क्या चीन चिंतित है? पीएम मोदी की यात्रा के दौरान भारत के इंडोनेशिया के साथ ब्रह्मोस सौदे पर मुहर लगाने की संभावना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया की मौजूदा यात्रा से रक्षा सहयोग में एक बड़ी सफलता मिल सकती है। जकार्ता में भारत के राजदूत संदीप चक्रवर्ती ने कहा है कि प्रस्तावित ब्रह्मोस मिसाइल सौदे पर बातचीत काफी आगे (एडवांस) बढ़ चुकी..
नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया की मौजूदा यात्रा से रक्षा सहयोग में एक बड़ी सफलता मिल सकती है। जकार्ता में भारत के राजदूत संदीप चक्रवर्ती ने कहा है कि प्रस्तावित ब्रह्मोस मिसाइल सौदे पर बातचीत काफी आगे (एडवांस) बढ़ चुकी है।
उन्होंने भरोसा जताया कि इस यात्रा के "बहुत सकारात्मक" परिणाम आ सकते हैं, खासकर रक्षा क्षेत्र में। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दोनों देशों द्वारा समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स), व्यापार, शिक्षा और लोगों से लोगों के संबंधों को कवर करने वाले कई महत्वपूर्ण समझौतों की घोषणा करने की उम्मीद है।
मोदी की यह इंडोनेशिया की चौथी और 2018 के बाद से दूसरी आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा है। दो दिवसीय कार्यक्रम में इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो के साथ रणनीतिक और आर्थिक मुद्दों की एक विस्तृत श्रृंखला पर गहन वार्ता होने की उम्मीद है।
ब्रह्मोस सौदे पर बात आगे बढ़ने की संभावना
शिखर सम्मेलन के दौरान प्रस्तावित ब्रह्मोस मिसाइल सौदा मुख्य विषयों में से एक होने की उम्मीद है। बातचीत के बारे में बात करते हुए, राजदूत चक्रवर्ती ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच वार्ता एक उन्नत चरण में पहुंच गई है।
उन्होंने कहा, "ब्रह्मोस मिसाइल के मुद्दे पर निश्चित रूप से बहुत महत्वपूर्ण बातचीत होगी। मुझे पूरा विश्वास है कि बहुत सकारात्मक और अच्छे परिणाम सामने आएंगे। इस सौदे पर बातचीत बहुत उन्नत स्तर पर पहुंच गई है, और हमें उम्मीद है कि इस यात्रा के दौरान देश को बड़ी खुशखबरी मिलेगी।"
अगर यह सौदा आगे बढ़ता है, तो यह भारत के स्वदेशी रक्षा उद्योग के लिए एक और बड़ी निर्यात सफलता होगी और नई दिल्ली व जकार्ता के बीच रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करेगी।
एजेंडे में शामिल पांच प्रमुख मुद्दे
राजदूत के अनुसार, वार्ता में पांच व्यापक क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा जिनसे आने वाले वर्षों में भारत-इंडोनेशिया संबंधों के मजबूत होने की उम्मीद है..
- रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा: यह शीर्ष प्राथमिकताओं में होगा, खासकर हिंद महासागर और दुनिया के सबसे व्यस्त शिपिंग मार्गों में से एक 'मलक्का जलडमरूमध्य' में।
- व्यापार और निवेश: अधिकारियों द्वारा इंडोनेशिया में भारतीय कंपनियों की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ व्यापार और निवेश बढ़ाने पर चर्चा करने की उम्मीद है।
- क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिज): ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहन की बैटरी, सेमीकंडक्टर निर्माण और कई उन्नत प्रौद्योगिकियों के लिए आवश्यक हैं। यह बातचीत का एक प्रमुख हिस्सा होगा।
- शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा: इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को लेकर भी चर्चा की जाएगी।
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान: लोगों से लोगों के बीच मजबूत संपर्क स्थापित करने पर जोर दिया जाएगा, और दोनों देश इन क्षेत्रों में नए समझौतों पर विचार कर रहे हैं।
महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) पर भी होगी चर्चा
इंडोनेशिया के पास कई महत्वपूर्ण खनिजों के दुनिया के कुछ सबसे बड़े भंडार हैं, जो इसे विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाओं (सप्लाई चेन) की तलाश करने वाले देशों के लिए एक महत्वपूर्ण भागीदार बनाता है।
इंडोनेशिया के क्रिटिकल मिनरल्स क्षेत्र में चीन की मजबूत उपस्थिति के बारे में पूछे जाने पर, राजदूत चक्रवर्ती ने कहा कि इंडोनेशिया एक स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करता है और सभी देशों को समान अवसर प्रदान करता है।
उन्होंने कहा, "यह सच है कि वहां चीन की उपस्थिति है, लेकिन इंडोनेशिया की विदेश नीति स्वतंत्र है और सभी को समान अवसर देती है। प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान, महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भी एक बड़ी घोषणा हो सकती है।"
इस क्षेत्र में होने वाली कोई भी प्रगति भारतीय उद्योगों को स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों, इलेक्ट्रॉनिक्स और विनिर्माण के लिए आवश्यक कच्चे माल तक पहुंच को मजबूत करने में मदद कर सकती है।
यात्रा के दौरान व्यस्त कार्यक्रम
राजदूत ने इस यात्रा को बैठकों और उच्च स्तरीय मुलाकातों से भरा हुआ बताया।
इस यात्रा में इंडोनेशिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के साथ बातचीत भी शामिल होगी। राजदूत चक्रवर्ती ने कहा कि लगभग 4,000 प्रवासी भारतीयों के इस कार्यक्रम में शामिल होने की उम्मीद है, जो 7 जुलाई को स्थानीय समयानुसार शाम 7 बजे (भारत में शाम 5:30 बजे) निर्धारित है।
उन्होंने कहा कि हालांकि ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की तुलना में इंडोनेशिया में भारतीय समुदाय छोटा है, लेकिन प्रधानमंत्री की यात्रा को लेकर उत्साह बहुत अधिक है और प्रवासी भारतीय बड़ी संख्या में उनका स्वागत करने की तैयारी कर रहे हैं।
इस यात्रा से रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग मजबूत होने की उम्मीद है, क्योंकि दोनों देश हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में अपनी साझेदारी को लगातार मजबूत कर रहे हैं।
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