इज़राइल की ‘पावर टेबल’ पर भारत को मिली जगह से पाकिस्तान आहत, मोदी की यात्रा ने बढ़ाई क्षेत्रीय हलचल
भारत को इज़राइल की उभरती रणनीतिक संरचना में अहम स्थान मिलने से पाकिस्तान की बेचैनी खुलकर सामने आ गई है। प्रधानमंत्री Narendra Modi बुधवार को इज़राइल के लिए दो दिवसीय दौरे पर रवाना हुए। यह यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है बल्कि प्रस्तावित क्षेत्रीय “हेक्सागन” गठबंधन को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींच रही..
भारत को इज़राइल की उभरती रणनीतिक संरचना में अहम स्थान मिलने से पाकिस्तान की बेचैनी खुलकर सामने आ गई है। प्रधानमंत्री Narendra Modi बुधवार को इज़राइल के लिए दो दिवसीय दौरे पर रवाना हुए। यह यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है बल्कि प्रस्तावित क्षेत्रीय “हेक्सागन” गठबंधन को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींच रही है, जिसमें भारत को शामिल किया गया है और जिस पर पाकिस्तान ने खुला विरोध दर्ज कराया है।
यह प्रधानमंत्री मोदी की इज़राइल की दूसरी यात्रा है। इससे पहले जुलाई 2017 में उन्होंने ऐतिहासिक दौरा किया था, जो किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री का यहूदी राष्ट्र इज़राइल का पहला दौरा था। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब पश्चिम एशिया तनाव, संघर्ष और बदलते गठबंधनों के दौर से गुजर रहा है।
इस दौरे के केंद्र में इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के साथ भारत के रिश्तों की गहराई है। नेतन्याहू न सिर्फ भारत को एक अहम वैश्विक साझेदार मानते हैं, बल्कि उसे अपनी व्यापक भू-राजनीतिक परिकल्पना जिसे वे “हेक्सागन” कहते हैं, का भी हिस्सा बताते हैं।
नेतन्याहू का “हेक्सागन” विज़न
साप्ताहिक कैबिनेट बैठक की शुरुआत में नेतन्याहू ने एक महत्वाकांक्षी विचार सामने रखा, एक ऐसा आपस में जुड़ा गठबंधन तंत्र, जो कई क्षेत्रों में फैला होगा।
उन्होंने कहा, “मैं कूटनीतिक पहलू से जुड़ी एक बात कहना चाहता हूं। मेरी परिकल्पना में हम एक संपूर्ण प्रणाली बनाएंगे, मूल रूप से मध्य पूर्व के आसपास या उसके भीतर गठबंधनों का एक ‘हेक्सागन’। इसमें भारत, अरब देश, अफ्रीकी देश, भूमध्यसागरीय देश (ग्रीस और साइप्रस) और एशिया के कुछ देश शामिल होंगे, जिनका विवरण मैं फिलहाल नहीं दे रहा हूं। मैं इसे एक संगठित तरीके से प्रस्तुत करूंगा,” जैसा कि Israeli Ministry of Foreign Affairs ने 22 फरवरी को बताया।
नेतन्याहू ने इस ढांचे के पीछे की रणनीतिक सोच भी स्पष्ट की। उन्होंने कहा, “इसका उद्देश्य ऐसे देशों का एक धुरी (एक्सिस) बनाना है, जो वास्तविकताओं, चुनौतियों और लक्ष्यों को लेकर समान दृष्टिकोण रखते हों, कट्टरपंथी धुरियों के खिलाफ। चाहे वह कट्टर शिया धुरी हो, जिस पर हमने कड़ा प्रहार किया है, या उभरती हुई कट्टर सुन्नी धुरी। ये सभी देश एक अलग दृष्टिकोण साझा करते हैं और हमारा सहयोग बड़े परिणाम दे सकता है, साथ ही हमारे भविष्य और मजबूती को सुनिश्चित कर सकता है।”
नेतन्याहू की यह अवधारणा सिर्फ अर्थव्यवस्था या कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सुरक्षा सहयोग और वैचारिक समन्वय पर खास जोर है। यह प्रस्तावित India-Middle East-Europe Economic Corridor (IMEC) से मिलता-जुलता जरूर दिखता है, लेकिन नेतन्याहू इससे कहीं अधिक रणनीतिक ढांचा पेश कर रहे हैं, न कि केवल एक व्यापार मार्ग।
ज़मीनी स्तर पर मोदी की यात्रा का एजेंडा
इज़राइली बयानों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी का कार्यक्रम प्रतीकात्मकता, नीति और सार्वजनिक संदेशों का मिश्रण होगा।
उन्होंने आगे जोड़ा, “मैं AI और क्वांटम इसलिए नहीं कह रहा क्योंकि ये भविष्य हैं, बल्कि इसलिए क्योंकि ये वर्तमान हैं। हम इन क्षेत्रों में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल होना चाहते हैं।”
रक्षा, तकनीक और व्यापार
कूटनीतिक भाषा के पीछे इस यात्रा का असली आधार ठोस रणनीतिक हित हैं, खासतौर पर रक्षा क्षेत्र में।
उसी रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइल ने 2026 में भारत के साथ 8.6 अरब डॉलर के हथियार सौदों को मंजूरी दी है, जिससे वह फ्रांस के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा आपूर्तिकर्ता बन गया है। एक व्यापक रक्षा फ्रेमवर्क समझौता भी चर्चा में है, जो उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम जैसे अब तक सीमित क्षेत्रों को खोल सकता है।
इज़राइली मीडिया आउटलेट CTech by Calcalist के अनुसार, इज़राइल भारत को अपना लेज़र आधारित एयर डिफेंस सिस्टम Iron Beam देने पर भी विचार कर रहा है।
