राजनाथ सिंह ने नहीं किया SCO संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर.. कहा, भारत की आतंकवाद संबंधी चिंताओं की अनदेखी
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के रक्षा मंत्रियों की बैठक गुरुवार को संयुक्त बयान जारी नहीं कर सकी, क्योंकि भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया..
नयी दिल्ली। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के रक्षा मंत्रियों की बैठक गुरुवार को संयुक्त बयान जारी नहीं कर सकी, क्योंकि भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि इस दस्तावेज़ में भारत की आतंकवाद से जुड़ी चिंताओं को दरकिनार किया गया है। इस मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
बैठक चीन के क़िंगदाओ शहर में हुई, जहाँ राजनाथ सिंह ने भाग लिया। लेकिन, उन्होंने उस संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर नहीं किए, जिसमें पाकिस्तान में 11 मार्च को बलोचिस्तान लिबरेशन आर्मी द्वारा जैफ़र एक्सप्रेस के अपहरण की घटना का ज़िक्र था लेकिन 22 अप्रैल को भारत के पहलगाम में हुए आतंकी हमले (जिसमें 26 लोग मारे गए थे) को पूरी तरह नजरअंदाज़ कर दिया गया।
चीन, जो इस समय SCO का अध्यक्ष है, ने हाल में भारत और पाकिस्तान के बीच "ऑपरेशन सिंदूर" के दौरान पाकिस्तान का खुला समर्थन किया था। चीन और पाकिस्तान के बीच मजबूत सैन्य और रणनीतिक संबंध हैं।
राजनाथ सिंह ने बैठक में कहा, "आतंकवाद का हर कृत्य आपराधिक और अक्षम्य है। इस क्षेत्र की सुरक्षा के लिए SCO को एकजुट होकर आतंकवाद का खात्मा करना चाहिए।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर आत्मरक्षा के अधिकार के तहत शुरू किया और इसका उद्देश्य आतंकी हमलों को रोकना और उनका प्रतिकार करना था।
22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले की ज़िम्मेदारी ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने ली थी, जो कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का मोर्चा है। सिंह ने कहा, "इस हमले की शैली लश्कर के पुराने हमलों से मिलती-जुलती है। भारत की आतंकवाद के प्रति ‘शून्य सहिष्णुता’ की नीति हमारे जवाबी कार्रवाई में दिखी। हमने दुनिया को दिखा दिया कि अब आतंकवाद के केंद्र सुरक्षित नहीं हैं, और भारत उन्हें निशाना बनाने से नहीं हिचकिचाएगा।"
राजनाथ सिंह ने कहा, ऑपरेशन सिंदूर 7 मई की सुबह शुरू हुआ था, जब भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित नौ आतंकी शिविरों पर हमले किए, जिनमें 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए। यह कार्रवाई 22 अप्रैल को हुए हमले के प्रतिशोध स्वरूप की गई थी। इसके बाद चार दिन तक ड्रोन, मिसाइल और लंबी दूरी के हथियारों से दोनों ओर से हमले हुए, और अंततः 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी।
राजनाथ सिंह ने क्षेत्र में बढ़ते कट्टरपंथ, उग्रवाद और आतंकवाद को शांति, सुरक्षा और विश्वास की सबसे बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा, "जब तक आतंकवाद और विनाशकारी हथियार गैर-राज्य तत्वों और आतंकी संगठनों के हाथ में हैं, तब तक शांति और समृद्धि एक साथ नहीं चल सकते। इसके लिए ठोस कार्रवाई ज़रूरी है।"
उन्होंने 15 मई को पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की सुरक्षा पर भी सवाल उठाया था और मांग की थी कि पाकिस्तान का परमाणु जखीरा अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में लाया जाए। उन्होंने पाकिस्तान को "गैर-जिम्मेदार और शरारती राष्ट्र" बताया।
राजनाथ सिंह ने SCO को चेताते हुए कहा, "जो देश आतंकवाद को पनाह देते हैं, पोषित करते हैं और अपने राजनीतिक हितों के लिए उसका इस्तेमाल करते हैं, उन्हें इसका खामियाजा भुगतना चाहिए। ऐसे देशों को स्पष्ट रूप से उजागर करना होगा।" उन्होंने कहा, "आतंकवाद के अपराधी, योजनाकार, फंड देने वाले और सरंक्षण देने वाले सभी को जवाबदेह ठहराना चाहिए और न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए।"
उन्होंने युवाओं में बढ़ते कट्टरपंथ पर भी चिंता जताई और इसके लिए SCO की एंटी-टेरर यूनिट RATS (Regional Anti-Terrorist Structure) की भूमिका की सराहना की। सिह ने कहा, "भारत की अध्यक्षता के दौरान जारी 'रैडिकलाइजेशन, आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से निपटने' पर SCO देशों का साझा बयान हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।"
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