ज़ोहो के श्रीधर वेम्बू का बदसूरत तलाक़ विवाद और 15,000 करोड़ रुपये का बॉन्ड..!

ज़ोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बू के लिए साल 2025 यादगार रहा। ‘स्वदेशी’ अभियान के तहत कई केंद्रीय मंत्रियों ने देसी टेक कंपनी ज़ोहो और उसके सॉफ्टवेयर उत्पादों की खुलकर तारीफ की, जिससे ज़ोहो और वेम्बू लगातार सुर्खियों में रहे। लेकिन इसी दौरान वेम्बू कैलिफ़ोर्निया में अपनी अमेरिका-स्थित पूर्व पत्नी के साथ एक कड़वे तलाक़ विवाद में भी उलझे..

ज़ोहो के श्रीधर वेम्बू का बदसूरत तलाक़ विवाद और 15,000 करोड़ रुपये का बॉन्ड..!
श्रीधर वेम्बू अपनी बहन राधा के साथ
10-01-2026 - 10:26 AM
10-01-2026 - 11:28 AM

ज़ोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बू के लिए साल 2025 यादगार रहा। ‘स्वदेशी’ अभियान के तहत कई केंद्रीय मंत्रियों ने देसी टेक कंपनी ज़ोहो और उसके सॉफ्टवेयर उत्पादों की खुलकर तारीफ की, जिससे ज़ोहो और वेम्बू लगातार सुर्खियों में रहे। लेकिन इसी दौरान वेम्बू कैलिफ़ोर्निया में अपनी अमेरिका-स्थित पूर्व पत्नी के साथ एक कड़वे तलाक़ विवाद में भी उलझे रहे। अब सामने आया है कि अमेरिका की एक अदालत ने इस चल रहे तलाक़ मामले में वेम्बू को 1.7 अरब डॉलर (करीब 15,278 करोड़ रुपये) का बॉन्ड जमा करने का निर्देश दिया है। यह जानकारी द न्यूज़ मिनट की एक रिपोर्ट में दी गई है।

इस घटनाक्रम ने वेम्बू और उनकी अलग रह रही पत्नी प्रमिला श्रीनिवासन के बीच चल रहे हाई-प्रोफाइल तलाक़ विवाद को फिर से केंद्र में ला दिया है। इस मामले में बच्चों की कस्टडी और ज़ोहो में हिस्सेदारी को लेकर गंभीर विवाद शामिल हैं। विवाद का मूल मुद्दा उन वैवाहिक संपत्तियों के बंटवारे से जुड़ा है, जो उस समय अर्जित की गई थीं जब दंपति कैलिफ़ोर्निया में रह रहे थे। कैलिफ़ोर्निया कानून के तहत, विवाह के दौरान अर्जित संपत्ति को संयुक्त संपत्ति माना जाता है, चाहे वह संपत्ति दुनिया के किसी भी हिस्से में स्थित हो।

तलाक़ विवाद की जटिलताओं में जाने से पहले, वेम्बू की पृष्ठभूमि पर एक संक्षिप्त नज़र डालना ज़रूरी है।

हाई-प्रोफाइल तलाक़ मामला

आईआईटी-मद्रास से स्नातक होने के बाद, श्रीधर वेम्बू 1989 में अमेरिका गए और प्रिंसटन विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी करने लगे। चार साल बाद, 1993 में उन्होंने शिक्षाविद और उद्यमी प्रमिला श्रीनिवासन से विवाह किया। 1996 में वेम्बू ने अपने दो भाइयों और मित्र टोनी थॉमस के साथ मिलकर एक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कंपनी एडवेंटनैट की स्थापना की, जिसे 2009 में ज़ोहो कॉर्पोरेशन नाम दिया गया।

वेम्बू और श्रीनिवासन लगभग तीन दशकों तक कैलिफ़ोर्निया में रहे। दंपति का एक 26 वर्षीय बेटा है, जो ऑटिज़्म का से पीड़ित है। वर्ष 2019 में वेम्बू भारत लौट आए और तमिलनाडु के अपने पैतृक गांव माथलमपराई से ज़ोहो का संचालन शुरू किया। इसके दो साल बाद, 2021 में उन्होंने तलाक़ की प्रक्रिया शुरू की।

हालांकि, अदालत में दायर दस्तावेज़ों में श्रीनिवासन ने आरोप लगाया कि भारत लौटते समय वेम्बू ने उन्हें और विशेष ज़रूरतों वाले उनके बेटे को “छोड़ दिया”।

श्रीनिवासन के बारे में बहुत अधिक जानकारी सार्वजनिक नहीं है, लेकिन फोर्ब्स की 2023 की एक रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती वर्षों में उन्होंने परिवार को संभालने और सहयोग देने में अहम भूमिका निभाई। वर्ष 2010 में उन्होंने मेडिकलमाइन नाम की कंपनी की स्थापना की। वह अपने बेटे की देखभाल भी करती हैं। 2019 में उन्होंने ऑटिज़्म से पीड़ित लोगों के इलाज और शोध के समर्थन के लिए एक गैर-लाभकारी संस्था द ब्रेन फ़ाउंडेशन  की शुरुआत की।

