ट्रंप ने पाकिस्तान समेत कई पश्चिम एशियाई देशों से कहा, अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर कर इज़राइल को मान्यता दें

डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को पाकिस्तान समेत कई पश्चिम एशियाई देशों से अब्राहम समझौते (Abraham Accords) में शामिल होकर औपचारिक रूप से इज़राइल को मान्यता देने की अपील की। यह प्रस्ताव अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को समाप्त करने के व्यापक कूटनीतिक प्रयास..

ट्रंप ने पाकिस्तान समेत कई पश्चिम एशियाई देशों से कहा, अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर कर इज़राइल को मान्यता दें
26-05-2026 - 10:39 AM

डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को पाकिस्तान समेत कई पश्चिम एशियाई देशों से अब्राहम समझौते (Abraham Accords) में शामिल होकर औपचारिक रूप से इज़राइल को मान्यता देने की अपील की। यह प्रस्ताव अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को समाप्त करने के व्यापक कूटनीतिक प्रयास का हिस्सा बताया जा रहा है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर किए गए पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि सऊदी अरब, कतर, तुर्की, जॉर्डन और पाकिस्तान जैसे देशों के लिए इस समझौते में शामिल होना “अनिवार्य” होना चाहिए। हालांकि पाकिस्तान जैसे देशों में इस प्रस्ताव को लेकर विरोध की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि पाकिस्तान लंबे समय से इज़राइल के साथ संबंध सामान्य करने का विरोध करता रहा है।

ट्रंप की यह टिप्पणी सप्ताहांत में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन और बहरीन के नेताओं के साथ हुई बैठकों के बाद आई।

उन्होंने दावा किया कि अब्राहम समझौते में अधिक देशों की भागीदारी से “पिछले 5,000 वर्षों में पहली बार मध्य पूर्व में वास्तविक शक्ति, मजबूती और शांति स्थापित हो सकती है।”

ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में ईरान भी इस समझौते का हिस्सा बन सकता है।

उन्होंने लिखा, “संभव है कि एक-दो देशों के पास इसमें शामिल न होने के अपने कारण हों और उसे स्वीकार किया जाएगा। लेकिन अधिकांश देशों को इस समझौते के लिए तैयार, इच्छुक और सक्षम होना चाहिए, ताकि ईरान के साथ यह समझौता पहले से कहीं अधिक ऐतिहासिक बन सके।”

क्या है अब्राहम समझौता?

अब्राहम समझौता वर्ष 2020 में ट्रंप की मध्यस्थता में हुआ था। इसके तहत इज़राइल और संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, सूडान तथा मोरक्को के बीच संबंध सामान्य किए गए थे। इस समझौते के बाद राजनयिक संबंध, व्यापार, निवेश और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा मिला।

इज़राइल पहले ही मिस्र और जॉर्डन के साथ क्रमशः 1979 और 1994 में शांति समझौते कर चुका है।

सऊदी-इज़राइल संबंध अमेरिका की प्राथमिकता

सऊदी अरब द्वारा इज़राइल को मान्यता दिलाना लंबे समय से अमेरिका का एक प्रमुख रणनीतिक लक्ष्य रहा है।

पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में वॉशिंगटन और रियाद के बीच एक व्यापक समझौते पर चर्चा हुई थी। इसमें सऊदी अरब को सुरक्षा गारंटी देने, इज़राइल के साथ संबंध सामान्य करने और फिलिस्तीनी राष्ट्र की दिशा में रास्ता तैयार करने की योजना शामिल थी।

हालांकि 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमलों के बाद शुरू हुए इज़राइल-हमास युद्ध के चलते यह प्रक्रिया ठप पड़ गई।

पाकिस्तान ने दोहराया पुराना रुख

पाकिस्तान लगातार कहता रहा है कि वह तभी इज़राइल को मान्यता देगा जब एक स्वतंत्र और व्यवहारिक फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना होगी।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने जनवरी में कहा था, “पाकिस्तान के लिए कुछ मानक तय हैं। उनमें सबसे महत्वपूर्ण यह है कि एक व्यवहारिक और निरंतर फिलिस्तीनी राज्य बने, जिसकी राजधानी अल-कुद्स अल-शरीफ यानी यरुशलम हो।”

विशेषज्ञों ने जताई आशंका

ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के पश्चिम एशिया मामलों के विशेषज्ञ कबीर तनेजा ने कहा कि ट्रंप की योजना के सामने बड़े राजनीतिक और रणनीतिक अवरोध हैं।

उन्होंने कहा, “ट्रंप मध्य पूर्व के लिए किसी बड़े समाधान की तलाश में हैं। उन्हें लगता है कि वे दुनिया के कई संघर्ष सुलझा चुके हैं, लेकिन उनके नजरिए में यह सबसे बड़ा संघर्ष है। इसलिए वे अरब देशों पर अब्राहम समझौते में शामिल होने का दबाव बना रहे हैं।”

तनेजा के मुताबिक पाकिस्तान और अधिकांश अरब देश, जिन्होंने अब तक इस समझौते से दूरी बनाए रखी है, इसमें शामिल होने की संभावना कम है।

उन्होंने कहा, “जो कुछ देश पहले ही इसमें शामिल हो चुके हैं, उनके अलावा अन्य अरब देश इससे सहमत नहीं होंगे। पाकिस्तान जैसे इस्लामिक देश भी इसमें शामिल नहीं होंगे, क्योंकि ईरान पहले ही कह चुका है कि जो भी देश अब्राहम समझौते का हिस्सा बनेगा, उसे दुश्मन माना जाएगा।”

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।