भारत-तुर्की संबंधों में खटास के बाद बडे़ व्यापारिक सौदों की समीक्षा शुरू
भारत और तुर्की के बीच व्यापारिक रिश्तों में नई दरार उभर आई है, खासकर तब से जब अंकारा ने इस्लामाबाद का समर्थन करते हुए भारत के ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ की आलोचना की। इसके तहत भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी शिविरों पर हवाई हमले किए थे..
नयी दिल्ली। भारत और तुर्की के बीच व्यापारिक रिश्तों में नई दरार उभर आई है, खासकर तब से जब अंकारा ने इस्लामाबाद का समर्थन करते हुए भारत के ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ की आलोचना की। इसके तहत भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी शिविरों पर हवाई हमले किए थे।
अब भारत में तुर्की के उत्पादों के बहिष्कार और वहां की यात्रा से परहेज की देशव्यापी अपील हो रही है। पर यह नाराजगी केवल पर्यटन तक सीमित नहीं रही है। केंद्र सरकार ने तुर्की की कंपनियों से जुड़े अरबों डॉलर के इन्फ्रास्ट्रक्चर, एविएशन और व्यापारिक समझौतों की समीक्षा शुरू कर दी है।
सरकार ने शुरू की 'गहन समीक्षा'
News18 की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने सभी तुर्की से जुड़े व्यापारिक सौदों की सूक्ष्म जांच शुरू कर दी है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "सभी परियोजनाओं और समझौतों की समीक्षा की जा रही है, चाहे वे सक्रिय हों या समाप्त हो चुके हों। हम प्रत्येक सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी की विस्तृत जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं।"
भारत में तुर्की की मौजूदगी — कहां और कैसे
तुर्की की कंपनियां भारत के कई राज्यों में सक्रिय हैं, जिनमें शामिल हैं:
- गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली
- सेक्टर: ऑटोमोबाइल, सूचना-प्रौद्योगिकी (IT), मेट्रो रेल, सुरंग निर्माण, एविएशन
- कई MoU भी विभिन्न क्षेत्रों में हस्ताक्षरित
वित्तीय आंकड़े
- द्विपक्षीय व्यापार: $10.4 अरब (वित्त वर्ष 2023-24)
- एफडीआई रैंक: तुर्की 45वें स्थान पर
- कुल एफडीआई (अप्रैल 2000 - सितंबर 2024): $240.18 मिलियन
(IBEF की फरवरी 2025 की रिपोर्ट)
महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तुर्की की भागीदारी
- मेट्रो परियोजनाएं: लखनऊ, पुणे, मुंबई में तुर्की की निर्माण कंपनियां सक्रिय
- निर्माण संयंत्र: गुजरात में एक भारतीय कंपनी के साथ संयुक्त उद्यम
- एविएशन सेक्टर: कुछ तुर्की कंपनियां भारतीय हवाईअड्डों में सेवाएं दे रही हैं
कश्मीर पर तुर्की के बयान और पाकिस्तान से गठजोड़ बना विवाद की जड़
तुर्की का लगातार कश्मीर पर बयान देना और पाकिस्तान के साथ उसकी सुरक्षा साझेदारी भारत को खटक रही है।
- तुर्की के विदेश मंत्रालय ने भारत की एयरस्ट्राइक को "उकसाने वाली कार्रवाई" बताया
- रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने तुर्की के बने Asisguard Songar ड्रोन का इस्तेमाल भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने में किया
- भारतीय वायु रक्षा प्रणाली ने इन ड्रोन को निष्क्रिय कर दिया, और वायुसेना प्रमुख ने कहा:
"चाहे वो तुर्की का ड्रोन हो या कोई और तकनीक, भारत की रक्षा प्रणाली के सामने कुछ नहीं टिकता।"
भविष्य के निवेश और साझेदारियां खतरे में
एक वरिष्ठ व्यापार विशेषज्ञ ने बताया, "हालांकि कुछ दीर्घकालिक समझौते मौजूदा संकट से प्रभावित नहीं होंगे, लेकिन तुर्की के लगातार भारत-विरोधी रुख से नए निवेश और प्रस्तावित साझेदारियों की संभावनाएं जरूर घट सकती हैं।"
निष्कर्ष
भारत-तुर्की संबंधों में आया यह नया तनाव भविष्य की आर्थिक साझेदारियों और निवेश योजनाओं पर गहरा असर डाल सकता है। जहां एक ओर भारत अपने रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए कड़े कदम उठा रहा है, वहीं तुर्की की पाकिस्तान-समर्थक नीति उसे भारत के विश्वास से दूर कर रही है।
अब देखना होगा कि यह तनाव केवल कूटनीति तक सीमित रहता है या आर्थिक मोर्चे पर गहरा असर डालता है।
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