श्रीनिवासन के करीबी एक सूत्र के अनुसार, नवंबर 2020 में वेम्बू ने उन्हें व्हाट्सऐप पर तलाक़ की इच्छा जताई थी और अगस्त 2021 में औपचारिक रूप से तलाक़ के कागज़ात दाख़िल किए थे।

पत्नी द्वारा लगाए गए आरोप

श्रीनिवासन का एक बड़ा आरोप यह है कि वेम्बू ने उनकी जानकारी या सहमति के बिना ज़ोहो की हिस्सेदारी और बौद्धिक संपदा (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी) को जटिल लेन-देन के ज़रिये भारत स्थानांतरित कर दिया। उनका दावा है कि ज़ोहो के संस्थापक के रूप में वेम्बू के कार्यकाल के दौरान अर्जित संपत्ति में उनका भी कानूनी हिस्सा बनता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि वेम्बू ने अंततः कंपनी के अधिकांश शेयर अपनी बहन राधा वेम्बू और भाई सेकर को सौंप दिए। वर्तमान में राधा वेम्बू के पास कंपनी की अनुमानित 47.8% हिस्सेदारी है, जबकि वेम्बू टेक्नोलॉजीज़ के संस्थापक सेकर के पास 35.2% हिस्सेदारी है। खुद श्रीधर वेम्बू के पास सिर्फ़ 5% हिस्सेदारी बची है, जिसकी कीमत करीब 22.5 करोड़ डॉलर आंकी गई है।

फोर्ब्स  के अनुसार, अदालत में दाख़िल एक बयान में श्रीनिवासन ने कहा, “मेरे पति ने न केवल मुझे और हमारे बेटे को छोड़ दिया… बल्कि उन्होंने हमारी सबसे मूल्यवान सामुदायिक संपत्ति को बिना किसी नकद भुगतान या अन्य प्रतिफल के अपने परिवार के सदस्यों को फर्जी तरीके से स्थानांतरित या बेचने का फैसला किया, और न तो मुझे इसकी जानकारी दी और न ही मेरी अनुमति ली।”
उनका कहना था कि यह कैलिफ़ोर्निया कानून का उल्लंघन है।

वेम्बू ने इन सभी आरोपों को “पूरी तरह काल्पनिक” बताते हुए खारिज किया है और कहा है कि उन्होंने अपनी पत्नी और बेटे को आर्थिक रूप से पूरा समर्थन दिया है।

1.7 अरब डॉलर के बॉन्ड का आदेश

नवंबर 2024 में श्रीनिवासन ने कैलिफ़ोर्निया की सुपीरियर कोर्ट में एक एक्स पार्टी एप्लिकेशन दाख़िल की। जनवरी 2025 में दिए गए आदेश में अदालत ने वेम्बू को 1.7 अरब डॉलर का बॉन्ड जमा करने का निर्देश दिया। अदालत ने माना कि यह कदम “अभूतपूर्व” है, लेकिन उसने कहा कि श्रीनिवासन के वैवाहिक संपत्ति पर संभावित अधिकारों को नुकसान से बचाने के लिए यह ज़रूरी है।

द न्यूज़ मिनट की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने टिप्पणी की कि ज़ोहो के सह-संस्थापक कुछ वित्तीय लेन-देन को लेकर पारदर्शी नहीं रहे और उन्होंने “कानून की परवाह किए बिना” कार्य किया।

वेम्बू के वकील की प्रतिक्रिया

मामले के सुर्खियों में आने के बाद, वेम्बू के वकील क्रिस्टोफर सी. मेल्चर ने कहा कि यह आदेश उनकी पत्नी की ओर से दायर एक आपातकालीन आवेदन पर करीब एक साल पहले दिया गया था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबे पोस्ट में उन्होंने दावा किया कि श्रीनिवासन ने वेम्बू के खिलाफ़ बेहद झूठे आरोप लगाए और कैलिफ़ोर्निया के जज को उनके वकील ने “पूरी तरह गुमराह” किया।

मेल्चर ने कहा, “श्रीधर ने अपनी पत्नी को ZCPL में अपने शेयरों का 50% देने की पेशकश की थी, लेकिन आज तक उन्होंने उन शेयरों को स्वीकार नहीं किया। इसके बजाय, वह दावा करती रही हैं कि श्रीधर तलाक़ में उन्हें धोखा देने की कोशिश कर रहे हैं। यह बात तर्कसंगत नहीं है, क्योंकि वह अभी अपना आधा हिस्सा ले सकती हैं और श्रीधर पहले ही पारिवारिक घर में अपनी हिस्सेदारी उन्हें सौंप चुके हैं।”

उन्होंने इसे श्रीनिवासन की ओर से समय और संसाधनों की बर्बादी बताया और कहा कि वह वेम्बू को बदनाम करने के प्रयास में “कुछ भी हासिल नहीं कर पाईं”।

मेल्चर ने आगे कहा, “इस प्रक्रिया में लाखों डॉलर की क़ानूनी फ़ीस खर्च हो चुकी है। वैसे भी इसका गुज़ारा भत्ते (एलिमनी) से कोई लेना-देना नहीं है क्योंकि पत्नी ने अब तक किसी तरह की आर्थिक सहायता का आदेश भी नहीं मांगा है। 1.7 अरब डॉलर के बॉन्ड का आदेश अमान्य है,

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।