शुक्र ग्रह मिशन: भारतीय वैज्ञानिकों से प्रस्ताव आमंत्रित
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO), जो भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान का अग्रणी संस्थान है, ने भारतीय वैज्ञानिकों को आमंत्रण (Announcement of Opportunity - AO) जारी किया है। इसमें वैज्ञानिकों से कहा गया है कि वे अब तक हुए अंतरराष्ट्रीय शुक्र ग्रह मिशनों से उपलब्ध अभिलेखीय (archival) डाटा का उपयोग करते हुए अध्ययन और..
बेंगलुरु। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO), जो भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान का अग्रणी संस्थान है, ने भारतीय वैज्ञानिकों को आमंत्रण (Announcement of Opportunity - AO) जारी किया है। इसमें वैज्ञानिकों से कहा गया है कि वे अब तक हुए अंतरराष्ट्रीय शुक्र ग्रह मिशनों से उपलब्ध अभिलेखीय (archival) डाटा का उपयोग करते हुए अध्ययन और विश्लेषण करें।
पिछले वर्ष भारत सरकार की कैबिनेट ने शुक्र ग्रह ऑर्बिटर मिशन (Venus Orbiter Mission - VOM) को मंजूरी दी थी। यह कदम सरकार की चंद्रमा और मंगल से आगे शुक्र ग्रह की खोज और अध्ययन की महत्वाकांक्षी दृष्टि का हिस्सा है।
ISRO ने AO के तहत कहा, “Venus Orbiter Mission के लिए वैज्ञानिक समुदाय को बढ़ावा देने, मजबूत करने और उसका दायरा विस्तारित करने के उद्देश्य से ISRO शोधकर्ताओं को आमंत्रित करता है कि वे शुक्र ग्रह से जुड़े उपलब्ध अभिलेखीय डाटा का विश्लेषण और मॉडलिंग करें।”
प्रमुख शोध क्षेत्र
- शुक्र ग्रह की संरचना, स्थलाकृति और उपसतही अध्ययन
- भू-वैज्ञानिक मानचित्रण, खनिज विज्ञान और सतह की संरचना
- शुक्र ग्रह का वायुमंडलीय ढांचा, गतिशीलता और संरचना
- शुक्र का आयनमंडल और सौर पवन से उसका पारस्परिक प्रभाव
- शुक्र ग्रह के वायुमंडल और आयनमंडल का मॉडलिंग
प्रस्ताव आमंत्रण की शर्तें
- प्रस्ताव व्यक्तिगत वैज्ञानिक या वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के समूह द्वारा दिए जा सकते हैं।
- राष्ट्रीय संस्थानों, विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, तारामंडलों और भारत सरकार से संबद्ध संगठनों के लिए अवसर उपलब्ध है।
- परियोजना प्रमुख (Principal Investigator - PI) के रूप में केवल वही वैज्ञानिक नेतृत्व कर सकते हैं, जिनकी सेवा-निवृत्ति (superannuation) से पहले कम से कम 4 वर्ष शेष हों।
- प्रस्ताव संस्थान प्रमुख के माध्यम से भेजे जाने होंगे, साथ ही यह आश्वासन भी आवश्यक होगा कि परियोजना संचालन हेतु आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी।
- इस AO कार्यक्रम के तहत चयनित परियोजनाओं को 3 वर्ष की अवधि में पूरा करना अपेक्षित है।
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