दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने जस्टिस अरुण मोंगा और तारा वितस्ता गंजू के तबादले पर बार की भावनाओं से जताई सहमति

दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने सोमवार को कहा कि वे न्यायमूर्ति अरुण मोंगा और तारा वितस्ता गंजू के तबादले को लेकर बार (वकीलों) की भावनाओं से सहमत हैं। जस्टिस मोंगा को राजस्थान हाईकोर्ट और जस्टिस गंजू को कर्नाटक हाईकोर्ट स्थानांतरित किया गया है। खासतौर पर जस्टिस गंजू के तबादले को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) और कई वरिष्ठ वकीलों ने विरोध..

दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने जस्टिस अरुण मोंगा और तारा वितस्ता गंजू के तबादले पर बार की भावनाओं से जताई सहमति
29-10-2025 - 12:43 PM
22-04-2026 - 05:53 PM

नयी दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने सोमवार को कहा कि वे न्यायमूर्ति अरुण मोंगा और तारा वितस्ता गंजू के तबादले को लेकर बार (वकीलों) की भावनाओं से सहमत हैं।
जस्टिस मोंगा को राजस्थान हाईकोर्ट और जस्टिस गंजू को कर्नाटक हाईकोर्ट स्थानांतरित किया गया है। खासतौर पर जस्टिस गंजू के तबादले को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) और कई वरिष्ठ वकीलों ने विरोध जताया था।

विरोध और समर्थन:
DHCBA, महिला वकीलों के समूह और कई अन्य बार संगठनों के सदस्यों जिनमें वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा भी शामिल हैं, ने मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई को पत्र लिखकर जस्टिस गंजू के तबादले का विरोध किया था।

मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय का बयान
दोनों न्यायाधीशों को विदाई देने के लिए आयोजित फुल कोर्ट रेफरेंस में मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय ने कहा, मैं बार के उन सदस्यों की भावनाओं का सम्मान करता हूं, जिन्होंने हमारे दो सहयोगियों के तबादले पर चिंता व्यक्त की है। मैं भी DHCBA अध्यक्ष के माध्यम से व्यक्त की गई इन भावनाओं से सहमत हूं और अपने दोनों सहयोगियों को शुभकामनाएं देता हूं।”

जस्टिस अरुण मोंगा के विचार

जस्टिस मोंगा ने अपने संबोधन में कहा, एक जज को सार्वजनिक रूप से बोलने की ज़रूरत नहीं होती, उसके निर्णय ही उसकी सच्ची आवाज़ होते हैं। एक न्यायाधीश की असली पहचान उसके भाषण में नहीं, बल्कि उसके निर्णयों में झलकने वाली सोच, संयम और विवेक में होती है।”

उन्होंने कहा कि हर निर्णय केवल शब्दों का समूह नहीं होता, बल्कि उसमें न्यायाधीश की न्यायप्रियता, मानव स्वभाव की समझ और जीवन के प्रति दृष्टिकोण झलकता है।
जस्टिस मोंगा ने DHCBA का आभार जताते हुए कहा कि जब वे दिल्ली आए थे, तब एसोसिएशन ने उन्हें “दत्तक अभिभावक” की तरह सहयोग दिया।

जस्टिस तारा वितस्ता गंजू के विचार:

अपने भावनात्मक संबोधन में जस्टिस गंजू ने कहा, न्यायपालिका केवल विवादों का निपटारा करने वाली संस्था नहीं है, बल्कि यह संविधान में दिए गए वादे — स्वतंत्रता, समानता और न्यायकी संरक्षक भी है। हमारा कर्तव्य है कि कानून हमेशा कमजोरों की ढाल बने, न कि शक्तिशालियों की तलवार।”

उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास ही न्यायपालिका की सबसे बड़ी ताकत है और इसे ईमानदारी, स्वतंत्रता और पारदर्शिता से बनाए रखना होगा।

युवा वकीलों को संदेश देते हुए उन्होंने कहा, एक अधिवक्ता की असली पहचान उसके बहस किए गए मामलों की संख्या से नहीं, बल्कि जिस गरिमा और निष्पक्षता से वे लड़े जाते हैं, उससे होती है। याद रखें कि वकालत एक सेवा है अदालत, मुवक्किल और समाज के प्रति।”

उन्होंने यह भी कहा कि देर रात तक काम करना या छुट्टियों में केस तैयार करना भले ही आलोचना का कारण बना हो, लेकिन उन्होंने मेहनत को कभी गलती नहीं माना। उन्होंने कहा, न्याय का दायित्व घड़ी की सुइयों से नहीं चलता। हमारी प्राथमिकता हमेशा देश और न्याय की चाह रखने वाले नागरिकों के प्रति होनी चाहिए।

अंत में जस्टिस गंजू ने कहा कि एक जज के जीवन में परिवर्तन अपरिहार्य होता है, परंतु कुछ विदाइयाँ दिल को गहराई से छू जाती हैं। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट को अपना “गुरुकुल” बताते हुए सभी वकीलों का आभार व्यक्त किया।

बार एसोसिएशन की प्रतिक्रिया:

DHCBA के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने कहा कि बार जजों के लगातार हो रहे तबादलों को लेकर गहरी पीड़ा महसूस कर रही है। उन्होंने कहा, न्यायिक स्वतंत्रता जजों का विशेषाधिकार नहीं बल्कि जनता का अधिकार है। केवल एक स्वतंत्र न्यायपालिका ही नागरिकों की स्वतंत्रता की रक्षा कर सकती है।”

उन्होंने आगे कहा कि हम टकराव की स्थिति में नहीं हैं, लेकिन अपनी पीड़ा व्यक्त करना ज़रूरी है। अगर हम चुप रहें, तो यह हमारी जिम्मेदारी से पलायन होगा।”

पृष्ठभूमि:
जस्टिस अरुण मोंगा को जुलाई 2025 में राजस्थान हाईकोर्ट से दिल्ली स्थानांतरित किया गया था।
जस्टिस तारा वितस्ता गंजू को मई 2022 में दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।