बकरीद के दौरान हाउसिंग सोसाइटियों में कुर्बानी पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग, मुंबई मेयर ने बीएमसी से मांगा सर्कुलर
मुंबई में राज्य सरकार द्वारा मवेशी तस्करों और अवैध बूचड़खानों के खिलाफ सख्त महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) लगाने के निर्देश दिए जाने के कुछ दिनों बाद, मेयर ऋतु तावड़े और भारतीय जनता पार्टी के कुछ अन्य पदाधिकारियों ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) से बकरीद के दौरान रिहायशी इलाकों में बकरों की कुर्बानी पर प्रतिबंध लगाने वाला सर्कुलर..
मुंबई में राज्य सरकार द्वारा मवेशी तस्करों और अवैध बूचड़खानों के खिलाफ सख्त महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) लगाने के निर्देश दिए जाने के कुछ दिनों बाद, मेयर ऋतु तावड़े और भारतीय जनता पार्टी के कुछ अन्य पदाधिकारियों ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) से बकरीद के दौरान रिहायशी इलाकों में बकरों की कुर्बानी पर प्रतिबंध लगाने वाला सर्कुलर जारी करने की मांग की है।
मुस्लिम समुदाय के नेताओं ने चेतावनी दी है कि ऐसा सर्कुलर कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा कर सकता है। इसी महीने की शुरुआत में बीएमसी ने शहर में 100 से अधिक निर्धारित स्थानों पर धार्मिक पशु कुर्बानी की अनुमति दी थी। तीन दिवसीय त्योहार 28 मई से शुरू हो रहा है। बीएमसी की ओर से अभी तक इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
पूर्व सांसद और भाजपा नेता किरिट सोमैया ने मेयर, स्थायी समिति अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे, बीएमसी में भाजपा नेता गणेश खंकर और उद्यान समिति अध्यक्ष हेताल गाला के साथ बैठक की। इसके बाद इन सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों ने बीएमसी प्रमुख अश्विनी भिडे को पत्र लिखकर हाउसिंग सोसाइटियों और चॉलों में बकरों की कुर्बानी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की।
हालांकि बीएमसी के पास धार्मिक पशु कुर्बानी को लेकर पहले से ही कड़े नियम लागू हैं।
मुस्लिम संगठनों ने जताई आपत्ति
कुरैशी जमातों और समुदाय के नेताओं ने भाजपा पदाधिकारियों की इस नई पहल को “डॉग व्हिसल” राजनीति करार दिया। उनका कहना है कि जिन हाउसिंग सोसाइटियों ने एनओसी दी है, वहां भी कुर्बानी रोकने की कोशिश नागरिकों के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन है।
इमरान बाबू कुरैशी ने कहा, “लंबे समय से यह व्यवस्था रही है कि हाउसिंग सोसाइटियां एनओसी देती हैं और सावधानियों के साथ, जैसे कुर्बानी की जगह को ढंककर, बकरों की कुर्बानी की जाती है। जिन सोसाइटियों के पास वैध अनुमति है, वहां भी कुर्बानी रोकने का प्रयास नागरिकों के त्योहार मनाने के अधिकार का हनन है।”
वहीं आसिफ फारूकी ने कहा कि यदि ऐसा पूर्ण प्रतिबंध लागू किया गया तो असामाजिक तत्वों को माहौल बिगाड़ने का मौका मिल सकता है।
उन्होंने कहा, “बीएमसी और पुलिस के पास इतनी जनशक्ति नहीं है कि हर चॉल और रिहायशी इलाके में जाकर जांच करे कि पशु कुर्बानी हो रही है या नहीं। यदि सोसाइटी का कोई सदस्य आपत्ति नहीं करता, तो परिसर में बकरों की कुर्बानी से बाहरी लोगों को क्या परेशानी है? शरारती तत्व ऐसे सर्कुलर का दुरुपयोग कर सकते हैं।”
सोमैया ने स्वच्छता और नियमों का दिया हवाला
अतिरिक्त नगर आयुक्त विपिन शर्मा को लिखे पत्र में किरिट सोमैया ने कहा कि 21 मई को मेयर हॉल में हुई संयुक्त बैठक में इस विषय पर चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि “नागरिक अधिकारियों और राजनीतिक प्रतिनिधियों ने दोहराया कि रिहायशी परिसरों में पशु कुर्बानी नहीं होनी चाहिए।”
सोमैया ने सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता और नियमों के पालन का हवाला देते हुए बीएमसी से आवश्यक कार्रवाई करने और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की मांग की।
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