ओडिशा के आसमान में रहस्यमयी रॉकेट लॉन्च: क्या यह भारत की नई हाइपरसोनिक मिसाइल थी?

आकाश में एक धूमकेतु जैसी तेज रोशनी और लंबी घुमावदार नारंगी-सफेद लकीर दिखाई दी, जिसे केवल ओडिशा ही नहीं बल्कि सैकड़ों किलोमीटर दूर बांग्लादेश के कॉक्स बाजार तक देखा..

ओडिशा के आसमान में रहस्यमयी रॉकेट लॉन्च: क्या यह भारत की नई हाइपरसोनिक मिसाइल थी?
10-05-2026 - 11:50 AM

8 मई की शाम ओडिशा के आसमान में अचानक एक चमकदार वस्तु दिखाई दी, जिसे देखकर लोग हैरान रह गए।
आकाश में एक धूमकेतु जैसी तेज रोशनी और लंबी घुमावदार नारंगी-सफेद लकीर दिखाई दी, जिसे केवल ओडिशा ही नहीं बल्कि सैकड़ों किलोमीटर दूर बांग्लादेश के कॉक्स बाजार तक देखा गया।

कुछ ही मिनटों में सोशल मीडिया पर वीडियो की बाढ़ आ गई और हर किसी के मन में एक ही सवाल था — आखिर यह क्या था?

ओडिशा के ऊपर आखिर लॉन्च क्या हुआ?

भारत ने 8 मई की शाम करीब 6:30 से 7:30 बजे के बीच ओडिशा तट के पास स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप (चांदीपुर इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज) से एक मिसाइल का परीक्षण किया।

आसमान में दिखी अद्भुत रोशनी कोई संयोग नहीं थी। जब किसी मिसाइल को सांझ के समय लॉन्च किया जाता है, तो ऊंचाई पर निकलने वाली गैसों की लकीर (एग्जॉस्ट प्लूम) सूर्य की अंतिम किरणों को पकड़ लेती है और अंधेरे होते आसमान में बेहद चमकदार दिखाई देती है।

ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के हजारों लोगों ने यही दृश्य देखा और अपने कैमरों में कैद किया।

क्या यह वही मिसाइल थी जिसका परीक्षण भारत ने पिछले सप्ताह किया था?

नहीं। भारत ने 1 मई को पहले ही एक अलग मिसाइल परीक्षण की पुष्टि की थी, जब उसने लंबी दूरी की एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया था। यह मिसाइल समुद्र में मौजूद नौसैनिक लक्ष्यों को लगभग 1,500 किलोमीटर दूर तक निशाना बनाने में सक्षम बताई गई थी।

उस परीक्षण के लिए बंगाल की खाड़ी में लगभग 1,680 किलोमीटर का प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया था।

लेकिन 8 मई का परीक्षण पूरी तरह अलग माना जा रहा है और उसका दायरा भी कहीं ज्यादा बड़ा था।

8 मई के परीक्षण को लेकर क्या खास था?

लॉन्च से पहले भारतीय अधिकारियों ने एक NOTAM (नोटिस टू एयरमेन) जारी किया था। यह एक आधिकारिक चेतावनी होती है, जिसमें पायलटों को किसी संवेदनशील सैन्य गतिविधि के दौरान एक विशेष हवाई क्षेत्र से दूर रहने को कहा जाता है।

8 मई के परीक्षण के लिए जो हवाई गलियारा घोषित किया गया था, वह बंगाल की खाड़ी के ऊपर लगभग 3,560 किलोमीटर तक फैला हुआ था।

यह 1 मई के परीक्षण क्षेत्र से दोगुने से भी अधिक बड़ा था। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतने विशाल दायरे वाले कॉरिडोर आमतौर पर बहुत लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों से जुड़े होते हैं।

क्या भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर बताया है कि कौन-सी मिसाइल का परीक्षण हुआ?

नहीं।
अब तक Defence Research and Development Organisation (DRDO) और भारत के रक्षा मंत्रालय ने 8 मई के परीक्षण में इस्तेमाल की गई मिसाइल की पहचान को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

भारत सामान्य रक्षा परीक्षणों की जानकारी अक्सर सार्वजनिक करता है, लेकिन संवेदनशील रणनीतिक परीक्षणों को लेकर कई बार चुप्पी बनाए रखता है।

हालांकि कुछ बातें पूरी तरह स्पष्ट हैं:

  • 8 मई को चांदीपुर से वास्तविक मिसाइल लॉन्च हुआ था।
  • NOTAM कॉरिडोर असाधारण रूप से बड़ा — लगभग 3,560 किलोमीटर — था।
  • सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो असली हैं।

यानी ओडिशा के आसमान में लोगों ने जो देखा, वह कोई भ्रम नहीं था।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।