चीन ने अमेरिका को पछाड़ा: इंटरस्टेलर धूमकेतु 3I/ATLAS की तस्वीरें कैद करने वाला बना पहला देश – जानिए पूरी कहानी

एक ऐसा क्षण जिसने पूरी दुनिया में जिज्ञासा और प्रतिस्पर्धा दोनों को जन्म दिया, उसमें चीन ने रहस्यमयी इंटरस्टेलर धूमकेतु 3I/ATLAS की पहली तस्वीरें जारी कर दी हैं और वो भी मंगल ग्रह के पास से। वहीं, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की तस्वीरें अब तक सार्वजनिक नहीं हो पाई हैं। अमेरिका में संघीय सरकार के शटडाउन के कारण नासा का डेटा रोका गया है, जबकि बीजिंग ने तेजी दिखाते हुए अपनी तियानवेन-1 ऑर्बिटर से ली गई अद्भुत तस्वीरें साझा..

चीन ने अमेरिका को पछाड़ा: इंटरस्टेलर धूमकेतु 3I/ATLAS की तस्वीरें कैद करने वाला बना पहला देश – जानिए पूरी कहानी
09-11-2025 - 01:59 PM
09-11-2025 - 02:09 PM

नयी दिल्ली। एक ऐसा क्षण जिसने पूरी दुनिया में जिज्ञासा और प्रतिस्पर्धा दोनों को जन्म दिया, उसमें चीन ने रहस्यमयी इंटरस्टेलर धूमकेतु 3I/ATLAS की पहली तस्वीरें जारी कर दी हैं और वो भी मंगल ग्रह के पास से। वहीं, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की तस्वीरें अब तक सार्वजनिक नहीं हो पाई हैं।
अमेरिका में संघीय सरकार के शटडाउन  के कारण नासा का डेटा रोका गया है, जबकि बीजिंग ने तेजी दिखाते हुए अपनी तियानवेन-1 ऑर्बिटर से ली गई अद्भुत तस्वीरें साझा कर दी हैं।
यह असामान्य धूमकेतु, जिसने पहले ही वैज्ञानिक समुदाय में बहस छेड़ दी थी, अब मंगल के नजदीकी संपर्क के बाद और भी सवाल खड़े कर रहा है।

धूमकेतु 3I/ATLAS मंगल के पास कब और कैसे पहुंचा?

3 अक्टूबर को यह धूमकेतु मंगल के लगभग 1.8 करोड़ मील (करीब 2.9 करोड़ किलोमीटर) की दूरी से गुजरा।
इस दौरान चीन का Tianwen-1 और अमेरिका का Mars Reconnaissance Orbiter  दोनों ही यान इस दुर्लभ खगोलीय आगंतुक को कैद करने की स्थिति में थे। लेकिन CHRON की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक केवल चीन ने अपनी तस्वीरें सार्वजनिक की हैं।

चीन ने यह तस्वीरें कैसे लीं?

चाइना नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (CNSA) ने इस हफ्ते तस्वीरें साझा कीं जो Tianwen-1 की हाई-रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग कैमरा से ली गईं। यह ऑर्बिटर फरवरी 2021 से मंगल की कक्षा में घूम रहा है।
तस्वीरों में धूमकेतु का चमकदार केंद्र और उसके चारों ओर फैला विशाल कोमा (coma) दिखाई देता है, जिसका व्यास लगभग 5,000 से 10,000 किलोमीटर तक है।

CNSA ने बताया कि इतनी दूर और मंद वस्तु की फोटोग्राफी करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण था।
एजेंसी ने कहा, यह पहली बार था जब इतने दूर और अपेक्षाकृत मंद लक्ष्य की तस्वीरें ली गईं, जो मंगल की सतह के लक्ष्य से 10,000 से 1,00,000 गुना अधिक अंधकारमय है।”

इस उपलब्धि का श्रेय “Tianwen-1 टीम के सामूहिक अनुसंधानऔर धूमकेतु की कक्षा व चमक के अनुसार तैयार किए गए मिशन प्लान को दिया गया।
CNSA ने बताया कि तस्वीरों में धूमकेतु की मुख्य विशेषताएं स्पष्ट रूप से दिखती हैं, “इसमें कोर और उसके चारों ओर का कोमा शामिल है, जिसका व्यास हजारों किलोमीटर है… इन अवलोकनों के माध्यम से वैज्ञानिक अब ‘एटलस’ पर और गहन शोध कर रहे हैं।”

नासा की तस्वीरें अब तक क्यों नहीं आईं?

हालांकि नासा के Mars Reconnaissance Orbiter ने अपने HiRISE कैमरे से धूमकेतु की तस्वीरें ली थीं जो जुलाई में हबल टेलिस्कोप से ली गई तस्वीरों से तीन गुना अधिक रेज़ॉल्यूशन वाली बताई जाती हैं लेकिन अमेरिकी डेटा अब तक जारी नहीं किया गया है।

इस देरी की वजह वॉशिंगटन में चल रहा सरकारी शटडाउन है, जो 1 अक्टूबर से शुरू हुआ था और अब तक खत्म नहीं हुआ है।

अमेरिकी सांसद एना पॉलिना लूना ने कहा कि उन्होंने नासा से इस बारे में “अच्छी बातचीत” की है और जैसे ही सरकार दोबारा खुलती है, “वे डेटा और तस्वीरें जारी कर देंगे।” उन्होंने बताया दुर्भाग्य से, नौकरशाही कारणों से नासा फिलहाल ऐसा नहीं कर सकता।”

हार्वर्ड के खगोलशास्त्री एवी लोएब ने भी नासा से डेटा सार्वजनिक करने की अपील की, यह उम्मीद जताते हुए कि जल्द ही “HiRISE से बेहतर तस्वीरें” सामने आएंगी।

आखिर धूमकेतु 3I/ATLAS इतना खास क्यों है?

3I/ATLAS अब तक खोजे गए केवल तीसरे इंटरस्टेलर धूमकेतु में से एक है यानी यह हमारे सौरमंडल के बाहर से आया है।
29–30 अक्टूबर के बीच यह सूर्य के सबसे नजदीकी बिंदु (perihelion) पर पहुंचा,
लेकिन वैज्ञानिक हैरान हैं कि इसमें कोई स्पष्ट पूंछ (tail) दिखाई नहीं दी।

लोएब के अनुसार, धूमकेतु का कोमा (coma) जुलाई में ली गई हबल की तस्वीरों से “ज्यादा भिन्न नहीं” दिखा।
उन्होंने बताया कि इस धूमकेतु की कई अजीब विशेषताएं हैं —

  • इसका असामान्य रूप से बड़ा नाभिक (massive nucleus),
  • तेज गति (high velocity),
  • सूर्य के पास पहुंचने पर तेजी से चमकना (rapid brightening),
  • और यहां तक कि इसका सूर्य से भी अधिक नीला दिखाई देना (turned bluer than the Sun)

लोएब ने लिखा, गति संरक्षण के सिद्धांत के आधार पर, मैंने अनुमान लगाया कि 3I/ATLAS ने अपने परिहेलियन के दौरान 13% से अधिक द्रव्यमान खोया।
सामान्यतः इस प्रक्रिया से धूल और गैस का विशाल कोमा बनना चाहिए था, जिसे सौर विकिरण दबाव और सौर पवन द्वारा सूर्य से दूर एक लंबी पूंछ के रूप में फैल जाना चाहिए था पर ऐसा नहीं हुआ।”

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।