‘पूर्व कांग्रेसी सदस्य’ जगदंबिका पाल पर नरमी बरतने की राहुल की बात; पीठासीन लोकसभा अध्यक्ष का त्वरित पलटवार
बुधवार को लोकसभा में उस समय कुछ हल्के-फुल्के और व्यंग्यात्मक क्षण देखने को मिले, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी और लोकसभा की अध्यक्षता कर रहे जगदंबिका पाल के बीच संवाद हुआ। यह वाकया तब सामने आया जब राहुल गांधी ने विवादास्पद जेफ्री एप्सटीन फाइल्स का मुद्दा..
बुधवार को लोकसभा में उस समय कुछ हल्के-फुल्के और व्यंग्यात्मक क्षण देखने को मिले, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी और लोकसभा की अध्यक्षता कर रहे जगदंबिका पाल के बीच संवाद हुआ। यह वाकया तब सामने आया जब राहुल गांधी ने विवादास्पद जेफ्री एप्सटीन फाइल्स का मुद्दा उठाया।
राहुल गांधी ने हाल ही में जारी जांच दस्तावेजों में दोषी यौन अपराधी जेफ्री एप्सटीन से जुड़े मामलों का हवाला देते हुए, उनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य मंत्रियों के संदर्भ का उल्लेख करने वाली रिपोर्टों पर सरकार से सवाल करने की कोशिश की। इस पर अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने उन्हें बजट से संबंधित विषयों तक ही अपनी बात सीमित रखने की याद दिलाई।
इसके जवाब में राहुल गांधी ने कहा कि वह जगदंबिका पाल पर इसलिए सख्ती नहीं करेंगे क्योंकि वह कांग्रेस के पूर्व सदस्य रह चुके हैं। इस पर जगदंबिका पाल ने तुरंत पलटवार करते हुए चुटकी ली, “अगर आपने मेरी बात मानी होती, तो आप आज सदन के उस तरफ नहीं बैठे होते… मैं यहां एक पीठासीन अधिकारी के रूप में बैठा हूं।”
इसके बाद राहुल गांधी ने कहा, “लेकिन हमें आप पसंद हैं, सर, और हम जानते हैं कि आपका दिल वहां नहीं है। हम जानते हैं कि आपका दिल यहां है।”
जगदंबिका पाल का राजनीतिक सफर
उत्तर प्रदेश के ‘एक दिन के मुख्यमंत्री’ के रूप में चर्चित जगदंबिका पाल ने 2014 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जॉइन की थी। इसके बाद से वह उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले की डुमरियागंज लोकसभा सीट से लगातार तीन बार चुनाव जीत चुके हैं।
- वर्ष 2009 में वह पहली बार कांग्रेस के टिकट पर डुमरियागंज से लोकसभा सांसद चुने गए थे।
- अपने राजनीतिक करियर में वह तीन कार्यकाल तक विधायक रहे हैं और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।
- अपने शुरुआती राजनीतिक जीवन में वह उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे।
जगदंबिका पाल 1998 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी बने थे, हालांकि उनका यह कार्यकाल बेहद अल्पकालिक रहा। उस समय वह लोकतांत्रिक कांग्रेस पार्टी (LCP) के नेता थे। 21 फरवरी 1998 की रात, कल्याण सिंह सरकार को बर्खास्त किए जाने के बाद राज्यपाल रोमेश भंडारी ने उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई थी। उनका यह कार्यकाल मात्र 31 घंटे चला।
भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते पर राहुल का हमला
भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने राष्ट्रीय हितों से समझौता किया है और सवाल किया कि क्या सरकार को “भारत को बेचने में शर्म नहीं आती”। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने मानो ‘भारत माता को बेच दिया’ हो।
राहुल गांधी ने कहा कि सरकार खुद मानती है कि दुनिया इस समय एक वैश्विक तूफान का सामना कर रही है..
- एकध्रुवीय विश्व व्यवस्था का अंत हो रहा है,
- भू-राजनीतिक संघर्ष तेज हो रहे हैं,
- ऊर्जा और वित्त को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
इसके बावजूद, उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अमेरिका को ऊर्जा और वित्तीय प्रणालियों को हथियार बनाने की छूट दे दी, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ रहा है।
राहुल गांधी ने कहा, “आप खुद स्वीकार करते हैं कि हम एक वैश्विक तूफान का सामना कर रहे हैं—कि एक सुपरपावर का दौर खत्म हो रहा है, भू-राजनीतिक टकराव बढ़ रहे हैं और ऊर्जा व वित्त को हथियार बनाया जा रहा है। इसके बावजूद, इस सच्चाई को मानने के बाद भी आपने अमेरिका को ऊर्जा और वित्तीय व्यवस्था को हमारे खिलाफ इस्तेमाल करने दिया। जब अमेरिका कहता है कि हम किसी खास देश से तेल नहीं खरीद सकते, तो इसका मतलब यह है कि हमारी ऊर्जा सुरक्षा बाहर से तय की जा रही है यानी ऊर्जा को ही हमारे खिलाफ हथियार बनाया जा रहा है। क्या आपको इस पर शर्म नहीं आती? मैं कह रहा हूं कि आपने भारत के हितों से समझौता किया है। क्या आपको अपने किए पर जरा भी शर्म नहीं है? ऐसा लगता है जैसे आपने ‘भारत माता’ को बेच दिया हो।”
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