पाकिस्तानी ड्रोन चूका निशाना, चार मासूम नागरिकों की मौत लेकिन सरकार मौन..!

भारत के साथ संघर्षविराम के बाद अब पाकिस्तान की सेना ने अपने ही नागरिकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है..

पाकिस्तानी ड्रोन चूका निशाना, चार मासूम नागरिकों की मौत  लेकिन सरकार मौन..!
21-05-2025 - 07:27 AM
22-04-2026 - 05:53 PM

नयी दिल्ली। भारत के साथ संघर्षविराम के बाद अब पाकिस्तान की सेना ने अपने ही नागरिकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। सोमवार आधी रात को खैबर पख्तूनख्वा के उत्तर वज़ीरिस्तान स्थित होर्मुज़ गांव में पाकिस्तानी सेना द्वारा किए गए ड्रोन हमले में चार मासूम बच्चों की मौत हो गई और कम से कम पाँच अन्य घायल हो गए।

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हमला प्रतिबंधित आतंकी संगठन पाकिस्तानी तालिबान को निशाना बनाने के उद्देश्य से किया गया था। लेकिन ड्रोन मिसाइल एक घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके में गिरा, जिसके कारण आतंकवादियों के बजाय महिलाएं और बच्चे मारे गए। इस घटना ने सेना की मंशा और हमलों की सटीकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह हमला पख्तून-बहुल इलाकों में नागरिक जीवन के प्रति सेना की घोर लापरवाही को दर्शाता है।

जनता का फूटा ग़ुस्सा

इस घटना के बाद पाकिस्तान भर में जन आक्रोश फैल गया। पीड़ित परिवारों ने मीर अली कैंटोनमेंट गेट के बाहर बच्चों के शव रखकर प्रदर्शन किया और सेना पर आम नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। पेशावर में छात्रों ने सड़कों पर उतरकर पख्तून इलाकों में ड्रोन हमलों पर तुरंत रोक और सेना व सरकार से जवाबदेही की मांग की।

राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज

इस हमले पर सियासी प्रतिक्रिया भी तीव्र रही। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के सांसद अली अमीन खान ने हमले की निंदा करते हुए सेना पर पख्तूनों की जान को “बेकार” समझने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “अगर यही हमला लाहौर या गुजरांवाला में हुआ होता, तो क्या प्रतिक्रिया ऐसी ही होती? इस सरकार के लिए पख्तूनों का खून सस्ता है। ऐसे राज्य पर शर्म आनी चाहिए।”

विपक्ष की एक और सांसद जरताज गुल ने सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “जब हमारी पार्टी (PTI) सत्ता में थी, हमारी ड्रोन नीति स्पष्ट थी — कोई पाकिस्तानी नागरिक नहीं मरेगा। लेकिन अब हम उत्तर वज़ीरिस्तान से दिल दहला देने वाली तस्वीरें देख रहे हैं।”

सरकार और सेना मौन

हालांकि जन और राजनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा है, लेकिन न तो पाकिस्तानी सरकार और न ही सेना की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। रक्षा मंत्री के कार्यालय और सेना के जनसंपर्क विभाग (ISPR) ने हमले की कोई जिम्मेदारी नहीं ली है। हैरान करने वाली बात यह रही कि जब पत्रकारों ने रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ से सवाल पूछे, तो उन्होंने कोई जवाब दिए बिना चुपचाप चले गए।

सेना का पुराना इतिहास

यह घटना कोई नई नहीं है। पाकिस्तानी सेना का अपने ही देश और सीमावर्ती क्षेत्रों में नागरिक आबादी को निशाना बनाने का लंबा इतिहास रहा है। भारत के साथ हाल ही में हुए चार दिवसीय संघर्ष के दौरान भी पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइलों से भारतीय रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया था, लेकिन भारत की मजबूत वायु सुरक्षा प्रणाली ने समय रहते खतरे को निष्क्रिय कर दिया। इसके बावजूद पाकिस्तान ने झूठा दावा किया था कि उसने कभी नागरिकों को निशाना नहीं बनाया।

लेकिन अब पाकिस्तान के भीतर ही सच्चाई उजागर हो रही है। होर्मुज़ की घटना से कुछ ही दिन पहले, 15 मई को, पाकिस्तानी सेना ने उत्तर वज़ीरिस्तान की सरगोधा तहसील में एक और ड्रोन हमला किया था, जिसमें तीन मासूम बच्चियां घायल हुई थीं।

पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान, जिस पर लंबे समय से आतंकियों को शरण देने और जातीय अल्पसंख्यकों को दबाने के आरोप लगते रहे हैं, अब अपने ही नागरिकों के सामने बेनकाब हो गया है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।