अदालत में विनायक सावरकर के पड़पोते का बयान कि विनायक दामोदर सावरकर ने 5 दया याचिकाएं दायर कीं, गाय को ‘उपयोगी’ बताया लेकिन भगवान नहीं..!

राहुल गांधी के खिलाफ दायर मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान पुणे की विशेष MP/MLA अदालत में विनायक दामोदर सावरकर के विचारों और कार्यों को लेकर अहम बयान सामने आए। सावरकर के पड़पोते सात्यकी सावरकर ने जिरह के दौरान कई ऐतिहासिक तथ्यों की पुष्टि..

अदालत में विनायक सावरकर के पड़पोते का बयान कि विनायक दामोदर सावरकर ने 5 दया याचिकाएं दायर कीं, गाय को ‘उपयोगी’ बताया लेकिन भगवान नहीं..!
03-05-2026 - 10:28 AM

पुणे। राहुल गांधी के खिलाफ दायर मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान पुणे की विशेष MP/MLA अदालत में विनायक दामोदर सावरकर के विचारों और कार्यों को लेकर अहम बयान सामने आए। सावरकर के पड़पोते सात्यकी सावरकर ने जिरह के दौरान कई ऐतिहासिक तथ्यों की पुष्टि की।

दया याचिकाओं पर क्या कहा?

रिपोर्ट के अनुसार, सात्यकी सावरकर ने अदालत में स्वीकार किया कि सावरकर ने अपनी कैद के दौरान ब्रिटिश सरकार को कई बार दया याचिकाएं भेजी थीं। उन्होंने कहा, यह कहना सही है कि सावरकर ने सेल्युलर जेल में रहते हुए पांच बार दया याचिकाएं दायर की थीं। सिर्फ सावरकर ही नहीं, बल्कि कई अन्य राजनीतिक कैदियों ने भी ऐसी याचिकाएं भेजी थीं।”

गाय पर सावरकर के विचार

सुनवाई के दौरान सावरकर के धार्मिक दृष्टिकोण पर भी चर्चा हुई, खासकर गाय को लेकर।
सात्यकी ने पुष्टि की, यह सही है कि सावरकर का मानना था कि गाय एक उपयोगी पशु है, भगवान नहीं।” इससे स्पष्ट होता है कि सावरकर गाय को धार्मिक प्रतीक के रूप में नहीं बल्कि व्यावहारिक दृष्टिकोण से देखते थे।

दो-राष्ट्र सिद्धांत पर विवाद

सात्यकी सावरकर ने इस आरोप को खारिज किया कि सावरकर ने दो-राष्ट्र सिद्धांत दिया था।
उन्होंने कहा, यह सही नहीं है कि कुछ इतिहासकारों के अनुसार सावरकर ने दो-राष्ट्र सिद्धांत प्रस्तावित किया। सावरकर ने इस विवाद पर तथ्यात्मक टिप्पणी की थी लेकिन इसका मूल विचार उनका नहीं था बल्कि यह अवधारणा सर सैयद अहमद खान ने दी थी।”

द्वितीय विश्व युद्ध और सेना भर्ती का मुद्दा

अदालत में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश भारतीय सेना में भर्ती के लिए सावरकर के आह्वान पर भी चर्चा हुई। सात्यकि ने कहा कि इसे अक्सर गलत समझा जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया, यह आरोप नहीं बल्कि एक आपत्ति है, जो सावरकर की भूमिका को समझे बिना उठाई जाती है।”

उन्होंने इसके पीछे का तर्क बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य युवाओं को सैन्य प्रशिक्षण और हथियारों का अनुभव दिलाना था ताकि स्वतंत्रता के बाद भारत के पास अपनी मजबूत सेना हो।

अन्य मुद्दों पर प्रतिक्रिया

जब सावरकर की तुलना भगत सिंह या बटुकेश्वर दत्त जैसे अन्य स्वतंत्रता सेनानियों से करने को कहा गया, तो सात्यकी ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

उन्होंने कहा, हर महान व्यक्ति के बारे में मतभेद और बहस होती है। राष्ट्रीय गौरव को सामने लाना भारत सरकार का काम है।”

आरएसएस जैसे संगठनों से सावरकर के वैचारिक संबंधों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है।

संसद में सावरकर की तस्वीर लगाने या भारत रत्न देने की मांग जैसे मुद्दों पर उन्होंने कहा कि यह सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने कहा, राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े फैसले भारत सरकार ही लेती है,”
अदालत में दिए गए इन बयानों से सावरकर के विचारों और ऐतिहासिक भूमिका को लेकर चल रही बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है, जो राजनीतिक और वैचारिक स्तर पर लगातार विवाद का विषय बनी हुई है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।