भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ किसान संगठनों और विपक्ष का देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

भारत के किसान संगठनों और विपक्षी दलों ने नए भारत-अमेरिका व्यापार ढांचे के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। उनका कहना है कि यह समझौता अधिक अमेरिकी आयात की अनुमति देकर भारतीय कृषि क्षेत्र को नुकसान पहुंचा सकता है, हालांकि सरकार का दावा है कि प्रमुख खाद्यान्न फसलों को इससे बाहर..

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ किसान संगठनों और विपक्ष का देशव्यापी आंदोलन का आह्वान
10-02-2026 - 01:14 PM
22-04-2026 - 05:53 PM

भारत के किसान संगठनों और विपक्षी दलों ने नए भारत-अमेरिका व्यापार ढांचे के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। उनका कहना है कि यह समझौता अधिक अमेरिकी आयात की अनुमति देकर भारतीय कृषि क्षेत्र को नुकसान पहुंचा सकता है, हालांकि सरकार का दावा है कि प्रमुख खाद्यान्न फसलों को इससे बाहर रखा गया है।

यह समझौता अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है और इसने 2020-21 के कृषि कानून आंदोलन की यादें ताजा कर दी हैं, जब सरकार को कृषि बाजारों के उदारीकरण से जुड़े तीन कानूनों को वापस लेना पड़ा था।

सरकार ने इस समझौते का बचाव करते हुए कहा है कि किसानों के हितों की रक्षा की गई है। इसके तहत चावल, गेहूं, मक्का और डेयरी उत्पादों जैसे अनाजों के आयात को बाहर रखा गया है। वहीं, बासमती चावल, फल, मसाले, कॉफी और चाय के उत्पादकों को अमेरिकी बाजार में ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलने की बात कही गई है।

हालांकि किसान संगठनों का कहना है कि यह समझौता भारतीय किसानों को नुकसान की स्थिति में डाल देता है।

समझौते के विवरण की कमी को लेकर किसानों की नाराजगी

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा, “हम भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि इससे भारतीय किसानों को नुकसान होगा, जो अपने अमेरिकी समकक्षों की तुलना में कहीं अधिक असुरक्षित हैं।”

उन्होंने कहा कि अमेरिकी किसानों के पास बड़ी जोतें हैं और उन्हें ज्यादा सब्सिडी मिलती है, जबकि भारतीय किसानों को कमजोर प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बढ़ती खेती लागत के कारण फसल नुकसान का भी सामना करना पड़ता है।

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM), जो 100 से अधिक किसान संगठनों का गठबंधन है, ने 12 फरवरी को विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। SKM का कहना है कि यह समझौता सब्सिडी वाले अमेरिकी कृषि उत्पादों के आयात का रास्ता खोलेगा, जिससे घरेलू कीमतें गिर सकती हैं और ग्रामीण आय को नुकसान पहुंचेगा।

SKM ने एक बयान में कहा कि अंतरिम भारत-अमेरिका व्यापार ढांचा अमेरिकी कृषि बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सामने पूरी तरह आत्मसमर्पण के समान है और सरकार से इस समझौते पर हस्ताक्षर न करने की अपील की।

SKM के राष्ट्रीय सचिव पुरुषोत्तम शर्मा ने कहा,
हम सरकार को भारतीय कृषि क्षेत्र को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलने की इजाजत नहीं देंगे।”
उन्होंने यह भी कहा कि कच्चे सोयाबीन तेल (क्रूड सोयऑयल) पर मौजूदा लगभग 16.5% शुल्क में कमी घरेलू तिलहन उत्पादकों को नुकसान पहुंचाएगी।

सेब उत्पादकों की चिंता

सेब उत्पादकों ने भी इस समझौते को लेकर चिंता जताई है। कश्मीर वैली फ्रूट ग्रोअर्स-कम-डीलर्स यूनियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिए गए ज्ञापन में कहा कि प्रमुख सेब उत्पादक राज्यों में 7 लाख से अधिक परिवार बागवानी पर निर्भर हैं। यूनियन ने अमेरिकी सेबों पर 100% से अधिक आयात शुल्क लगाने की मांग की है।

विपक्ष का तीखा हमला

विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने इस समझौते को राष्ट्रीय हितों और किसानों के हितों के साथ पूरी तरह समझौता” बताया है। पार्टी ने सरकार से सवाल किया है कि समझौते में शामिल उत्पादों और टैरिफ लाइनों का विस्तृत ब्योरा अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। किसान नेताओं ने भी सरकार से समझौते का पूरा विवरण साझा करने की मांग की है।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, “इस समझौते के जरिए भारत को एक डंपिंग ग्राउंड बनाया जा सकता है।” उन्होंने अमेरिकी कृषि मंत्री ब्रुक रोलिंस के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि यह समझौता भारत में अमेरिकी कृषि निर्यात को बढ़ाएगा, कीमतों में इजाफा करेगा और ग्रामीण अमेरिका में नकदी प्रवाह बढ़ाएगा।

इस तरह, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अब देश में एक बड़े राजनीतिक और किसान आंदोलन का कारण बनता दिख रहा है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।