कांशीराम को मरणोपरांत भारत रत्न देने की मांग: राहुल गांधी ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, यूपी चुनाव से पहले दलित राजनीति तेज

Rahul Gandhi ने रविवार को प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखकर दलित नेता और Bahujan Samaj Party (बसपा) के संस्थापक Kanshi Ram को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान Bharat Ratna से सम्मानित करने की मांग..

कांशीराम को मरणोपरांत भारत रत्न देने की मांग: राहुल गांधी ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, यूपी चुनाव से पहले दलित राजनीति तेज
16-03-2026 - 09:45 AM
22-04-2026 - 05:53 PM

Rahul Gandhi ने रविवार को प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखकर दलित नेता और Bahujan Samaj Party (बसपा) के संस्थापक Kanshi Ram को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान Bharat Ratna से सम्मानित करने की मांग की है।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि सामाजिक न्याय के महान योद्धा और बहुजन चेतना के मार्गदर्शक कांशीराम को भारत रत्न देना पूरे बहुजन आंदोलन के लिए सम्मान होगा।

उन्होंने कहा कि कांशीराम ने करोड़ों बहुजन समाज के लोगों को अधिकार, भागीदारी और आत्मसम्मान का रास्ता दिखाया।

यूपी चुनाव से पहले दलित वोट बैंक पर फोकस

यह मांग ऐसे समय आई है जब Uttar Pradesh में विधानसभा चुनाव लगभग एक साल दूर हैं और राज्य की राजनीति में दलित वोट बेहद अहम माना जाता है।

यूपी में दलित मतदाता लगभग 20 प्रतिशत हैं। ऐसे में लगभग सभी बड़े राजनीतिक दल कांशीराम की विरासत से खुद को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

उनकी जयंती 15 मार्च से पहले राज्य के कई जिलों में अलग-अलग पार्टियों के झंडों के साथ कांशीराम की तस्वीर वाले पोस्टर लगाए गए, जिनमें हर दल खुद को उनके विचारों का असली वारिस बता रहा है।

लखनऊ कार्यक्रम से शुरू हुआ कांग्रेस का अभियान

राहुल गांधी 13 मार्च को Lucknow में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। पार्टी नेताओं के अनुसार यह कार्यक्रम 2027 के यूपी चुनाव के लिए कांग्रेस के अभियान की शुरुआत का संकेत था।

राहुल गांधी ने अपने पत्र में लिखा कि कांशीराम ने भारतीय राजनीति की प्रकृति को बदल दिया और बहुजनों व गरीबों में राजनीतिक चेतना जगाई। उन्होंने लोगों को यह एहसास कराया कि उनका वोट, आवाज और प्रतिनिधित्व बेहद महत्वपूर्ण है।

नेहरू को लेकर राहुल गांधी का बयान

लखनऊ में आयोजित संविधान सम्मेलन में राहुल गांधी ने कहा कि अगर उनके परदादा और देश के पहले प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru उस समय जीवित होते, तो कांशीराम कांग्रेस के मुख्यमंत्री बन सकते थे।

हालांकि नेहरू का निधन 1964 में हो गया था, जबकि कांशीराम ने 1978 में BAMCEF और बाद में 1984 में बसपा की स्थापना करके राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा प्रभाव बनाया।

मायावती और बसपा की भूमिका

बसपा प्रमुख Mayawati लगातार यह याद दिलाती रही हैं कि कांशीराम ने बसपा को सामाजिक न्याय की लड़ाई के लिए बनाया था और उन्होंने मायावती को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी चुना था।

कांशीराम खुद सीधे सत्ता में नहीं आए, बल्कि संगठन निर्माण पर ध्यान देते हुए मायावती को नेतृत्व सौंपा।

बसपा की चुनावी स्थिति

हाल के वर्षों में बसपा का चुनावी प्रदर्शन कमजोर हुआ है।

  • 2009 में पार्टी का वोट शेयर लगभग 27% था
  • 2024 तक यह घटकर 10% से कम रह गया
  • 2022 यूपी विधानसभा चुनाव में पार्टी करीब 13% वोट के साथ चौथे स्थान पर रही

2024 के लोकसभा चुनाव में भी बसपा को एक भी सीट नहीं मिली

यूपी की राजनीति में नई दावेदारी

कांशीराम की राजनीतिक विरासत पर दावा करने वालों में एक नाम Chandrashekhar Azad का भी है। वे नागीना से सांसद हैं और उनकी पार्टी Azad Samaj Party (कांशीराम) भी बहुजन राजनीति को आगे बढ़ाने का दावा करती है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।