100 / 5,000 जयशंकर ने कहा कि भारत पाकिस्तान की 'कट्टरपंथी मानसिकता' को नहीं बदल सकता: 'यहां तक ​​कि इंदिरा गांधी भी ऐसा नहीं कर सकती थीं'

लोकसभा में शुक्रवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों की घटनाओं को उजागर किया।

100 / 5,000 जयशंकर ने कहा कि भारत पाकिस्तान की 'कट्टरपंथी मानसिकता' को नहीं बदल सकता: 'यहां तक ​​कि इंदिरा गांधी भी ऐसा नहीं कर सकती थीं'
30-03-2025 - 12:50 PM
22-04-2026 - 05:53 PM

नयी दिल्ली। लोकसभा में शुक्रवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों की घटनाओं को उजागर किया।

मंत्री ने कहा कि नई दिल्ली पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे व्यवहार पर "करीबी नजर" बनाए हुए है और अपनी स्थिति स्पष्ट रूप से प्रकट कर रही है, लेकिन भारत अपने पड़ोसी देश की "कट्टर और संकीर्ण मानसिकता" को बदल नहीं सकता।

प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए जयशंकर ने बताया कि फरवरी माह में पाकिस्तान में हिंदुओं पर हमले की 10 घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें से सात घटनाएं अपहरण और जबरन धर्मांतरण से जुड़ी थीं, दो अन्य घटनाएं अपहरण से संबंधित थीं, और एक मामला होली मनाने वाले छात्रों के खिलाफ "पुलिस कार्रवाई" का था।

विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि भारत इन मामलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठाता है।

एक अन्य पूरक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा, "जैसे ही हम पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर नजर रखते हैं, वैसे ही बांग्लादेश में भी उनकी भलाई पर नजर बनाए रखते हैं। 2024 में अल्पसंख्यकों पर हमले की 2,400 घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि 2025 में अब तक 72 घटनाएं सामने आई हैं। मैंने इस विषय पर अपने समकक्ष से चर्चा की है, और जब विदेश सचिव बांग्लादेश गए थे, तब उन्होंने भी यह मामला उठाया था। यह हमारे लिए एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।"

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच अब तक चार समझौते हो चुके हैं, जिनमें 1950 का नेहरू-लियाकत समझौता भी शामिल है, जिसका उद्देश्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। उन्होंने जानना चाहा कि क्या इन समझौतों को दोबारा लागू करने की जरूरत है और क्या भारत इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में उठाएगा।

इसके जवाब में जयशंकर ने कहा, "हमने अल्पसंख्यकों की स्थिति के अनुरूप विभिन्न तरीकों से प्रतिक्रिया दी है। जिन समझौतों का माननीय सदस्य ने उल्लेख किया है, वे अब वास्तविकता में लागू नहीं होते क्योंकि पाकिस्तान ने अपनी अल्पसंख्यक आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं किया।"

उन्होंने आगे कहा, "हम इस विषय पर अपनी आवाज उठा रहे हैं और इन हमलों को उजागर कर रहे हैं। यदि कोई अल्पसंख्यक भारत आता है, तो हम उनके प्रति सहानुभूति रखते हैं। हमने उन्हें दीर्घकालिक वीज़ा दिया है। 2014 से अब तक, हमने पाकिस्तान से आए 50,019 अल्पसंख्यकों को वीज़ा प्रदान किया है।"

पाकिस्तान में सिख समुदाय के खिलाफ अत्याचार की तीन घटनाओं का भी जयशंकर ने जिक्र किया।

  • एक घटना में एक सिख परिवार पर हमला किया गया।
  • दूसरी घटना में एक सिख परिवार को एक पुराने गुरुद्वारे को फिर से खोलने के लिए धमकाया गया।
  • तीसरी घटना में एक सिख लड़की का अपहरण कर उसे जबरन धर्मांतरण के लिए मजबूर किया गया।

इसके अलावा,

  • दो घटनाएं अहमदिया समुदाय के सदस्यों से जुड़ी थीं।
  • एक अन्य मामले में एक ईसाई व्यक्ति, जो मानसिक रूप से अस्थिर था, को ईशनिंदा के आरोप में फंसा दिया गया।

जब एक सांसद ने पूछा कि क्या भारत पाकिस्तान के खिलाफ पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तरह कड़े कदम उठाने की योजना बना रहा है, तो जयशंकर ने कहा, "हम अपनी स्थिति स्पष्ट रूप से प्रकट कर रहे हैं, लेकिन सरकार और देश होने के नाते हम अपने पड़ोसी की कट्टर मानसिकता को बदल नहीं सकते। यहां तक कि इंदिरा गांधी भी इसे नहीं बदल सकीं।"

लोकसभा में लिखित उत्तर में विदेश मंत्री ने कहा कि भारत सरकार को पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों पर होने वाले अत्याचारों की लगातार रिपोर्टें मिल रही हैं।

जब उनसे पूछा गया कि क्या सरकार को पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ किए जा रहे "जघन्य अपराधों" की जानकारी है, तो उन्होंने कहा, "भारत सरकार को नियमित रूप से पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर होने वाले अत्याचारों की रिपोर्ट मिलती रहती है, जिनमें डराने-धमकाने, उत्पीड़न, हत्या, अपहरण, जबरन धर्मांतरण और जबरन विवाह जैसी घटनाएं शामिल हैं।"

इसके अलावा, जब पूछा गया कि क्या भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनके धार्मिक स्थलों की रक्षा के लिए कोई कदम उठाने जा रहा है, तो जयशंकर ने कहा कि भारत ने कई अवसरों पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (जेनेवा) में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति और उनके मानवाधिकारों के उल्लंघन को उजागर किया है।

उन्होंने कहा, "पाकिस्तान सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह अपने नागरिकों, विशेष रूप से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने संवैधानिक दायित्वों का पालन करे। अल्पसंख्यकों के खिलाफ होने वाले अत्याचारों की रिपोर्ट के आधार पर, भारत सरकार समय-समय पर पाकिस्तान सरकार के समक्ष यह मुद्दा उठाती रही है और उनसे अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, सम्मान और कल्याण के लिए कदम उठाने को कहती रही है।"

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।