पीएम मोदी ने कतर अमीर से की बातचीत; दुर्लभ घटनाक्रम में भारत ने इसराइल की कड़ी आलोचना की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी से बातचीत की और दोहा में इसराइली हमलों पर गहरी चिंता जताते हुए "भाईचारे वाले कतर की संप्रभुता के उल्लंघन" की निंदा..
नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी से बातचीत की और दोहा में इसराइली हमलों पर गहरी चिंता जताते हुए "भाईचारे वाले कतर की संप्रभुता के उल्लंघन" की निंदा की।
मोदी ने कहा कि भारत संवाद और कूटनीति के माध्यम से विवादों के समाधान का समर्थन करता है और तनाव बढ़ने से बचने की ज़रूरत है। प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया, “भारत क्षेत्र में शांति और स्थिरता का दृढ़ समर्थक है और हर प्रकार के आतंकवाद का विरोध करता है।”
मोदी ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने में कतर की भूमिका की सराहना की, विशेषकर ग़ाज़ा में युद्धविराम और सभी बंधकों की रिहाई के लिए उसके मध्यस्थता प्रयासों की।
भारत की ओर से यह इसराइल की कार्रवाई की एक दुर्लभ, बल्कि अभूतपूर्व आलोचना मानी जा रही है, वह भी उच्चतम स्तर से। यह संकेत है कि सरकार कतर के साथ अपने संबंधों को कितनी अहमियत देती है। इसराइल ने “हमास के शीर्ष आतंकी सरगनाओं” पर कार्रवाई की पूरी जिम्मेदारी ली है।
मोदी ने व्यक्तिगत तौर पर अल-थानी के साथ अच्छे संबंध बनाए हैं। पिछले साल अल-थानी ने विशेष पहल करते हुए कथित रूप से इसराइल के लिए जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किए गए भारतीय नौसेना के आठ पूर्व अधिकारियों को माफ़ किया था, जिससे यह रिश्ता और गहरा हुआ। इस साल की शुरुआत में अल-थानी की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी तक अपग्रेड किया था।
भारत इसराइल के आत्मरक्षा के अधिकार का लगातार समर्थक रहा है, लेकिन ग़ाज़ा में इसराइली कार्रवाइयों पर वैश्विक आक्रोश के बीच उसने नागरिकों की मौत की निंदा भी की है और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने की आवश्यकता पर बल दिया है। इसी महीने की शुरुआत में हुए शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन में भारत ने अन्य सदस्यों के साथ मिलकर इसराइल और अमेरिका के ईरान एवं उसके परमाणु ठिकानों पर हमलों की निंदा की थी।
हाल ही में मंगलवार को हमले के कुछ ही घंटों बाद भारत ने चिंता जताते हुए संयम बरतने की अपील की थी, लेकिन वह पर्याप्त नहीं माना गया। कतर के आधिकारिक बयान के अनुसार, मोदी ने कतर के साथ एकजुटता जताई और इसराइली हमले को “कायराना कार्रवाई” बताया, जो हमास नेताओं के आवासीय मुख्यालय को निशाना बनाकर किया गया था। इसे “सभी अंतरराष्ट्रीय कानूनों और मानदंडों का खुला उल्लंघन तथा कतर और क्षेत्रीय देशों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा” करार दिया गया।
कतर सरकार के बयान में कहा गया, “भारतीय प्रधानमंत्री ने किसी भी आक्रामकता को सख्ती से खारिज किया जो कतर और उसके नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डालती है और क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर करती है।”
अल-थानी ने बातचीत में दोहराया कि कतर अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए हर कदम उठाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त किया और कहा कि “कतर और उसकी जनता के साथ भारत की ईमानदार भावनाएं और सराहनीय एकजुटता” काबिले-तारीफ़ है।
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