आर्थिक सर्वेक्षण 2026 की प्रमुख झलकियां: विकास स्थिर, महंगाई नियंत्रण में, बाहरी जोखिम बरकरार

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को लोकसभा में आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 पेश किया। यह सर्वे संसद के बजट सत्र की शुरुआत के एक दिन बाद सदन में रखा गया। आर्थिक मामलों के विभाग के आर्थिक प्रभाग द्वारा, मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन की देखरेख में तैयार किया..

आर्थिक सर्वेक्षण 2026 की प्रमुख झलकियां: विकास स्थिर, महंगाई नियंत्रण में, बाहरी जोखिम बरकरार
30-01-2026 - 10:53 AM
22-04-2026 - 05:53 PM

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को लोकसभा में आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 पेश किया। यह सर्वे संसद के बजट सत्र की शुरुआत के एक दिन बाद सदन में रखा गया। आर्थिक मामलों के विभाग के आर्थिक प्रभाग द्वारा, मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन की देखरेख में तैयार किया गया यह सर्वे देश की अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति का आधिकारिक आकलन प्रस्तुत करता है और आने वाले वित्त वर्ष के लिए परिदृश्य को रेखांकित करता है।

पिछले वर्षों की तरह इस बार भी सर्वे में आर्थिक विकास के प्रमुख कारकों, राजकोषीय और बाहरी क्षेत्र की स्थिरता, महंगाई के रुझान, रोजगार की स्थिति और संरचनात्मक सुधारों की गति पर विशेष ध्यान दिया गया है।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 के प्रमुख निष्कर्ष

भारत की आर्थिक वृद्धि की गति मजबूत बनी हुई है। वर्ष 2026–27 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.8 से 7.2 प्रतिशत के दायरे में रहने का अनुमान है, जो चालू वित्त वर्ष के अनुमानित 7.4 प्रतिशत से थोड़ा कम है।

महंगाई नियंत्रण में है और स्थिर बनी हुई है। कोर महंगाई के कम स्तर पर रहने से आपूर्ति पक्ष की स्थितियों में सुधार के संकेत मिलते हैं।

सर्वेक्षण ने एक विरोधाभास की ओर इशारा किया है—घरेलू आर्थिक बुनियाद मजबूत है, लेकिन पूंजी प्रवाह और मुद्रा पर दबाव के कारण बाहरी क्षेत्र में संवेदनशीलता बनी हुई है।

राजकोषीय अनुशासन की प्रक्रिया जारी है। वित्त वर्ष 2025 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.8 प्रतिशत रहा, जो बजट अनुमान से बेहतर है। वित्त वर्ष 2026 के लिए घाटे का लक्ष्य 4.4 प्रतिशत रखा गया है।

राज्यों के स्तर पर बढ़ते राजकोषीय लोकलुभावनवाद, बढ़ते राजस्व घाटे और बिना शर्त नकद हस्तांतरण पर चिंता जताई गई है, जिससे पूंजीगत व्यय प्रभावित हो रहा है।

राज्यों की कमजोर वित्तीय स्थिति अब संप्रभु उधारी लागत को भी प्रभावित कर रही है, क्योंकि निवेशक केवल केंद्र नहीं बल्कि समग्र सरकारी वित्तीय स्थिति का आकलन करते हैं।

विदेशी पूंजी प्रवाह में कमी के कारण रुपया दबाव में रहा और वर्ष 2025 में भारतीय मुद्रा का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा।

वैश्विक वस्तु निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 2005 में 1 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में लगभग 1.8 प्रतिशत हो गई है।

भारत का पूंजीगत व्यय वित्त वर्ष 2018 के 2.63 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 (बजट अनुमान) में 11.21 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। प्रभावी पूंजीगत व्यय 15.48 लाख करोड़ रुपये आंका गया है, जिससे बुनियादी ढांचा विकास का प्रमुख इंजन बनकर उभरा है।

नवाचार के क्षेत्र में भारत का प्रदर्शन लगातार मजबूत हुआ है। ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत की रैंक 2019 में 66वें स्थान से सुधरकर 2025 में 38वें स्थान पर पहुंच गई है।

केंद्र सरकार की कुल राजस्व आय भारत की जीडीपी का 9.2 प्रतिशत रही।

मार्च 2025 तक प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत 55.02 करोड़ बैंक खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें से 36.63 करोड़ ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हैं।

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 16 जनवरी 2026 तक बढ़कर 701.4 अरब डॉलर हो गया है, जो 11 महीनों के आयात और बाहरी देनदारियों के लगभग 94 प्रतिशत को कवर करने में सक्षम है।

कृषि वर्ष 2024–25

Tags:

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।