नागपुर हिंसा: 18 विशेष टीमें गठित, 69 गिरफ्तार, 200 आरोपियों की पहचान
सोमवार को हुई हिंसा के बाद नागपुर हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई तेज़ करते हुए 18 विशेष टीमें गठित की हैं, जो आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए काम कर रही हैं।
नागपुर। इस सप्ताह के सोमवार को हुई हिंसा के बाद नागपुर हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई तेज़ करते हुए 18 विशेष टीमें गठित की हैं, जो आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए काम कर रही हैं। गुरुवार को अधिकारियों ने बताया कि अब तक 69 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 200 लोगों की पहचान हो चुकी है और 1,000 संदिग्धों की पहचान CCTV फुटेज के आधार पर की जा रही है।
अब तक की प्रमुख जानकारी:
- सोमवार को गणेशपेठ और कोतवाली थानों में पांच एफआईआर दर्ज की गईं हैं, जिनमें करीब 200 लोगों को नामजद किया गया है।
- कर्फ्यू अभी भी कई इलाकों में लागू है — गुरुवार को लगातार तीसरा दिन है।
- 33 पुलिसकर्मी घायल, जिनमें तीन DCP रैंक के अधिकारी भी शामिल हैं।
- दंगों के दौरान वाहनों में तोड़फोड़, पेट्रोल बम और पथराव, यहां तक कि घरों पर भी हमले किए गए।
- एक महिला पुलिस कांस्टेबल के साथ बदसलूकी और उसे अपमानित करने की कोशिश की गई, इसकी पुष्टि एफआईआर में हुई है।
एफआईआर में नामजद प्रमुख नेता:
- माइनॉरिटी डेमोक्रेटिक पार्टी (MDP) के नेता फ़हीम ख़ान को गिरफ्तार किया गया है।
- पुलिस के अनुसार, ख़ान ने सोमवार को गणेशपेठ थाने के बाहर 50–60 लोगों की भीड़ के साथ प्रदर्शन किया था।
- उसके बाद, ख़ान और आठ अन्य लोग भालदारपुरा क्षेत्र पहुंचे, जहां 500–600 लोगों की भीड़ शिवाजी महाराज चौक के पास जुटी थी।
- फ़हीम ख़ान पर पहले भी कई मामले दर्ज हैं, जिनमें बिजली चोरी और 2023-24 के विरोध प्रदर्शन शामिल हैं।
CCTV व साइबर सेल की मदद से पहचान जारी
- क्राइम ब्रांच, साइबर सेल, और स्थानीय थानों की मदद से दंगाइयों की पहचान की जा रही है।
- नागपुर पुलिस आयुक्त डॉ. रविंद्र कुमार सिंगल ने बताया कि जांच जारी है और फ़हीम ख़ान के “मास्टरमाइंड” होने की भूमिका की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
हिंसा की वजह क्या थी?
- प्रारंभिक जांच में पाया गया कि हिंसा की चिंगारी अफवाहों से भड़की थी।
- विश्व हिंदू परिषद (VHP) द्वारा औरंगज़ेब की मजार हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन हुआ था।
- इसके बाद अफवाह फैली कि पवित्र इबारतों वाली चादर जलाई गई है, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।
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