चेन्नई में 'राष्ट्र-विरोधी' गतिविधियों के आरोप में तीन छात्र संस्थान से निष्कासित
राजीव गांधी राष्ट्रीय युवा विकास संस्थान (RGNIYD), जो केंद्रीय युवा कार्य और खेल मंत्रालय के अधीन श्रीपेरंबदूर में संचालित होता है, ने तीन छात्रों को कथित रूप से 'राष्ट्र-विरोधी' सामग्री से छात्रावास की दीवारें खराब करने के आरोप में निष्कासित कर दिया..
चेन्नई। राजीव गांधी राष्ट्रीय युवा विकास संस्थान (RGNIYD), जो केंद्रीय युवा कार्य और खेल मंत्रालय के अधीन श्रीपेरंबदूर में संचालित होता है, ने तीन छात्रों को कथित रूप से 'राष्ट्र-विरोधी' सामग्री से छात्रावास की दीवारें खराब करने के आरोप में निष्कासित कर दिया है।
निष्कासित छात्रों में आसलम एस, सईद एम ए और नहाल इब्नु अब्दुल्लैस शामिल हैं, जो मास्टर ऑफ सोशल वर्क (MSW) के दूसरे और अंतिम वर्ष के छात्र थे। तीनों को सोमवार को अंतिम परीक्षा में शामिल होना था, लेकिन रविवार को ही उन्हें निष्कासन पत्र थमा दिया गया और छात्रावास से निकाल दिया गया।
संस्थान के निदेशक सुब्रत हाज़रा और अनुशासन समिति के अध्यक्ष एस. सुरेश से प्रतिक्रिया के प्रयास सोमवार रात तक असफल रहे। फोन कॉल्स और मैसेज का कोई जवाब नहीं मिला।
छात्रों का आरोप: संस्थान ने 'सोची-समझी साज़िश' की
छात्रों का दावा है कि उन्हें जानबूझकर परीक्षा से वंचित करने के लिए निशाना बनाया गया।
नहाल ने बताया, “हमने हाल ही में एक वरिष्ठ प्रशासकीय कर्मचारी के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर इस्तीफे की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था। तभी से हमें टारगेट किया जा रहा है।”
नहाल के मुताबिक, 22 मई को कुछ छात्रावास अधिकारियों ने हॉस्टल की दीवार पर “फ्री पालेस्टाइन” और “जय भीम” जैसे नारे देखे। इसके बाद हॉस्टल की तलाशी ली गई, लेकिन यह तलाशी सिर्फ एक फ्लोर और कुछ कमरों तक सीमित रही।
'बीयर की बोतलें और फैब्रिक रंग' मिलने पर सख्त कार्रवाई
नहाल ने स्वीकार किया कि उनके कमरे में कुछ खाली बीयर की बोतलें और कपड़े रंगने वाले रंग पाए गए, लेकिन उन्होंने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि बिना ठोस सबूतों के ही उनके खिलाफ कार्रवाई कर दी गई।
तीनों छात्रों को सीधे निष्कासित कर दिया गया, जबकि कमरे में मौजूद अन्य चार छात्रों को सिर्फ हॉस्टल से निकाला गया, लेकिन उन्हें परीक्षा देने की अनुमति दी गई।
निष्कासन पत्र में कहा गया है कि संबंधित अधिकारियों ने इसे “छात्रावास की संपत्ति को राष्ट्र-विरोधी सामग्री से खराब करने जैसा गंभीर दुराचार” माना और उन्हें अनुशासन समिति द्वारा दोषी ठहराया गया।
“जय भीम और फ्री पलेस्टाइन राष्ट्र-विरोधी कैसे?” – छात्र
छात्रों ने पूरी तरह से इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि वे इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर करने पर विचार कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “राष्ट्र-विरोधी जैसे शब्द हमारे भविष्य को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाते हैं।” नहाल ने कहा, “पूरे जांच के दौरान मुझसे इन नारों को लेकर कोई सवाल नहीं पूछा गया। मुझे समझ नहीं आता कि ‘जय भीम’ और ‘फ्री पालेस्टाइन’ को राष्ट्रविरोधी कैसे कहा जा सकता है।”
छात्रों की मांग: निष्पक्ष जांच और दोबारा परीक्षा
तीनों छात्रों ने एक बयान में कहा कि उनके खिलाफ कोई हिंसा, अव्यवस्था या गैरकानूनी गतिविधि का कोई रिकॉर्ड नहीं है जो इस तरह के कठोर कदम को सही ठहराए।
उन्होंने आरोप लगाया कि अनुशासन प्रक्रिया पक्षपाती और अन्यायपूर्ण रही है और यह पूरी कार्रवाई प्रशासनिक बदले की भावना से प्रेरित थी। छात्रों ने मांग की है कि उनके लिए पुनः परीक्षा का आयोजन किया जाए।
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