मुर्शिदाबाद हिंसा: बंगाल में अशांति के पीछे बांग्लादेश का हाथ? सरकारी सूत्रों ने जांच के खुलासे किए
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा को लेकर गृह मंत्रालय (MHA) को दी गई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में बांग्लादेशी उपद्रवियों की संलिप्तता का संकेत मिला है..
नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा को लेकर गृह मंत्रालय (MHA) को दी गई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में बांग्लादेशी उपद्रवियों की संलिप्तता का संकेत मिला है। सरकारी सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि शुरुआती जांच से यह भी सामने आया है कि इन उपद्रवियों को स्थानीय नेताओं से प्रारंभिक समर्थन मिला, लेकिन बाद में वे बेकाबू हो गए।
इस बीच, गृह मंत्रालय मुर्शिदाबाद समेत बंगाल के अन्य संवेदनशील जिलों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखे हुए है।
गृह सचिव गोविंद मोहन ने शनिवार को राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से बात की और हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने राज्य प्रशासन को अन्य संवेदनशील जिलों पर भी करीबी नजर रखने और शीघ्र सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए पर्याप्त कदम उठाने की सलाह दी।
गृह सचिव लगातार राज्य के मुख्य सचिव और DGP के संपर्क में हैं। साथ ही, मुर्शिदाबाद में सीमा सुरक्षा बल (BSF) की नौ कंपनियां — यानी लगभग 900 जवान — तैनात की गई हैं। इनमें से 300 जवान स्थानीय रूप से उपलब्ध हैं, जबकि अन्य कंपनियाँ राज्य सरकार के अनुरोध पर भेजी गई हैं।
इससे पहले, पश्चिम बंगाल के DGP ने जानकारी दी थी कि मुर्शिदाबाद की स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है और उस पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय BSF की मदद ली जा रही है, और अब तक 150 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
हिंसा पिछले सप्ताह मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद ज़िले में वक्फ (संशोधन) अधिनियम को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़की थी। यह विरोध प्रदर्शन मालदा, मुर्शिदाबाद, दक्षिण 24 परगना और हुगली जिलों में फैल गया, जिसमें आगजनी, पथराव और सड़क अवरोध जैसे घटनाएं देखने को मिलीं। अधिकारियों के अनुसार, हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में स्थिति अब भी तनावपूर्ण है, हालांकि कोई नई घटना नहीं हुई है।
मुर्शिदाबाद ज़िले में, जहाँ सबसे अधिक हिंसा हुई, धारा 144 लागू कर दी गई है और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं।
गृह मंत्रालय ने मुर्शिदाबाद के तीन सीमा क्षेत्रों में हालिया हिंसा को लेकर चिंता जताई है और अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों की तैनाती की है। प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया गया है कि बांग्लादेशी उपद्रवियों को कथित रूप से स्थानीय TMC नेताओं ने मदद दी थी, लेकिन बाद में वे भी इन पर से नियंत्रण खो बैठे।
हिंसा के चलते हिंदू परिवारों को अपने घर छोड़कर मालदा की ओर पलायन करना पड़ा, जिससे नए सिरे से घुसपैठ और सांप्रदायिक तनाव की आशंका बढ़ गई है।
केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है कि वह जनता की जान-माल की रक्षा, रेलवे संपत्तियों पर हमले और शुरुआती चरण में पुलिस की निष्क्रियता को रोकने में असफल क्यों रही।
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