प्रमुख हिंदू अधिकार अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, वक्फ संशोधन अधिनियम को दी चुनौती
प्रख्यात हिंदू अधिकार कार्यकर्ता और अधिवक्ता हरी शंकर जैन व उनके पुत्र विष्णु जैन ने मंगलवार को वक्फ (संशोधन) अधिनियम की विभिन्न धाराओं को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
नयी दिल्ली। प्रख्यात हिंदू अधिकार कार्यकर्ता और अधिवक्ता हरी शंकर जैन व उनके पुत्र विष्णु जैन ने मंगलवार को वक्फ (संशोधन) अधिनियम की विभिन्न धाराओं को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
इन धाराओं — धारा 3(r), 4, 5, 6(1), 7(1), 8, 28, 29, 33, 36, 41, 52, 83, 85, 89, और 101 — को संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21, 25, 27 और 300A के विरुद्ध बताते हुए रद्द करने की मांग की गई है।
यह पिता-पुत्र की जोड़ी अयोध्या मामले में अग्रणी रही है और वर्तमान में ज्ञानवापी मस्जिद–काशी विश्वनाथ मंदिर, कृष्णजन्मभूमि–शाही ईदगाह (मथुरा), और सम्भल विवादों में हिंदू पक्ष की ओर से प्रमुखता से मुकदमे लड़ रही है।
याचिका में कहा गया है, “यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत जनहित में दायर की जा रही है, जिसमें वक्फ अधिनियम 1995, जिसमें 2025 के वक्फ (संशोधन) अधिनियम संख्या 14 द्वारा किए गए संशोधनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। यह अधिनियम 08.04.2025 को अधिसूचित किया गया था।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन संशोधित धाराओं ने मुसलमानों को सरकारी ज़मीन, ग्राम समाज की ज़मीनों, और हिंदू धार्मिक स्थलों की ज़मीनों पर अवैध कब्जा करने का अवसर दिया है, जिससे उन्होंने एक बड़ा साम्राज्य बना लिया है और करोड़ों की आमदनी कर रहे हैं, वह भी आम जनता की कीमत पर।
इससे हिंदू समुदाय का जीवन, संपत्ति और धार्मिक अधिकार खतरे में आ गए हैं। ये प्रावधान पक्षपातपूर्ण, भेदभावकारी हैं और समाज में असंतुलन और वैमनस्य पैदा कर रहे हैं।"
मुख्य प्रार्थनाएँ (Key Prayers)
- घोषणा की जाए कि उपयुक्त सरकार यह सुनिश्चित करे कि हिंदू समुदाय की व्यक्तिगत या धार्मिक संपत्तियाँ, जिन्हें 2025 में जोड़ी गई धारा 3C के तहत गलत तरीके से वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज किया गया है, की पहचान की जाए और राजस्व अभिलेख की जांच के माध्यम से सच्चाई सामने लाई जाए।
- सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह शामलात देह, शामलात पट्टी, जु्मला मुल्कान जैसी सरकारी/साझा ज़मीनें जो वक्फ बोर्ड के नाम पर दर्ज हो चुकी हैं, उन्हें पुनः हासिल करने के लिए प्रभावी कदम उठाए।
- यह घोषित किया जाए कि धारा 4 और 5 के तहत की गई किसी भी कार्यवाही, निर्णय या आदेश का हिंदू या गैर-मुस्लिम व्यक्तियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ सकता। साथ ही वे धारा 6(1) और 7(1) में प्रयुक्त "प्रभावित व्यक्ति" की परिभाषा में नहीं आते।
- यह घोषित किया जाए कि हिंदू/गैर-इस्लामी समुदायों के सदस्य वक्फ अधिनियम के अंतर्गत की गई किसी भी कार्रवाई के विरुद्ध सिविल कोर्ट का सहारा ले सकते हैं और धारा 83/85 की बाध्यता उन पर लागू नहीं होती।
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