कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्वजज का नाम बंगाल वोटर लिस्ट से हटाया गया, न्यायिक प्रक्रिया पर उठे सवाल

Sahidullah Munshi, जो Calcutta High Court के पूर्व न्यायाधीश और वर्तमान में पश्चिम बंगाल वक्फ बोर्ड के चेयरपर्सन हैं, का नाम न्यायिक अधिकारियों द्वारा की गई सुनवाई (एडजुडिकेशन) के बाद मतदाता सूची से हटा दिया..

कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्वजज का नाम बंगाल वोटर लिस्ट से हटाया गया, न्यायिक प्रक्रिया पर उठे सवाल
27-03-2026 - 10:08 AM
22-04-2026 - 05:53 PM

कोलकाता। Sahidullah Munshi, जो Calcutta High Court के पूर्व न्यायाधीश और वर्तमान में पश्चिम बंगाल वक्फ बोर्ड के चेयरपर्सन हैं, का नाम न्यायिक अधिकारियों द्वारा की गई सुनवाई (एडजुडिकेशन) के बाद मतदाता सूची से हटा दिया गया है।

मुंशी ने इस फैसले पर हैरानी जताते हुए कहा, “यह चौंकाने वाला है। मेरा नाम तो हटा दिया गया है, लेकिन मेरी पत्नी और बड़े बेटे का नाम अभी भी एडजुडिकेशन के तहत है। मेरे छोटे बेटे ने हाल ही में फॉर्म-6 के जरिए आवेदन किया था और उसे EPIC नंबर मिल चुका है।”

उन्होंने बताया कि वे वर्ष 2013 से 2020 तक Calcutta High Court में न्यायाधीश रहे थे।

मुंशी के अनुसार, “हमें सुनवाई के लिए बुलाया गया था। मेरा और मेरी पत्नी का नाम 2002 की वोटर लिस्ट में भी था। मैंने 2002 की सूची, पासपोर्ट, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज जमा किए। यहां तक कि ERO (इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर) भी हैरान थे कि मुझे सुनवाई के लिए क्यों बुलाया गया। उन्होंने आश्वासन दिया था कि मेरा नाम क्लियर हो जाएगा, लेकिन बाद में मामला एडजुडिकेशन में भेज दिया गया।”

लाखों मतदाताओं के नाम जांच के दायरे में

चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) के बाद 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी। इसके बाद 60 लाख से अधिक दावों को Calcutta High Court द्वारा नियुक्त न्यायिक अधिकारियों के पास जांच (एडजुडिकेशन) के लिए भेजा गया।

अब तक 32 लाख मामलों का निपटारा हो चुका है, जिनमें से लगभग 35% से 40% नामों को सूची से हटा दिया गया है।

अपील की तैयारी में मुंशी

मुंशी ने कहा, “मुझे ट्रिब्यूनल में अपील करनी होगी। अभी तक मुझे यह भी नहीं बताया गया कि मेरा नाम क्यों हटाया गया।”

Election Commission of India ने पश्चिम बंगाल में 19 अपीलीय ट्रिब्यूनल गठित किए हैं, जहां रिटायर्ड जजों को नियुक्त किया गया है ताकि वे ऐसे मामलों में अपील सुन सकें, जिनमें मतदाताओं को ‘एडजुडिकेशन’ के तहत रखा गया है।

मुंशी ने प्रक्रिया पर टिप्पणी करते हुए कहा, “मैं किसी को दोष नहीं दे रहा, लेकिन सब कुछ इतनी जल्दी में किया गया कि शायद दस्तावेजों की ठीक से जांच नहीं हो पाई। मैंने पासपोर्ट तक जमा किया था, ताकि उस पर कोई विवाद न हो।”

राजनीतिक बयानबाजी तेज

इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ All India Trinamool Congress (TMC) ने Election Commission of India पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

TMC प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने कहा, “चुनाव आयोग भाजपा को हर हाल में जिताने में मदद कर रहा है। आयोग बीजेपी का गुलाम बन गया है। अगर ऐसा ही करना है, तो चुनाव से पहले ही बीजेपी को विजेता घोषित कर देना चाहिए। आयोग का उद्देश्य समावेशिता होना चाहिए था, लेकिन वे बड़े पैमाने पर नाम हटाने में लगे हुए हैं।”

वहीं, Rahul Sinha, वरिष्ठ भाजपा नेता, ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा, “इस पर सिर्फ चुनाव आयोग ही जवाब दे सकता है। मेरी कोई टिप्पणी नहीं है।”

इस मामले पर पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।