‘विकसित भारत में आपका स्वागत है…’ उमर ख़ालिद को जमानत न मिलने पर कांग्रेस के प्रियांक खड़गे का तंज
सुप्रीम कोर्ट द्वारा उमर ख़ालिद को जमानत देने से इनकार किए जाने के बाद, कांग्रेस नेता और कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे ने सोमवार को देश की न्यायिक व्यवस्था पर तंज कसते हुए कहा कि “विकसित भारत” में कथित बलात्कारियों को जमानत मिल जाती है लेकिन अपनी आवाज़ उठाने वालों..
नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा उमर ख़ालिद को जमानत देने से इनकार किए जाने के बाद, कांग्रेस नेता और कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे ने सोमवार को देश की न्यायिक व्यवस्था पर तंज कसते हुए कहा कि “विकसित भारत” में कथित बलात्कारियों को जमानत मिल जाती है, लेकिन अपनी आवाज़ उठाने वालों को नहीं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर किए गए एक पोस्ट में प्रियांक खड़गे ने लिखा कि कुलदीप सिंह सेंगर, आसाराम बापू, गुरमीत राम रहीम सिंह और बृजभूषण शरण सिंह जैसे लोगों को जमानत दी गई है, जबकि ये सभी अलग-अलग बलात्कार मामलों के आरोपी हैं।
इसके विपरीत, प्रियांक खड़गे ने कहा कि उमर ख़ालिद, सोनम वांगचुक, सागर घोरखे और रमेश गाइखोर को जमानत नहीं दी गई है। उनके अनुसार, ये सभी लोग सरकार के खिलाफ “अपनी आवाज़ उठाने” के कारण जेल में हैं।
इस बीच, बीजेपी प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने उमर ख़ालिद और शरजील इमाम को जमानत न मिलने पर कांग्रेस पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, “उमर ख़ालिद और शरजील इमाम को न सिर्फ कांग्रेस और उसके इकोसिस्टम से सहानुभूति मिल रही थी बल्कि विदेशों से भी पत्र आ रहे थे। जमानत तो खारिज हुई ही है, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि आतंकवाद और दिल्ली को जलाने जैसे आरोप प्रथम दृष्टया सही प्रतीत होते हैं।”
बीजेपी के एक अन्य प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी इस फैसले को कांग्रेस और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के चेहरे पर करारा तमाचा बताया। उन्होंने कहा, “मुस्लिम लीग–माओवादी कांग्रेस द्वारा समर्थित देशविरोधी टुकड़े-टुकड़े गैंग के उमर ख़ालिद और शरजील इमाम की जमानत खारिज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है, ‘सभी आरोपियों को समान गुणात्मक आधार पर नहीं रखा जा सकता।’ यह राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के लिए भी बड़ा झटका है, जो इस ‘टुकड़े-टुकड़े लॉबी’ के साथ खड़ी रही।”
यह पूरा मामला उस फैसले के बाद सामने आया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की कथित बड़ी साजिश से जुड़े मामले में उमर ख़ालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया।
हालांकि, अदालत ने गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दे दी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि उमर ख़ालिद और शरजील इमाम अभियोजन और साक्ष्यों—दोनों के लिहाज़ से “गुणात्मक रूप से अलग स्थिति” में हैं। अदालत ने यह भी कहा कि कथित अपराधों में उनकी भूमिका “केंद्रीय” रही है। इन दोनों के मामले में लंबी अवधि से जारी हिरासत, न तो संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करती है और न ही संबंधित कानूनों के तहत लगाए गए वैधानिक प्रतिबंधों को निष्प्रभावी करती है।
उमर ख़ालिद, शरजील इमाम और अन्य आरोपियों को जनवरी 2020 में फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों के मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की कठोर धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया था।
गौरतलब है कि यह हिंसा नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी, जिसमें 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।
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