रक्षा के अलावा आर्थिक संबंध भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। वित्त वर्ष 2024–25 में भारत-इज़राइल द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 3.62 अरब डॉलर तक पहुंच गया। साथ ही, प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर दोनों देशों ने प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से पहले बातचीत शुरू कर दी है।
मंगलवार को पहले दौर की वार्ता शुरू हुई, जिसमें दोनों पक्षों के व्यापार और तकनीकी विशेषज्ञों ने कई मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। इनमें वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार, रूल्स ऑफ ओरिजिन, स्वच्छता और पादप-स्वास्थ्य उपाय, तकनीकी बाधाएं, कस्टम प्रक्रियाएं, व्यापार सुविधा और बौद्धिक संपदा अधिकार शामिल हैं।
निजी केमिस्ट्री और राजनीतिक संकेत
नेतन्याहू ने मोदी के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “इस सप्ताह इज़राइल और भारत जो एक वैश्विक शक्ति है, के बीच और मेरे तथा प्रधानमंत्री मोदी के बीच बने विशेष संबंधों की अभिव्यक्ति होगी।”
उन्होंने आगे जोड़ा, “हम व्यक्तिगत मित्र हैं; हम अक्सर फोन पर बात करते हैं और एक-दूसरे से मिलने जाते हैं। मैं भारत गया हूं और मोदी यहां आए हैं।”
फिर उन्होंने 2017 के उस चर्चित क्षण की ओर इशारा किया, जब दोनों नेता भूमध्यसागर के तट पर नंगे पांव टहलते नजर आए थे जिसे कई लोगों ने राजनीतिक ‘ब्रोमांस’ कहा।
नेतन्याहू ने कहा, “हमने साथ में भूमध्यसागर के पानी में कदम रखा था, और तब से भूमध्यसागर, गंगा और जॉर्डन में बहुत पानी बह चुका है—हालांकि जॉर्डन में थोड़ा कम।”
उन्होंने जोर देते हुए कहा, “किसी भी हाल में, एक बात साफ है: इस रिश्ते का ताना-बाना और मजबूत हुआ है, और वे यहां आए हैं ताकि हम सरकारों और देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने से जुड़े कई फैसलों के जरिए इसे और कस सकें।”
क्षेत्रीय तनाव की पृष्ठभूमि
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले की आशंका और प्रस्तावित “हेक्सागन” गठबंधन—जिसे ईरान और उसके क्षेत्रीय नेटवर्क के खिलाफ माना जा रहा है—इस संवेदनशीलता को और बढ़ाते हैं।
भारत यहां संतुलन साधने की कोशिश करता दिखता है। उसके इज़राइल के साथ मजबूत रिश्ते हैं, लेकिन ईरान के साथ भी लंबे समय से संबंध रहे हैं। “हेक्सागन” जैसे प्रस्ताव, जो क्षेत्रीय ध्रुवीकरण को खुलकर दर्शाते हैं, इस संतुलन को और जटिल बना देते हैं।
यह कूटनीतिक रस्साकशी पहले से नजर आने लगी है। यात्रा से कुछ दिन पहले ही भारत ने 100 से अधिक देशों के साथ मिलकर कब्जे वाले वेस्ट बैंक में इज़राइल के विस्तार की निंदा की थी और फिलिस्तीन के लिए दो-राज्य समाधान के समर्थन को दोहराया था।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
“हेक्सागन” पर पाकिस्तान ने कड़ा रुख अपनाया है। पाकिस्तान की सीनेट ने इज़राइल के प्रस्तावित गठबंधन ढांचे की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया और इसे क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया।
यह प्रस्ताव पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की पलवाशा खान ने पेश किया। इसमें इज़राइली नेतृत्व के “उकसाने वाले कदमों और बयानों” की आलोचना की गई, जिनमें गठबंधन बनाने से जुड़ा ताजा बयान भी शामिल है।
प्रस्ताव में फिलिस्तीनी क्षेत्रों में इज़राइल की कार्रवाइयों की भी निंदा की गई और कहा गया कि ये अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर, संयुक्त राष्ट्र महासभा व सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और International Court of Justice की सलाहकार राय की खुली अवहेलना हैं।
इसी बीच पाकिस्तान खाड़ी देशों में भी कूटनीतिक गतिविधियां तेज कर रहा है। प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने कतर यात्रा के दौरान “क्षेत्र और उससे बाहर शांति व स्थिरता” के लिए सहयोग पर जोर दिया। Qatar के अमीर और प्रधानमंत्री से हुई बैठकों में आर्थिक संबंधों के विस्तार के साथ गाजा सहित क्षेत्रीय हालात पर चर्चा हुई।
यह यात्रा अभी क्यों अहम है
यह दौरा केवल भारत-इज़राइल संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रतीकात्मक महत्व भी है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले और उसके बाद गाजा युद्ध के बाद, ग्लोबल साउथ के बहुत कम नेता इज़राइल पहुंचे हैं।
भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यह यात्रा “दोनों देशों के बीच गहरी और दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी की पुन: पुष्टि करेगी और साझा चुनौतियों की समीक्षा के साथ-साथ दो मजबूत लोकतंत्रों के बीच सुदृढ़ साझेदारी के साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगी।”
प्रधानमंत्री मोदी ऐसे क्षेत्र में कदम रख रहे हैं, जहां गठबंधन वास्तविक समय में फिर से गढ़े जा रहे हैं—और नेतन्याहू खुले तौर पर नए गठबंधनों की रूपरेखा खींच रहे हैं।
What's Your Reaction?