इस याचिका को खारिज करते हुए उन्हें छूट दी कि वे आरोप तय होने के चरण में ट्रायल कोर्ट में अपनी सभी दलीलें पेश कर सकते हैं। इसके बाद लालू यादव ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
CBI का मामला क्या है?
CBI द्वारा दर्ज FIR (18 मई, 2022) के अनुसार..
- 2004 से 2009 के बीच जब लालू यादव रेल मंत्री थे, उन्होंने रेलवे की ग्रुप 'D' की नौकरियों के बदले में अपनी पत्नी और परिवार के नाम पर ज़मीन लिखवाकर आर्थिक लाभ प्राप्त किया।
- कई लोगों ने खुद या अपने परिवार के माध्यम से अपनी ज़मीनें लालू यादव के परिवार या उनके नियंत्रण वाली निजी कंपनी को बेची या उपहार में दी।
- इन नियुक्तियों के लिए कोई विज्ञापन या सार्वजनिक सूचना जारी नहीं की गई थी, फिर भी पटना के निवासी इन नौकरियों में मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर जैसे रेलवे ज़ोन में नियुक्त किए गए।
CBI का आरोप है कि यह भ्रष्टाचार और नौकरी के नाम पर ज़मीन हथियाने की साजिश है, जिसमें लालू प्रसाद यादव, उनके परिवार और कुछ अधिकारी शामिल हैं।
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