लोकसभा में महाकुंभ पर पीएम मोदी के बयान को लेकर विपक्ष का हंगामा, सदन पूरे दिन के लिए स्थगित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा महाकुंभ को लेकर दिए गए बयान पर विपक्षी दलों के भारी विरोध और हंगामे के चलते मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। इससे पहले, जैसे ही पीएम मोदी ने महाकुंभ को लेकर सदन में अपना वक्तव्य दिया, विपक्षी सदस्य विरोध में अपनी सीटों पर खड़े हो गए और शोरगुल शुरू कर दिया।
नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा महाकुंभ को लेकर दिए गए बयान पर विपक्षी दलों के भारी विरोध और हंगामे के चलते मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। इससे पहले, जैसे ही पीएम मोदी ने महाकुंभ को लेकर सदन में अपना वक्तव्य दिया, विपक्षी सदस्य विरोध में अपनी सीटों पर खड़े हो गए और शोरगुल शुरू कर दिया।
विपक्ष की मांग थी कि प्रधानमंत्री के बयान में महाकुंभ में भगदड़ से हुई मौतों का भी ज़िक्र किया जाए। गौरतलब है कि 29 जनवरी को महाकुंभ में भगदड़ की एक दुखद घटना में 30 लोगों की जान चली गई थी।
दोपहर 1 बजे दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने मंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान जवाब दिया। इसके बाद जल शक्ति मंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा होनी थी, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। महाकुंभ को लेकर पीएम मोदी के संबोधन ने जहां इसके सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक पहलुओं को उजागर किया, वहीं विपक्ष ने मृतकों का उल्लेख न होने को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया। इससे लोकसभा की कार्यवाही बाधित हुई।
क्या था प्रधानमंत्री मोदी का लोकसभा में महाकुंभ पर संबोधन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट सत्र के दौरान लोकसभा में महाकुंभ के महत्व पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा, "इस सदन के माध्यम से मैं देश की जनता को नमन करता हूँ, जिनके सहयोग से महाकुंभ का सफल आयोजन संभव हो पाया। इसमें सरकार और समाज के अनेक 'कर्मयोगियों' की भूमिका रही।"
पीएम मोदी के भाषण की मुख्य बातें
- महाकुंभ से भारत की नई पीढ़ी परंपराओं और आस्था से गर्व के साथ जुड़ रही है।
- प्रयागराज का महाकुंभ भारत के उदयमान आत्मबल का प्रतीक है।
- महाकुंभ से "एकता का अमृत" प्राप्त हुआ है।
- इस आयोजन की सफलता असंख्य लोगों के योगदान का परिणाम है।
- भारत की एकता की शक्ति किसी भी विघटनकारी प्रयास को ध्वस्त कर देती है।
- महाकुंभ में राष्ट्रीय जागरण देखने को मिला है, जो नए कीर्तिमानों को प्रेरित करेगा।
- यह आयोजन जनता के नेतृत्व में, उनकी आस्था और संकल्प से संचालित हुआ।
- "विविधता में एकता" भारत की विशेषता है, जिसे प्रयागराज में अनुभव किया गया।
- महाकुंभ के आयोजन में 'महाप्रयास' देखने को मिला।
- महाकुंभ से अर्थव्यवस्था को बड़ा प्रोत्साहन मिला है।
आर्थिक दृष्टिकोण से महाकुंभ का प्रभाव
प्रधान आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन ने बताया था कि महाकुंभ से मार्च तिमाही में खपत व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में भारत के 6.5% GDP लक्ष्य को पाने में यह आयोजन सहायक होगा।
- प्रयागराज में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित इस आयोजन का बजट करीब ₹12,670 करोड़ था (राज्य और केंद्र दोनों का योगदान)।
- प्रशासन ने अनुमान लगाया था कि महाकुंभ में लगभग 40 करोड़ लोग भाग लेंगे, लेकिन वास्तविक संख्या 63 करोड़ तक पहुंची।
- यह संख्या भारत की कुल आबादी का एक-चौथाई हिस्सा है — 45 दिनों में औसतन हर दिन 90 लाख श्रद्धालु शामिल हुए।
- अनुमान है कि इस आयोजन में लोगों द्वारा किया गया कुल व्यय ₹2 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है।
महाकुंभ: भारत का सबसे बड़ा आर्थिक आयोजन
CAIT (कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल के अनुसार:
- महाकुंभ में ₹3 लाख करोड़ (360 बिलियन USD) से अधिक का आर्थिक कारोबार हुआ है।
- यह आयोजन भारत का सबसे बड़ा "आस्था और वाणिज्य" का संगम बन गया है।
- इससे संबंधित उत्पादों जैसे डायरी, कैलेंडर, जूट बैग, स्टेशनरी आदि की मांग में तेज़ी आई।
- आयोजन ने आतिथ्य, खाद्य-सेवा, परिवहन, पूजा-सामग्री, हस्तशिल्प, वस्त्र, स्वास्थ्य, मीडिया और तकनीकी क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को प्रेरित किया।
प्रयागराज में बुनियादी ढांचे में निवेश
- उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रयागराज में बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए ₹7,500 करोड़ खर्च किए, जिनमें फ्लाईओवर, सड़कें, और अंडरपास शामिल हैं।
- इनमें से ₹1,500 करोड़ विशेष रूप से महाकुंभ की व्यवस्थाओं के लिए आवंटित किए गए।
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