कंगना रनौत ने एआर रहमान को बताया ‘सबसे ज़्यादा नफरत और पक्षपात से भरा इंसान’: ‘इमरजेंसी’ के लिए मुझसे मिलने तक से इनकार कर दिया, इसे प्रचार फिल्म कहा
संगीतकार एआर रहमान हाल ही में तब सुर्खियों में आए, जब उन्होंने स्वीकार किया कि विक्की कौशल अभिनीत फिल्म ‘छावा’
संगीतकार एआर रहमान हाल ही में तब सुर्खियों में आए, जब उन्होंने स्वीकार किया कि विक्की कौशल अभिनीत फिल्म ‘छावा’ एक ‘विभाजनकारी’ (डिवाइसिव) फिल्म है। उन्होंने यह भी बताया कि फिल्म की राजनीति से सहमत न होने के बावजूद उन्होंने इसके लिए संगीत देने का फैसला क्यों किया। बीबीसी को दिए उसी इंटरव्यू में रहमान ने यह सवाल भी उठाया कि क्या हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें ‘सांप्रदायिक कारणों’ से कम काम मिल रहा है।
अब अभिनेत्री कंगना रनौत ने अपनी फिल्म ‘इमरजेंसी’ के लिए संगीत देने से कथित तौर पर इनकार करने को लेकर एआर रहमान पर तीखा हमला बोला है। कंगना ने रहमान को ‘पक्षपाती और नफरत से भरा’ बताया और आरोप लगाया कि उन्होंने फिल्म के लिए सहयोग की बात करने पर उनसे मिलने तक से इनकार कर दिया।
‘रहमान से ज़्यादा पक्षपाती और नफरत से भरा आदमी नहीं देखा’: कंगना
इंस्टाग्राम पर कंगना ने लिखा, “प्रिय @arrahman जी, मैं फिल्म इंडस्ट्री में इसलिए बहुत ज़्यादा पक्षपात और भेदभाव का सामना करती हूं क्योंकि मैं केसरिया पार्टी का समर्थन करती हूं लेकिन फिर भी मुझे कहना पड़ेगा कि मैंने आपसे ज़्यादा पक्षपाती और नफरत से भरा आदमी नहीं देखा।”
उन्होंने आगे लिखा, “मैं बेहद चाहती थी कि मैं आपको अपनी निर्देशित फिल्म ‘इमरजेंसी’ की कहानी सुनाऊं। कहानी सुनाना तो दूर, आप मुझसे मिलने तक को तैयार नहीं हुए। मुझसे कहा गया कि आप किसी प्रचार फिल्म का हिस्सा नहीं बनना चाहते। विडंबना यह है कि ‘इमरजेंसी’ को सभी आलोचकों ने एक उत्कृष्ट कृति (मास्टरपीस) बताया। यहां तक कि विपक्षी दलों के नेताओं ने भी मुझे प्रशंसक पत्र भेजकर फिल्म के संतुलित और करुणामय दृष्टिकोण की सराहना की। लेकिन, आप अपनी नफरत में अंधे हैं। मुझे आप पर तरस आता है। #emergency”
एआर रहमान ने क्या कहा था?
बीबीसी एशियन नेटवर्क से बातचीत में एआर रहमान ने कहा कि ‘छावा’ एक विभाजनकारी फिल्म है। उन्होंने कहा, “यह एक विभाजनकारी फिल्म है। मुझे लगता है कि इसने विभाजन का सहारा लिया है लेकिन इसका मूल उद्देश्य बहादुरी दिखाना है। मैंने निर्देशक से पूछा था—‘उन्हें इस फिल्म के लिए मेरी ज़रूरत क्यों है?’ तो उन्होंने कहा कि हमें इस फिल्म के लिए सिर्फ आप ही चाहिए। यह एक मनोरंजक फिल्म है लेकिन लोग इससे ज़्यादा समझदार हैं। क्या आपको लगता है कि लोग फिल्मों से प्रभावित हो जाएंगे? लोगों के भीतर एक आंतरिक विवेक होता है, जो जानता है कि सच क्या है और हेरफेर क्या है।”
उन्होंने आगे कहा, “छावा सबसे ज़्यादा पूजनीय किरदार है। यह हर मराठा के खून में बसता है। फिल्म खत्म होने के बाद आप उस लड़की को सुंदर कविता कहते हुए देखते हैं..यह बहुत भावुक कर देने वाला है। मुझे गर्व है कि मैंने इस पूरी फिल्म के लिए संगीत दिया, जिसमें हर मराठा की धड़कन और आत्मा बसती है।”
रहमान ने यह भी बताया कि क्या उन्हें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में काम कम मिलने की वजह तमिल होने या महाराष्ट्र से न होने का पूर्वाग्रह है। उन्होंने कहा, “शायद मुझे कभी इसका पता ही नहीं चला, शायद इसे छिपा दिया गया लेकिन मैंने इसे सीधे तौर पर महसूस नहीं किया। हो सकता है कि पिछले आठ वर्षों में सत्ता में बदलाव आया हो और अब गैर-रचनात्मक लोगों के हाथ में ताकत हो। यह सांप्रदायिक बात भी हो सकती है… लेकिन यह मेरे सामने सीधे नहीं आती। यह मुझे ‘चीनी फुसफुसाहटों’ की तरह पता चलता है कि उन्होंने आपको बुक किया था लेकिन म्यूज़िक कंपनी ने आगे बढ़कर अपने पांच संगीतकारों को रख लिया। मैं कहता हूं—ठीक है, मेरे पास परिवार के साथ समय बिताने के लिए ज़्यादा वक्त है। मैं काम की तलाश में नहीं हूं। मैं चाहता हूं कि काम मेरे पास आए; मेरी ईमानदारी से मुझे काम मिले। मैं जिसके लायक हूं, वही मुझे मिलता है।”
