भारतीय वैज्ञानिकों की नयी तकनीक, बिजली की लीकेज को 10,000 गुना तक कम करने में सक्षम
भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के शोधकर्ताओं ने अगली पीढ़ी की पावर इलेक्ट्रॉनिक्स तकनीक को अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और उपयोग में आसान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की..
भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के शोधकर्ताओं ने अगली पीढ़ी की पावर इलेक्ट्रॉनिक्स तकनीक को अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और उपयोग में आसान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है।
उनकी इस नयी खोज से गैलियम नाइट्राइड (GaN) आधारित पावर ट्रांजिस्टर को तेजी से अपनाने में मदद मिल सकती है। यह तकनीक इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों और बड़े डेटा सेंटर्स के लिए बेहद अहम मानी जाती है।
GaN तकनीक क्यों है खास?
GaN आधारित इलेक्ट्रॉनिक्स की खासियत यह है कि वे..
- ऊर्जा हानि को कम करते हैं,
- पावर कन्वर्टर और उससे जुड़े हार्डवेयर का आकार मौजूदा डिज़ाइन की तुलना में लगभग एक-तिहाई तक घटा सकते हैं।
इन तमाम फायदों के बावजूद, अब तक इस तकनीक को व्यापक रूप से अपनाया नहीं जा सका है। इसकी सबसे बड़ी वजह है ट्रांजिस्टर के “गेट” (Gate) को नियंत्रित करने में आने वाली दिक्कत, जो बिजली के प्रवाह को चालू और बंद करता है।
समस्या क्या थी?
कई व्यावसायिक रूप से उपलब्ध GaN ट्रांजिस्टर—
- बहुत कम वोल्टेज पर ही ऑन हो जाते हैं,
- और थोड़े से अधिक वोल्टेज पर करंट लीक करना शुरू कर देते हैं।
इससे ऐसे उपकरणों को वाहनों की पावर प्रणालियों या बड़े कंप्यूटिंग केंद्रों जैसी मांग वाली परिस्थितियों में सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से चलाना मुश्किल हो जाता है।
IISc का दो-चरणीय शोध
इस समस्या के समाधान के लिए IISc के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स इंजीनियरिंग विभाग के शोधकर्ताओं ने दो चरणों में अध्ययन किया।
पहला चरण: व्यवहार को समझना
पहले चरण में टीम ने गेट के अलग-अलग डिज़ाइन तैयार किए और यह बारीकी से अध्ययन किया कि ट्रांजिस्टर के भीतर बिजली कैसे प्रवाहित होती है।
उन्होंने पाया कि ट्रांजिस्टर का व्यवहार इस बात पर काफी हद तक निर्भर करता है कि डिवाइस के अंदर मौजूद एक पतली परत विद्युत आवेश को कैसे संजोती या खोती है।
शोध में यह भी सामने आया कि बहुत छोटे करंट लीकेज रास्ते भी यह तय कर सकते हैं कि ट्रांजिस्टर कब ऑन होगा।
10,000 गुना कम लीकेज वाली नई तकनीक
इस समझ के बाद वैज्ञानिकों ने धातु-आधारित परतों (Metal-based layers) का उपयोग करते हुए एक नया गेट डिज़ाइन विकसित किया।
इस नए डिज़ाइन की मदद से..
- करंट लीकेज को 10,000 गुना तक कम किया जा सका,
- और ट्रांजिस्टर को ऊंचे वोल्टेज पर भी अधिक सुरक्षित तरीके से चलाना संभव हुआ।
दूसरा चरण: और ज्यादा स्थिर गेट संरचना
शोध के दूसरे चरण में टीम ने एल्युमिनियम–टाइटेनियम ऑक्साइड (Aluminium–Titanium Oxide) सामग्री से बनी एक नई गेट संरचना तैयार की।
यह डिज़ाइन—
- अनचाहे इलेक्ट्रिक चार्ज के जमाव को रोकती है,
- और ट्रांजिस्टर को अधिक ऊंचे और स्थिर वोल्टेज पर ऑन होने में मदद करती है।
इसका व्यवहार अब सिलिकॉन-आधारित पारंपरिक डिवाइसेज़ जैसा हो गया है, जो उद्योग में पहले से व्यापक रूप से इस्तेमाल होते हैं।
कहां होगा सबसे ज्यादा फायदा?
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सुधार GaN तकनीक को इन क्षेत्रों में ज्यादा व्यावहारिक बना सकता है..
- इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग सिस्टम,
- नवीकरणीय ऊर्जा इन्वर्टर,
- डेटा सेंटर की पावर सप्लाई।
आगे की योजना
IISc की टीम अब इस तकनीक को व्यावसायिक स्तर पर लागू करने के लिए—
- उद्योग जगत के साथ साझेदारी,
- और सरकारी सहयोग
की संभावनाएं तलाश रही है।
इसका उद्देश्य उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में भारत की भूमिका को और मजबूत क
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