कुछ काम ना आ सका विराट कोहली का शतक, न्यूज़ीलैंड ने भारत को हराकर ऐतिहासिक वनडे सीरीज़ जीती
विराट कोहली का 54वां वनडे शतक भी भारत को जीत नहीं दिला सका। रविवार को इंदौर के होल्कर स्टेडियम में खेले गए तीसरे और अंतिम वनडे में भारत को न्यूज़ीलैंड के खिलाफ 41 रन से हार
विराट कोहली का 54वां वनडे शतक भी भारत को जीत नहीं दिला सका। रविवार को इंदौर के होल्कर स्टेडियम में खेले गए तीसरे और अंतिम वनडे में भारत को न्यूज़ीलैंड के खिलाफ 41 रन से हार का सामना करना पड़ा। 338 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम नियमित अंतराल पर विकेट गंवाती रही और केवल ‘चेज़ मास्टर’ कोहली ही भारत को मुकाबले में बनाए हुए थे।
37 वर्षीय कोहली को पहले नितीश कुमार रेड्डी और फिर हर्षित राणा का साथ मिला। दोनों ने अर्धशतक लगाए लेकिन हर बार जब भारत मैच पर पकड़ बनाता दिखा, तभी रन बनाते हुए विकेट गिर जाता। एक समय ऐसा लगा कि कोहली और राणा मिलकर मैच जिता देंगे लेकिन कम ओवरों में ज्यादा रन की जरूरत थी। राणा बड़े शॉट के प्रयास में आउट हो गए और बाद में कोहली भी डीप में कैच दे बैठे, जिससे न्यूज़ीलैंड ने भारत में अपनी पहली द्विपक्षीय वनडे सीरीज़ जीत दर्ज कर ली।
इस जीत के साथ न्यूज़ीलैंड ने भारत की धरती पर अपनी पहली द्विपक्षीय वनडे सीरीज़ जीत ली। इससे पहले 2024 में कीवी टीम ने भारत को तीन मैचों की टेस्ट सीरीज़ में 3-0 से व्हाइटवॉश किया था। संयोग से ये दोनों नतीजे गौतम गंभीर के कोच रहते हुए आए हैं।
कोहली ने एक बार फिर साबित किया कि उन्हें चेज़ मास्टर क्यों कहा जाता है। भारत की शुरुआत बेहद खराब रही और रोहित शर्मा (11) सस्ते में आउट हो गए, जिससे कोहली को जल्दी क्रीज़ पर आना पड़ा। काइल जैमीसन ने कोहली को कड़ी चुनौती दी लेकिन अनुभव के दम पर कोहली ने शुरुआती मुश्किल दौर संभाल लिया। हालांकि कप्तान शुभमन गिल (23) जल्द आउट हो गए, इसके बाद श्रेयस अय्यर (3) और केएल राहुल (1) भी पवेलियन लौट गए और भारत मुश्किल में फंस गया।
इसके बाद कोहली ने नितीश कुमार रेड्डी के साथ मिलकर पांचवें विकेट के लिए 88 रन की साझेदारी की। लेकिन, जैसे ही भारत ने बाउंड्री लगाकर दबाव बनाना शुरू किया, रेड्डी (53) अपना पहला वनडे अर्धशतक लगाने के बाद आउट हो गए। रवींद्र जडेजा (12) एक बार फिर खास प्रभाव नहीं छोड़ सके।
कोहली ने ज़ैकरी फॉल्क्स की गेंदबाज़ी पर 91 गेंदों में अपना 85वां अंतरराष्ट्रीय शतक पूरा किया। हालांकि, इस बार कोई जोशीला जश्न नहीं दिखा। काम की गंभीरता समझते हुए कोहली ने सिर्फ इंदौर के दर्शकों की गगनभेदी तालियों के बीच बल्ला उठाकर अभिवादन किया और फिर बल्लेबाज़ी जारी रखी। पूरे भारतीय डगआउट ने उन्हें खड़े होकर सम्मान दिया, यहां तक कि हेड कोच गौतम गंभीर भी तालियां बजाने से खुद को रोक नहीं पाए। यह भारत के लिए पिछले छह वनडे मैचों में कोहली का तीसरा शतक था। इस पारी के दौरान कोहली ने ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग को पीछे छोड़ते हुए नंबर तीन पर बल्लेबाज़ी करते हुए सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया।
जडेजा के आउट होने के बाद भारत की स्थिति बेहद खराब दिख रही थी लेकिन हर्षित राणा ने अलग ही इरादे दिखाए। कोहली के साथ उन्होंने सातवें विकेट के लिए 99 रन की साझेदारी की। दोनों ने बड़े-बड़े शॉट लगाए और इंदौर का मैदान तालियों से गूंज उठा। लेकिन, जल्दबाज़ी में राणा (52) अपना विकेट गंवा बैठे और अगली ही गेंद पर मोहम्मद सिराज बिना खाता खोले आउट हो गए।
इसके बाद सारी उम्मीदें कोहली पर टिकी थीं लेकिन यह चुनौती ‘किंग’ के लिए भी बहुत बड़ी साबित हुई। जैसे ही कोहली 124 रन बनाकर आउट हुए, मैच का नतीजा लगभग तय हो गया।
डैरिल मिचेल और ग्लेन फिलिप्स का जलवा
इससे पहले न्यूज़ीलैंड ने डैरिल मिचेल और ग्लेन फिलिप्स के शतकों की बदौलत 50 ओवर में 8 विकेट पर 337 रन बनाए। मिचेल ने सीरीज़ के तीन मैचों में कुल 352 रन बनाए और निर्णायक मुकाबले में शानदार 137 रन ठोके, जबकि फिलिप्स ने 106 रन की शतकीय पारी खेली।
शुभमन गिल ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाज़ी का फैसला किया। अर्शदीप सिंह और हर्षित राणा ने शानदार शुरुआत करते हुए न्यूज़ीलैंड के ओपनर हेनरी निकोल्स और डेवोन कॉनवे को आउट कर दिया। इसके बाद विल यंग और मिचेल ने तीसरे विकेट के लिए 53 रन जोड़े लेकिन असली नुकसान मिचेल और फिलिप्स की 219 रन की साझेदारी ने पहुंचाया, जिसने भारत को पूरी तरह बैकफुट पर डाल दिया।
डेथ ओवर्स में भारतीय गेंदबाज़ों ने वापसी की कोशिश की लेकिन कप्तान माइकल ब्रेसवेल ने आखिरी दो गेंदों पर 10 रन बटोर लिए, जिससे न्यूज़ीलैंड एक मज़बूत स्कोर तक पहुंचने में सफल रहा।
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