अब विदेशी नियंत्रण से बाहर होंगे भारत के पेट्रोलियम उत्पाद, सरकार खरीदेगी 112 टैंकर; 10 अरब डॉलर का निवेश
भारत अब अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर पहले से कहीं अधिक गंभीर होता दिख रहा है। अभी तक भारत कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए विदेशी टैंकरों पर निर्भर था, लेकिन अब इस स्थिति को पूरी तरह बदलने की तैयारी हो चुकी है
नयी दिल्ली। भारत अब अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर पहले से कहीं अधिक गंभीर होता दिख रहा है। अभी तक भारत कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए विदेशी टैंकरों पर निर्भर था, लेकिन अब इस स्थिति को पूरी तरह बदलने की तैयारी हो चुकी है। सरकार चाहती है कि भारत की खुद की एक तेल टैंकर फ्लीट हो, जो पूरी तरह स्वदेशी निर्माण पर आधारित और भारतीय नियंत्रण में हो।
अब तक क्यों था विदेशी टैंकरों पर निर्भरता?
अब तक भारत की सरकारी तेल कंपनियाँ अधिकतर विदेशी कंपनियों से किराये पर लिए गए टैंकरों का इस्तेमाल करती रही हैं। इनमें से कई टैंकर पुराने और महंगे हैं। इससे लॉजिस्टिक्स महंगी होती है और भारत की रणनीतिक पकड़ भी कमजोर रहती है।
112 नए टैंकर खरीदने की योजना
सरकार अब एक बड़े कदम की ओर बढ़ रही है। भारत कुल 112 नए क्रूड ऑयल टैंकर खरीदेगा। यह योजना करीब ₹85,000 करोड़ (लगभग $10 अरब) की है और इसे 2040 तक पूरा किया जाएगा।
पहले चरण में 79 जहाज खरीदे जाएंगे, जिनमें से 30 मीडियम रेंज कैरियर्स होंगे।
पहला ऑर्डर इसी महीने संभव
सरकारी सूत्रों के अनुसार, योजना के पहले चरण के तहत पहला ऑर्डर इसी महीने के अंत तक जारी किया जा सकता है। इस ऑर्डर में 10 टैंकरों की खरीद शामिल होगी।
'मेक इन इंडिया' को मिलेगा बड़ा बल
इस योजना की खास बात यह है कि इन सभी टैंकरों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। अगर किसी विदेशी कंपनी के साथ साझेदारी होती भी है, तो शर्त होगी कि निर्माण भारत में ही हो।
इससे देश के शिपबिल्डिंग उद्योग को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा और स्थानीय रोज़गार के अवसर भी बढ़ेंगे।
क्यों जरूरी है टैंकर खरीदना?
हालाँकि दुनिया अब हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) की ओर बढ़ रही है, लेकिन भारत की ऊर्जा ज़रूरतें तेजी से बढ़ रही हैं। घरेलू इस्तेमाल और निर्यात — दोनों ही दृष्टिकोण से पेट्रोलियम उत्पादों की माँग बढ़ती जा रही है।
इसी कारण भारत सरकार ने 2025 तक रिफाइनिंग क्षमता को 250 मिलियन टन से बढ़ाकर 450 मिलियन टन करने का लक्ष्य रखा है।
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