गुजरात पुलिस को मिला नया डीजीपी: अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ अभियान चलाने वाले ज्ञानेंद्र सिंह मलिक बने पुलिस प्रमुख
गुजरात सरकार ने शनिवार को 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह मलिक को गुजरात पुलिस का नया पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नियुक्त किया। मलिक इससे पहले अहमदाबाद के पुलिस आयुक्त के रूप में कार्यरत थे और अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ बड़े अभियान..
गुजरात सरकार ने शनिवार को 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह मलिक को गुजरात पुलिस का नया पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नियुक्त किया। मलिक इससे पहले अहमदाबाद के पुलिस आयुक्त के रूप में कार्यरत थे और अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ बड़े अभियान का नेतृत्व करने के कारण चर्चा में रहे थे।
अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ चलाया था बड़ा अभियान
ज्ञानेंद्र सिंह मलिक ने जुलाई 2023 में अहमदाबाद पुलिस आयुक्त का पद संभाला था। इससे पहले वह दिल्ली में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) के रूप में उत्तर और एयरपोर्ट सेक्टर की जिम्मेदारी निभा चुके थे। इसके अलावा वे सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के गुजरात फ्रंटियर के महानिरीक्षक (आईजी) भी रह चुके हैं।
अहमदाबाद पुलिस आयुक्त के रूप में उन्होंने पिछले वर्ष 465 अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लेकर उनके निर्वासन की कार्रवाई का नेतृत्व किया। यह अभियान चंडोला झील के आसपास स्थित अवैध झुग्गियों को हटाने की व्यापक कार्रवाई का हिस्सा था।
संयुक्त राष्ट्र मिशन में भी निभा चुके हैं अहम भूमिका
अपने करियर की शुरुआत में वर्ष 2002 में मलिक ने संयुक्त राष्ट्र के कोसोवो शांति मिशन में एक वर्ष तक सेवा दी थी। इस दौरान वे युद्ध अपराधों की जांच से जुड़े रहे।
यूपीएससी के पैनल से हुआ चयन
सूत्रों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप राज्य पुलिस प्रमुख की नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा गुजरात सरकार को भेजे गए तीन नामों के पैनल में से ज्ञानेंद्र सिंह मलिक का चयन किया गया।
उनके गुजरात पुलिस प्रमुख बनने की अटकलें 8 अप्रैल 2026 से ही लगाई जा रही थीं, जब उन्हें गुजरात आईपीएस एसोसिएशन का अध्यक्ष चुना गया था। पिछले वर्ष भी वे तत्कालीन डीजीपी विकास सहाय के उत्तराधिकारी के प्रमुख दावेदारों में शामिल थे।
केएलएन राव के पास रहेंगे अन्य महत्वपूर्ण विभाग
दिसंबर 2025 से डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे के. एल. एन. राव अब भी सीआईडी (क्राइम एवं रेलवे) के प्रमुख बने रहेंगे। साथ ही उनके पास जेल एवं सुधार प्रशासन का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा।
खेल प्रेमी अधिकारी हैं मलिक
सूत्रों के मुताबिक, ज्ञानेंद्र सिंह मलिक अपने दिन की शुरुआत बैडमिंटन खेलकर करते हैं। उन्होंने घुड़सवारी, टेंट पेगिंग और अन्य रैकेट खेलों में भी कई पदक जीते हैं।
जुलाई 2023 से थे अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर
हरियाणा के फरीदाबाद के मूल निवासी मलिक 27 जुलाई 2023 से अहमदाबाद पुलिस आयुक्त के रूप में कार्यरत थे। अप्रैल 2024 में उन्हें डीजीपी रैंक में पदोन्नत किया गया।
उनके नेतृत्व में अहमदाबाद में सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से 24,000 से अधिक निगरानी कैमरे स्थापित किए गए।
चंडोला झील पर सबसे बड़ा अतिक्रमण हटाओ अभियान
ज्ञानेंद्र सिंह मलिक के नेतृत्व में गुजरात का सबसे बड़ा अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया, जिसमें चंडोला झील क्षेत्र से लगभग 4 लाख वर्ग मीटर अवैध कब्जा हटाया गया।
इस दौरान करीब 12,500 आवासीय, व्यावसायिक और धार्मिक ढांचों को हटाया गया। इसी तर्ज पर उन्होंने राज्यभर में "ऑपरेशन डेल्टा हंट" नामक अभियान भी शुरू किया, जो अभी भी जारी है।
लंबा और विविध प्रशासनिक अनुभव
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, मलिक की पहली नियुक्ति भुज में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) के रूप में हुई थी।
इसके बाद उन्होंने छह जिलों—डांग, पोरबंदर, सुरेंद्रनगर, अहमदाबाद ग्रामीण, भरूच और कच्छ—में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के रूप में सेवा दी।
वे बॉर्डर, अहमदाबाद, वडोदरा और सूरत रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) भी रह चुके हैं।
इसके अलावा उन्होंने निम्न पदों पर भी कार्य किया है—
- गुजरात के राज्यपाल के एडीसी (एड-डी-कैंप)
- अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के डीसीपी
- अहमदाबाद एवं वडोदरा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त
- सीआईडी (क्राइम एवं इंटेलिजेंस) में विभिन्न जिम्मेदारियां
- भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो
- निषेध एवं आबकारी विभाग
- गृह विभाग में सचिव
मिल चुके हैं कई प्रतिष्ठित सम्मान
ज्ञानेंद्र सिंह मलिक को उत्कृष्ट सेवाओं के लिए पुलिस पदक (Police Medal for Meritorious Service) तथा विशिष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक (President’s Police Medal for Distinguished Service) से सम्मानित किया जा चुका है।
दिसंबर 2025 से खाली था डीजीपी का पद
गुजरात पुलिस प्रमुख का पद 31 दिसंबर 2025 से खाली था, जब तत्कालीन पूर्णकालिक डीजीपी एवं आईजी विकास सहाय दो वर्ष दस महीने की सेवा और छह महीने के विस्तार के बाद सेवानिवृत्त हुए थे। उसी दिन सरकार ने केएलएन राव को अतिरिक्त प्रभार सौंपा था।
हालांकि माना जा रहा था कि राव को बाद में पूर्णकालिक डीजीपी बनाया जाएगा, लेकिन राज्य सरकार ने अंततः ज्ञानेंद्र सिंह मलिक को यह जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया।
शमशेर सिंह को लेकर भी बनी रही चर्चा
1991 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी शमशेर सिंह को जनवरी 2026 में समयपूर्व गुजरात वापस बुलाया गया था, जिससे उनके डीजीपी बनने की अटकलें तेज हो गई थीं।
लेकिन, सितंबर 2023 में यूपीएससी द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार डीजीपी पद के दावेदार अधिकारी के पास पद रिक्त होने की तिथि से कम से कम छह महीने की शेष सेवा होना आवश्यक है। चूंकि शमशेर सिंह की सेवानिवृत्ति में केवल तीन महीने शेष थे, इसलिए वे इस पद के लिए पात्र नहीं रहे।
बाद में उन्हें 5 मार्च 2026 को सिविल डिफेंस निदेशक एवं होमगार्ड के कमांडेंट जनरल के पद पर नियुक्त किया गया और 31 मार्च 2026 को वे सेवानिवृत्त हो गए।
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