हाईकोर्ट का आदेश: ओशिवारा में ‘अवैध’ मस्जिद के सर्वे के निर्देश बीएमसी को
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) को आदेश दिया कि वह ओशिवारा स्थित एक खेल मैदान का सर्वेक्षण करे और यह निर्धारित करे कि वहां मस्जिद और मदरसे का निर्माण अवैध रूप से हुआ है या नहीं..
मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) को आदेश दिया कि वह ओशिवारा स्थित एक खेल मैदान का सर्वेक्षण करे और यह निर्धारित करे कि वहां मस्जिद और मदरसे का निर्माण अवैध रूप से हुआ है या नहीं। मुख्य न्यायाधीश आलोक अराधे और न्यायमूर्ति मकरंद कर्णिक की खंडपीठ ने यह निर्देश अंधेरी-वर्सोवा रेजिडेंट्स एसोसिएशन की संयोजक कुनिका सदानंद द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
याचिका के अनुसार, यह खेल मैदान के-वेस्ट वार्ड में प्रतीक्षा नगर म्युनिसिपल स्कूल के पीछे स्थित है और इसका क्षेत्रफल 10,261 वर्ग मीटर है। यह भूमि पहले महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) के स्वामित्व में थी, जिसे 1989 में बीएमसी को स्थानांतरित कर दिया गया था। बाद में बीएमसी ने इस भूखंड का एक छोटा हिस्सा सौंदर्यीकरण के लिए एक ट्रस्ट को आवंटित किया।
याचिका में दावा किया गया कि 2009 में मर्कज़ुल मा’आरिफ एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर नामक एक धार्मिक ट्रस्ट ने इस खेल मैदान के 3,260 वर्ग मीटर हिस्से पर अवैध रूप से मस्जिद और मदरसे का निर्माण कर लिया। स्थानीय निवासियों ने इस अवैध निर्माण को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली। इस दौरान स्कूल से लगी दीवार तोड़कर मस्जिद के लिए एक मार्ग बना दिया गया, जिससे मानसून के दौरान आपात तैयारी कार्यों को अंजाम देना कठिन हो गया। याचिका में यह भी कहा गया कि 2016 में हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद अवैध निर्माण जारी रहा।
याचिकाकर्ता के अनुसार, मर्कज़ुल ट्रस्ट न तो वक्फ बोर्ड का सदस्य था और न ही उसे सौंदर्यीकरण के लिए दी गई भूमि से कोई संबंध था। ट्रस्ट द्वारा किया गया अतिक्रमण और अवैध निर्माण उस स्कूल के विस्तार में बाधा बन रहा है जिसे याचिकाकर्ता ने गोद लिया है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए हाईकोर्ट ने के-वेस्ट वार्ड के सहायक आयुक्त को निर्देश दिया कि वे इस भूखंड का सर्वेक्षण करें और सभी पक्षों की सुनवाई के बाद वहां मौजूद संरचनाओं की वैधता पर निर्णय लें। कोर्ट ने यह प्रक्रिया 10 सप्ताह के भीतर पूरी करने को कहा है।
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