ईरान पर कार्रवाई भारत के हित में थी: इजराइल के राजदूत रयूवेन अज़ार
भारत में इजराइल के राजदूत Reuven Azar ने कहा है कि ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई केवल इजराइल और अमेरिका के लिए ही नहीं बल्कि भारत सहित कई देशों के हित में भी जरूरी..
नयी दिल्ली। भारत में इजराइल के राजदूत Reuven Azar ने कहा है कि ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई केवल इजराइल और अमेरिका के लिए ही नहीं बल्कि भारत सहित कई देशों के हित में भी जरूरी थी। उनका कहना है कि यदि समय रहते यह कदम नहीं उठाया जाता, तो आने वाले वर्षों में Iran की गतिविधियां कई देशों के दीर्घकालिक हितों को प्रभावित कर सकती थीं।
नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत में अज़ार ने कहा कि ईरान 2027 तक इजराइल पर बड़े हमले की योजना बना रहा था और साथ ही खाड़ी और अरब देशों की मौजूदा व्यवस्था को अस्थिर कर क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा था।
भारत पर पड़ सकता था बड़ा असर
अज़ार के अनुसार, यदि ईरान की यह योजना सफल होती, तो इसका असर खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीयों पर पड़ सकता था। इसके अलावा भारत के खाड़ी और पश्चिम एशियाई देशों के साथ मजबूत आर्थिक संबंधों पर भी गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका थी।
उन्होंने कहा, “कल्पना कीजिए कि यदि ईरान के पास परमाणु हथियारों का भंडार होता तो वह क्या कर सकता था। हमने देखा है कि उसने अपने पड़ोसी देशों पर किस तरह हमले किए हैं। यदि United States और Israel ने अभी कार्रवाई नहीं की होती तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती थी।”
कूटनीति के लिए दरवाजा खुला रहना चाहिए
इजराइली राजदूत ने कहा कि सैन्य कार्रवाई के बावजूद कूटनीति के लिए रास्ता खुला रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दिनों में अमेरिका और क्षेत्र के कई देशों के साथ लगातार कूटनीतिक संवाद जारी है।
इजराइल के तीन मुख्य लक्ष्य
युद्ध के दौरान इजराइल के लक्ष्यों में बदलाव के सवाल पर अज़ार ने कहा कि इजराइल अपने तीन घोषित उद्देश्यों पर ही काम कर रहा है।
- ईरान के परमाणु खतरे को निष्क्रिय करना
- बैलिस्टिक मिसाइल खतरे को खत्म करना
- ईरान में दमनकारी ताकतों की क्षमता कम कर वहां के लोगों को बेहतर भविष्य का अवसर देना
उन्होंने कहा कि इजराइल का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध समाप्त होने के बाद ईरानी शासन दोबारा ऐसी योजनाओं को लागू करने की स्थिति में न रहे।
वैश्विक व्यापार पर भी असर
अज़ार के मुताबिक पश्चिम एशिया में स्थिरता केवल क्षेत्रीय देशों के लिए ही नहीं, बल्कि उन देशों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो इस क्षेत्र के साथ व्यापार करते हैं। इसलिए वर्तमान सैन्य कार्रवाई को उन्होंने वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण बताया।
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