सरकार ने अप्रत्याशित रूप से आईएमएफ के ईडी (भारत) केवी सुब्रमण्यन की सेवाएं कार्यकाल से 6 महीने पहले ही समाप्त कर दीं
एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में कार्यकारी निदेशक (भारत) केवी सुब्रमण्यम की सेवाएं उनके कार्यकाल से छह महीने पहले ही समाप्त कर दी हैं
नयी दिल्ली। एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में कार्यकारी निदेशक (भारत) केवी सुब्रमण्यम की सेवाएं उनके कार्यकाल से छह महीने पहले ही समाप्त कर दी हैं। कैबिनेट की नियुक्ति समिति (Appointments Committee of the Cabinet) ने उनके कार्यकाल को 30 अप्रैल 2025 से प्रभावी रूप से समाप्त करने का निर्णय लिया है।
सरकार की ओर से इस अचानक लिए गए फैसले को लेकर कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है। जल्द ही भारत की ओर से IMF बोर्ड में प्रतिनिधित्व करने के लिए एक नए व्यक्ति की नियुक्ति की जाएगी।
केवी सुब्रमण्यम ने 1 नवंबर 2022 को IMF में भारत के कार्यकारी निदेशक के रूप में अपना तीन वर्षीय कार्यकाल शुरू किया था। इससे पहले वे भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (Chief Economic Adviser) रह चुके हैं।
IMF के कार्यकारी बोर्ड में कुल 25 निदेशक (Executive Directors या EDs) होते हैं, जिन्हें सदस्य देश या देश समूहों द्वारा नामित किया जाता है। भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान के साथ एक साझा समूह (constituency) का हिस्सा है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, सुब्रमण्यम ने IMF के डेटा संग्रहण के तरीकों पर संदेह व्यक्त किया था, जिससे संगठन के भीतर असहजता और तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।
IMF में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने भारत की विकास दर से जुड़ी IMF की आकलन प्रक्रिया की आलोचना की थी। अप्रैल 2024 में एक पोस्ट में उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा था कि –
"IMF स्टाफ की त्रुटि की सीमाएं बहुत बड़ी हैं" (IMF staff’s error margins are HUGE)।
यह घटनाक्रम उस समय आया है जब IMF बोर्ड पाकिस्तान को ऋण देने की व्यवस्था और एक प्रस्तावित "क्लाइमेट रेज़िलिएंस क्रेडिट फैसिलिटी" (climate resilience credit facility) का आकलन कर रहा है। नई दिल्ली, हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले — जिसमें 26 लोगों की मौत हुई — के मद्देनज़र पाकिस्तान को ऋण देने का विरोध कर सकती है।
गौरतलब है कि पाकिस्तान पिछले कुछ वर्षों से गंभीर आर्थिक संकटों का सामना कर रहा है और IMF की सहायता पर अत्यधिक निर्भर है। पिछले साल उसे IMF से 7 अरब डॉलर का राहत पैकेज मिला था, जिसके बाद मार्च में 1.3 अरब डॉलर की जलवायु अनुकूलता सहायता (climate resilience facility) भी प्राप्त हुई।
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