TET अनिवार्यता पर देशभर में विरोध, 20 लाख से अधिक सरकारी शिक्षकों की नौकरी पर संकट
अप्रैल। Supreme Court of India के हालिया निर्देश के बाद देशभर में सरकारी शिक्षकों के बीच असंतोष बढ़ गया है। राजधानी दिल्ली के Ramlila Maidan में शनिवार को हजारों शिक्षक एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन करते नजर आए। शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों को अब Teacher Eligibility Test (TET) पास करने के लिए बाध्य करना अन्यायपूर्ण..
नयी दिल्ली, 5 अप्रैल। Supreme Court of India के हालिया निर्देश के बाद देशभर में सरकारी शिक्षकों के बीच असंतोष बढ़ गया है। राजधानी दिल्ली के Ramlila Maidan में शनिवार को हजारों शिक्षक एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन करते नजर आए। शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों को अब Teacher Eligibility Test (TET) पास करने के लिए बाध्य करना अन्यायपूर्ण है।
प्रदर्शन में शामिल उत्तर प्रदेश के बिजनौर की 58 वर्षीय शिक्षिका अनीता देवी ने कहा कि जीवनभर पढ़ाने के बाद इस उम्र में परीक्षा देना उनके लिए कठिन है। उनके साथ कई 50 से 57 वर्ष आयु वर्ग के शिक्षक भी मौजूद रहे, जिन्होंने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की।
दरअसल, Supreme Court of India ने 1 सितंबर 2025 को दिए गए अपने आदेश में कहा था कि 2011 से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को दो वर्षों के भीतर TET उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। आदेश के अनुसार, निर्धारित समय सीमा में परीक्षा पास न करने पर संबंधित शिक्षकों की सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं। इस निर्णय से देशभर के लगभग 20 लाख शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश के करीब 2 लाख शिक्षक शामिल हैं।
इस मुद्दे पर Teachers Federation of India के बैनर तले शिक्षक लामबंद हो रहे हैं। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि वर्षों का अनुभव रखने वाले शिक्षकों को परीक्षा के दायरे में लाना अव्यवहारिक है। उनका तर्क है कि यदि सुधार की आवश्यकता है तो सरकार को प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर ध्यान देना चाहिए।
प्रदर्शन में पहुंचे सांसद Jagdambika Pal ने शिक्षकों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि इस विषय पर शिक्षा मंत्रालय से चर्चा की गई है और केंद्र सरकार से समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
शिक्षकों की प्रमुख मांग है कि 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट दी जाए तथा इस संबंध में सरकार आवश्यक कानूनी प्रावधान लाए। उनका कहना है कि नियुक्ति के वर्षों बाद नियमों में बदलाव करना न्यायसंगत नहीं है।
वर्तमान स्थिति में सुप्रीम कोर्ट के आदेश और शिक्षकों के विरोध के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में सरकार द्वारा लिए जाने वाले आगामी निर्णय पर लाखों शिक्षकों का भविष्य निर्भर करेगा।
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