मसाबा गुप्ता को लेकर भी कंगना का आरोप
कंगना ने अपने पोस्ट में फैशन डिज़ाइनर मसाबा गुप्ता को भी निशाने पर लिया और आरोप लगाया कि उन्होंने कंगना को अपनी साड़ी पहनने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। कंगना ने लिखा, “@arrahman जी, हर किसी की अपनी लड़ाइयां होती हैं। फिल्मों की बात छोड़िए—बड़े डिज़ाइनर, जो कभी मुझसे मुफ्त फंड अभियानों में अपने गहने और कपड़े लॉन्च करवाने की गुहार लगाते थे और खुद को मेरा सबसे अच्छा दोस्त बताते थे, बाद में मेरे स्टाइलिस्ट को कपड़े भेजने से इनकार करने लगे। उन्होंने मुझसे बात करना और मेरे बारे में पोस्ट करना बंद कर दिया। लेकिन, एक घटना मैं कभी नहीं भूल सकती—जब मैं राम जन्मभूमि के लिए @masabagupta की साड़ी पहन रही थी, तो उन्होंने स्टाइलिस्ट से कहा कि मैं उनकी साड़ी पहनकर राम जन्मभूमि नहीं जा सकती। मैं तब तक लखनऊ से अयोध्या के लिए निकल चुकी थी और बदलना संभव नहीं था। मुझे इतना अपमानित और छोटा महसूस हुआ कि मैं चुपचाप अपनी कार में रो पड़ी। बाद में, अन्य डिज़ाइनरों की तरह, उन्होंने स्टाइलिस्ट से कहा कि उनका या उनके ब्रांड का नाम न लिया जाए। आज @arrahman जी मगरमच्छ के आंसू बहा रहे हैं—उनकी अपनी नफरत और पक्षपात का क्या?”
कंगना ने 2016 में मसाबा गुप्ता की शादी में अपने परफॉर्मेंस की एक तस्वीर भी साझा की। उन्होंने लिखा, “मैंने अपनी बहन की शादी में भी कभी परफॉर्म नहीं किया लेकिन 2016 वही साल था जब मैंने मसाबा गुप्ता की शादी में परफॉर्म किया।”
इसके साथ ही उन्होंने युवा पीढ़ी को चेतावनी देते हुए लिखा, “वामपंथी अपनी नफरत और पक्षपात में अंधे होते हैं और युवा पीढ़ी को उनसे सावधान रहना चाहिए।”
‘भारत की सच्चाई’: महबूबा मुफ्ती
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने एआर रहमान की ‘सांप्रदायिक’ टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह “भारत की सच्चाई” है। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए महबूबा मुफ्ती ने लिखा, “बॉलीवुड हमेशा से एक जीवंत ‘मिनी इंडिया’ रहा है, जो देश की सामाजिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करता है। ऐसे अनुभवों को नज़रअंदाज़ कर देना आज के भारत की सच्चाई को नहीं बदलता।”
गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने भी पहले रहमान की बातों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि उन्हें ऐसा कभी महसूस नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “मैं मुंबई में लोगों से मिलता हूं। वे उनके लिए बहुत सम्मान रखते हैं।”
महबूबा मुफ्ती ने जावेद अख्तर की प्रतिक्रिया पर भी कहा कि वह भारतीय मुसलमानों की जीती-जागती वास्तविकताओं का खंडन करती है। उन्होंने लिखा, “जब जावेद अख्तर बॉलीवुड के बढ़ते सांप्रदायिकरण को लेकर एआर रहमान की चिंताओं को खारिज करते हैं, तो वह भारतीय मुसलमानों की जीती और साझा की गई वास्तविकताओं का खंडन करते हैं…”
उन्होने यह भी जोड़ा कि अख्तर अपनी पत्नी शबाना आज़मी के अनुभवों को भी नज़रअंदाज़ कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “यहां तक कि उनकी अपनी पत्नी शबाना आज़मी के अनुभवों को भी, जिन्होंने एक महानगरीय शहर बॉम्बे में मुस्लिम होने के कारण मकान न मिलने की बात खुलकर कही है।”
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