पाक मंत्री इशाक डार का ने मार्को रुबियो से बातचीत का ज़िक्र करते हुए कहा, “भारत तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं मानता..”
पाकिस्तान के विदेश मंत्री और उपप्रधानमंत्री इशाक डार ने कहा है कि अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने उन्हें बताया था कि मई में हुए सैन्य संघर्ष के दौरान भारत ने किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को अस्वीकार कर दिया था क्योंकि यह भारत-पाक के बीच द्विपक्षीय मामला..
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के विदेश मंत्री और उपप्रधानमंत्री इशाक डार ने कहा है कि अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने उन्हें बताया था कि मई में हुए सैन्य संघर्ष के दौरान भारत ने किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को अस्वीकार कर दिया था क्योंकि यह भारत-पाक के बीच द्विपक्षीय मामला है।
अल जज़ीरा को दिए साक्षात्कार में डार ने कहा कि जब उन्होंने संघर्ष के समय रुबियो से तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का मुद्दा उठाया, तो अमेरिकी अधिकारी ने उन्हें साफ कहा कि नई दिल्ली ने इसे ठुकरा दिया है, क्योंकि यह द्विपक्षीय मामला है।
डार ने कहा, “हमें (तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से) कोई दिक्कत नहीं... लेकिन भारत लगातार कहता रहा है कि यह द्विपक्षीय मुद्दा है। हमें भी द्विपक्षीय में कोई आपत्ति नहीं। जब हम 25 जुलाई को वॉशिंगटन में विदेश मंत्री रुबियो से मिले तो मैंने उनसे पूछा कि बातचीत का क्या हुआ? उन्होंने कहा कि भारत कहता है यह द्विपक्षीय मामला है।”
उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान बातचीत के लिए तैयार है लेकिन “भीख” नहीं मांगेगा। उन्होंने कहा, “हम किसी से भीख नहीं मांग रहे। अगर कोई देश संवाद चाहता है तो हमें खुशी होगी, हम स्वागत करेंगे। हम शांति प्रिय देश हैं और मानते हैं कि बातचीत ही आगे का रास्ता है। लेकिन यह दो तरफ़ा मामला है। जब तक भारत बातचीत नहीं चाहता, हम इसे मजबूर नहीं कर सकते।”
डार की टिप्पणी भारत के उस रुख़ को मज़बूती देती है कि उसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कभी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की थी। दोनों देशों के बीच 10 मई को हुई संघर्ष विराम (सीज़फ़ायर) सहमति भी सीधे सैन्य वार्ता के बाद हुई थी।
पाकिस्तानी मंत्रियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे का सहारा लिया था कि संघर्ष विराम समझौता अमेरिकी मध्यस्थता से हुआ। लेकिन भारत ने इसे सख़्ती से खारिज किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जून में ट्रंप से फ़ोन पर साफ कहा था कि संघर्ष विराम का फ़ैसला दोनों देशों की सीधी बातचीत से हुआ था।
मोदी ने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि पाकिस्तान से सीधी बातचीत, यदि होगी भी, तो सिर्फ़ पाक अधिकृत कश्मीर या आतंकवाद पर होगी। उन्होंने दोहराया था कि “ख़ून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते”, यानी जब तक इस्लामाबाद आतंकवादी संगठनों को पनाह देता रहेगा, तब तक नई दिल्ली उससे संवाद नहीं करेगी।
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