पूर्व वाणिज्य सचिव की चेतावनी—‘अंबेसडर-फिएट दौर’ में लौट सकता है भारत; भारत-EU FTA में कारों पर सीमित और चरणबद्ध टैरिफ कटौती के पक्ष में
भारत के पूर्व वाणिज्य सचिव अनुप वाधवान ने चेतावनी दी है कि अगर घरेलू उद्योग को अनिश्चित काल तक संरक्षण दिया गया, तो भारत एक बार फिर “अंबेसडर और फिएट के दौर” में लौट सकता है। साथ ही उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत कारों पर सीमित और चरणबद्ध टैरिफ कटौती का समर्थन..
भारत के पूर्व वाणिज्य सचिव अनुप वाधवान ने चेतावनी दी है कि अगर घरेलू उद्योग को अनिश्चित काल तक संरक्षण दिया गया, तो भारत एक बार फिर “अंबेसडर और फिएट के दौर” में लौट सकता है। साथ ही उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत कारों पर सीमित और चरणबद्ध टैरिफ कटौती का समर्थन किया है, क्योंकि यूरोपीय संघ भारतीय बाजार में अपनी कारों के लिए अधिक पहुंच चाहता है।
एक साक्षात्कार में वाधवान ने कहा, “घरेलू उद्योग को बचाने के लिए अनिश्चित काल तक ऊंचे टैरिफ बनाए रखना किसी भी स्थिति में एक अच्छी नीति नहीं है। इससे अक्षमता बढ़ती है और उपभोक्ताओं को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ उत्पाद प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध नहीं हो पाते। अगर संरक्षण अनिश्चित काल तक चलता रहा, तो अंततः आप फिर से अंबेसडर-फिएट जैसे दौर में पहुंच जाएंगे, जहां दुनिया उच्च गुणवत्ता और तकनीकी रूप से उन्नत उत्पाद सस्ती कीमतों पर इस्तेमाल कर रही होगी, जबकि आपके उपभोक्ता इस कल्याणकारी लाभ से वंचित रह जाएंगे।”
उन्होंने कहा कि चूंकि कई यूरोपीय उत्पाद घरेलू उत्पादों से अलग मूल्य वर्ग को लक्षित करते हैं, इसलिए भारत सावधानीपूर्वक टैरिफ रियायतें दे सकता है। इसके लिए चरणबद्ध शुल्क कटौती, टैरिफ रेट कोटा और आंशिक टैरिफ कटौती जैसे सुरक्षा उपाय अपनाए जा सकते हैं। यह मॉडल भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते में अपनाए गए प्रावधानों जैसा हो सकता है।
वाधवान के अनुसार, ऐसे उपाय घरेलू उत्पादकों को संरक्षण देंगे और उन्हें खुद को ढालने का समय मिलेगा, साथ ही एफटीए के तहत वाइन और कार जैसे यूरोपीय उत्पादों के लिए बाजार को धीरे-धीरे खोला जा सकेगा।
उन्होंने कहा, “भारतीयों को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता की वाइन और चीज़ सस्ती कीमतों पर क्यों नहीं मिलनी चाहिए? सिर्फ इसलिए कि उपभोक्ता अपने कल्याण से जुड़े मुद्दों पर चुप रहते हैं और उद्योग मुखर रहता है, इसका मतलब यह नहीं कि अनिश्चित काल तक ऊंचे टैरिफ बनाए रखना सही है।”
भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते से क्या बदलेगा?
भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते पर 27 जनवरी को हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। इस समझौते के तहत EU से आने वाली वाइन, स्पिरिट्स और अन्य मादक पेय पदार्थों पर टैरिफ में कटौती हो सकती है। इसके साथ ही प्रमाणन से जुड़े नियमों को भी सरल बनाया जा सकता है, जिससे ये उत्पाद भारतीय उपभोक्ताओं के लिए अधिक किफायती हो जाएंगे।
यूरोपीय कार निर्माता, खासतौर पर प्रीमियम सेगमेंट की गाड़ियां बनाने वाली कंपनियां, भी भारतीय बाजार में अपेक्षाकृत आसान पहुंच हासिल कर सकती हैं। इससे EU के ऑटो निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है, जो फिलहाल भारी आयात शुल्क का सामना कर रहा है।
वर्तमान में EU से आने वाली वाइन और स्पिरिट्स पर भारत में 150 से 200 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता है, जबकि लग्जरी कारों पर यह शुल्क 100 से 125 प्रतिशत तक है।
वार्ता की पृष्ठभूमि
फरवरी 2025 में भारत और यूरोपीय संघ ने प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत को तेज करने का फैसला किया था, ताकि अस्थिर वैश्विक व्यापार नीतियों से पैदा हो रही बाधाओं का मुकाबला किया जा सके। लक्ष्य था कि इस समझौते को उसी साल के अंत तक शुरुआती तौर पर पूरा कर लिया जाए।
एक दशक से अधिक समय से बातचीत में चल रहे भारत-EU व्यापार समझौते में वस्तुओं और सेवाओं से जुड़े कुल 24 अध्याय शामिल हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा, “हमें अपने निर्माताओं को प्रतिस्पर्धी बनने में सहयोग जरूर करना चाहिए, लेकिन अंततः उन्हें प्रतिस्पर्धा का सामना करना ही होगा।”
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