उत्तर कोरिया:अब विदेशी फिल्में और टीवी शो देखने पर भी मौत की सज़ा, यूएन रिपोर्ट में सनसनीख़ेज़ खुलासा
उत्तर कोरिया में आम लोगों की ज़िंदगी पर सरकार का शिकंजा और कसता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र की ताज़ा रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, यहाँ विदेशी फ़िल्में या टीवी सीरियल देखने जैसी “साधारण” लगने वाली बात भी किसी की जान ले सकती ..
नयी दिल्ली। उत्तर कोरिया में आम लोगों की ज़िंदगी पर सरकार का शिकंजा और कसता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र की ताज़ा रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, यहाँ विदेशी फ़िल्में या टीवी सीरियल देखने जैसी “साधारण” लगने वाली बात भी किसी की जान ले सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, किम जोंग-उन के शासन ने पिछले एक दशक में नागरिकों की स्वतंत्रता पर ऐसा नियंत्रण कर लिया है, जैसा दुनिया के किसी और देश में नहीं दिखता। छोटे से छोटे अपराध पर कठोर दंड, यहाँ तक कि मृत्युदंड भी, आम होता जा रहा है
तकनीक से बढ़ी निगरानी
यूएन मानवाधिकार कार्यालय ने कहा कि आज उत्तर कोरिया में नागरिकों के जीवन का कोई पहलू ऐसा नहीं बचा, जिस पर निगरानी न रखी जा रही हो। मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया पर नियंत्रण इतना सख्त है कि लोगों की साँसें तक गिनी जा रही हों। तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने निगरानी को और आसान बना दिया है।
ज़बरन मज़दूरी और दमन
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि उत्तर कोरिया में ज़बरन मज़दूरी आम है। छात्र से लेकर आम नागरिक तक, सभी को खेतों और सरकारी परियोजनाओं में काम करने पर मजबूर किया जाता है। छुट्टी, वेतन या सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का कोई अधिकार नहीं है।
"सबसे पाबंद आबादी"
रिपोर्ट के अंतिम हिस्से में कहा गया है, "आज की दुनिया में कोई और आबादी इतनी पाबंदियों में नहीं जी रही है, जितनी उत्तर कोरिया की।"
मानवाधिकार संगठनों ने इस स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए चेतावनी दी है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में उत्तर कोरिया में मानवीय संकट और गहरा सकता है।
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