मोदी सरकार ने 10 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र तेल-गैस अन्वेषण के लिए खोला, ऊर्जा क्षेत्र में बड़े उछाल की तैयारी
केंद्र सरकार ने देश की 35 लाख वर्ग किलोमीटर की तलछटी (sedimentary) बेसिन में से 10 लाख वर्ग किलोमीटर के "नो-गो" क्षेत्र को अब तेल और गैस की खोज (exploration) के लिए खोल दिया है, जो अब तक प्रतिबंधित था..
नयी दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश की 35 लाख वर्ग किलोमीटर की तलछटी (sedimentary) बेसिन में से 10 लाख वर्ग किलोमीटर के "नो-गो" क्षेत्र को अब तेल और गैस की खोज (exploration) के लिए खोल दिया है, जो अब तक प्रतिबंधित था। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने रविवार को यह जानकारी दी।
पुरी ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व की बदौलत अब यह पूरा ‘नो-गो’ क्षेत्र घरेलू उत्पादन को बढ़ाने और आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए खोल दिया गया है।”
उन्होंने यह भी बताया कि तेल और गैस खोज एवं उत्पादन (E&P) क्षेत्र में कारोबार को आसान बनाने के लिए नए कानून और कई सुधार किए गए हैं। मोदी सरकार ने पुरानी नई खोज एवं लाइसेंसिंग नीति (NELP) को हटाकर ओपन एक्रेज लाइसेंसिंग पॉलिसी (OALP) लागू की है, जिससे देश में तेल-गैस की खोज की प्रक्रिया तेज हो सके।
OALP के नौवें चरण (OALP-IX) में लगभग 38 प्रतिशत बोलियां इन नए खुले क्षेत्रों के लिए आईं, जबकि अगले चरण OALP-X में यह आंकड़ा 75 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
पुरी ने बताया कि OALP-X भारत का अब तक का सबसे बड़ा अन्वेषण चरण है, जिसमें देश के 13 तलछटी बेसिन में फैले 1,91,986.21 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में 25 ब्लॉक तेल-गैस खोज के लिए पेश किए गए हैं।
इन 25 ब्लॉक्स में से:
- 6 ब्लॉक ज़मीन पर (onshore)
- 6 ब्लॉक समुद्र के किनारे उथले जल (shallow offshore)
- 1 ब्लॉक गहरे समुद्री क्षेत्र (deepwater)
- 12 ब्लॉक अत्यंत गहरे समुद्री क्षेत्र (ultra-deepwater) में स्थित हैं।
पुरी ने कहा, “अब ध्यान उच्च संभावना वाले क्षेत्रों की ओर जा रहा है। अंडमान सागर, जो अब तक लगभग अनछुआ रहा है, जल्द ही भारत की अपनी गयाना जैसी ऊर्जा सफलता बन सकता है। यह भारत का 'बिग ऑयल मोमेंट' होगा!”
मंत्री पुरी पहले ही कह चुके हैं कि भारतीय हाइड्रोकार्बन क्षेत्र निवेशक-अनुकूल सुधारों, त्वरित मंजूरियों, वैज्ञानिक अन्वेषण और टिकाऊ विकास के बल पर नई तेज खोज एवं विकास के युग में प्रवेश कर चुका है।
पुरी ने यह भी कहा कि अगले दो दशकों में दुनिया की 25% अतिरिक्त ऊर्जा मांग की वृद्धि भारत से आएगी।
पिछले दशकों की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि 2006 से 2016 तक का दशक नीतिगत सुस्ती और प्रक्रियात्मक देरी से प्रभावित रहा, जिसके चलते BG, ENI, और Santos जैसे वैश्विक ऊर्जा दिग्गज भारत से बाहर हो गए। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। पुरी ने कहा, “हम भारत की लगभग 42 अरब टन तेल एवं गैस समतुल्य संसाधनों की असीम ऊर्जा क्षमता को अनलॉक करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
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