NEET-UG 2026 पेपर लीक का स्रोत NTA के भीतर से, CBI ने अदालत को बताया; दो और गिरफ्तार
Central Bureau of Investigation ने गुरुवार को दिल्ली की अदालत को बताया कि NEET-UG 2026 का लीक हुआ प्रश्नपत्र National Testing Agency (NTA) के अंदरूनी स्रोत से बाहर आया था। यह जानकारी राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश अजय कुमार गुप्ता के आदेश में दर्ज की गई, जिसमें पांच आरोपियों को सात दिन की CBI हिरासत में भेजा..
नयी दिल्ली। Central Bureau of Investigation ने गुरुवार को दिल्ली की अदालत को बताया कि NEET-UG 2026 का लीक हुआ प्रश्नपत्र National Testing Agency (NTA) के अंदरूनी स्रोत से बाहर आया था। यह जानकारी राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश अजय कुमार गुप्ता के आदेश में दर्ज की गई, जिसमें पांच आरोपियों को सात दिन की CBI हिरासत में भेजा गया।
अदालत के आदेश के अनुसार, आरोपी शुभम खैरनार को यह प्रश्नपत्र पुणे के एक व्यक्ति से मिला था, जिसे कथित तौर पर NTA के एक स्रोत से पेपर प्राप्त हुआ था। CBI अब उन NTA अधिकारियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों की पहचान करने में जुटी है, जो कथित रूप से पेपर लीक में शामिल थे।
यह मामला तब सामने आया जब 12 मई को NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द कर दी गई। परीक्षा में देशभर के 551 शहरों में 22.7 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। केंद्रीय एजेंसियों ने पुष्टि की थी कि प्रश्नपत्र लीक हो चुका था।
CBI ने अपनी रिमांड अर्जी में अदालत को बताया कि 29 अप्रैल को, यानी परीक्षा से चार दिन पहले, टेलीग्राम पर 500-600 प्रश्नों वाली एक PDF प्रसारित हो रही थी। जांच में पाया गया कि इनमें से 180 प्रश्न वास्तविक NEET-UG प्रश्नपत्र से “पूरी तरह मेल खाते” थे।
एजेंसी ने अदालत से कहा कि आरोपियों से पूछताछ जरूरी है ताकि इस बड़े षड्यंत्र की पूरी कड़ी और प्रश्नपत्र लीक के असली स्रोत का पता लगाया जा सके। साथ ही NTA और अन्य विभागों के उन अधिकारियों की पहचान की जा सके, जो इस मामले में शामिल हो सकते हैं।
CBI हिरासत में भेजे गए पांच आरोपियों में गुरुग्राम के यश यादव, जयपुर के मंगीलाल खटीक, विकास बिवाल और दिनेश बिवाल तथा नासिक के शुभम खैरनार शामिल हैं। इन सभी को अलग-अलग राज्यों से ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया गया।
इसके अलावा, एजेंसी ने गुरुवार को अहिल्यानगर से धनंजय लोखंडा और पुणे से मनीषा वाघमारे को भी गिरफ्तार किया।
पिछले 24 घंटों में CBI अधिकारियों ने 14 स्थानों पर छापेमारी की, जहां से मोबाइल फोन, आपत्तिजनक चैट और लीक प्रश्नपत्र जैसी डिजिटल सामग्री बरामद की गई। जांचकर्ताओं ने बताया कि कुछ डिलीट किए गए डेटा की फोरेंसिक जांच करानी होगी।
CBI की एक टीम ने जांच से जुड़े दस्तावेज जुटाने के लिए NTA मुख्यालय का भी दौरा किया। एजेंसी के प्रवक्ता ने कहा, “कई अन्य संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है।”
जांच के अनुसार, शुभम खैरनार ने कथित तौर पर अप्रैल में यश यादव को बताया था कि मंगीलाल खटीक अपने छोटे बेटे के लिए लीक हुए NEET प्रश्नपत्र के बदले 10 से 12 लाख रुपये देने को तैयार है।
29 अप्रैल को खैरनार ने टेलीग्राम के जरिए यश यादव को फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के 500-600 प्रश्न भेजे थे। बताया गया कि यश यादव की पहचान मंगीलाल के बड़े बेटे विकास बिवाल से राजस्थान के सीकर में NEET कोचिंग के दौरान हुई थी, जिससे यह संपर्क स्थापित हुआ।
CBI के अनुसार, सौदा 10 लाख रुपये में तय हुआ था, इस शर्त पर कि कम से कम 150 प्रश्न असली NEET परीक्षा से मेल खाने चाहिए। जांचकर्ताओं का दावा है कि मंगीलाल ने लीक प्रश्नपत्र की प्रिंट कॉपी प्राप्त कर उसे अपने रिश्तेदारों और परीक्षा देने वाले परिचितों में बांटा था।
एजेंसी ने अदालत में कहा, “यश यादव से पूरी बातचीत मंगीलाल ने की थी। PDF प्रिंट कर तीन सेट तैयार किए गए और बांटे गए।”
CBI ने यह भी आरोप लगाया कि यश यादव ने विकास बिवाल को और अभ्यर्थियों को जोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि प्रश्नपत्र हासिल करने में खर्च हुई रकम वसूली जा सके। उम्मीदवारों की जानकारी व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम के जरिए साझा की गई थी।
वरिष्ठ लोक अभियोजक नीतू सिंह ने अदालत से कहा कि जांच एजेंसियों को “यह पता लगाना है कि प्रश्नपत्र कैसे लीक हुआ और इसे कितनी दूर तक फैलाया गया।” उन्होंने कहा कि इस अपराध से जुड़े सरकारी कर्मचारियों और आरोपियों द्वारा उपयोग किए गए प्रिंटिंग प्रेस की भूमिका की भी जांच की जानी बाकी है।
CBI ने अदालत में कहा कि हिरासत में पूछताछ जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसे प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं को रोका जा सके और मामले में शामिल अन्य आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जा सके।
अधिकारियों के अनुसार, एजेंसी अब उस कथित “NTA स्रोत” की पहचान पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जो पुणे स्थित बिचौलिए से जुड़ा हुआ था। यही कड़ी यह स्पष्ट कर सकती है कि प्रश्नपत्र आधिकारिक सुरक्षा व्यवस्था से बाहर कैसे पहुंचा।
वहीं बचाव पक्ष ने रिमांड का विरोध करते हुए कहा कि गिरफ्तारियां अवैध हैं और आरोपियों को गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए गए। वकीलों ने यह भी तर्क दिया कि हिरासत में पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं है।
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