वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर क्या हो रहा है? ध्वस्तीकरण विवाद की पूरी कहानी

वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर चल रहे मणिकर्णिका तीर्थ कॉरिडोर विकास परियोजना के तहत एक मढ़ी (ऊंचा चबूतरा/प्लेटफॉर्म) हटाए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है।

वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर क्या हो रहा है? ध्वस्तीकरण विवाद की पूरी कहानी
19-01-2026 - 10:06 PM
22-04-2026 - 05:53 PM

वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर चल रहे मणिकर्णिका तीर्थ कॉरिडोर विकास परियोजना के तहत एक मढ़ी (ऊंचा चबूतरा/प्लेटफॉर्म) हटाए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। इसके बाद मंदिर और मूर्तियों को तोड़े जाने के आरोप लगाए गए, जो इससे पहले काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के काम के दौरान भी सामने आए थे।

सोशल मीडिया पर साइट पर काम कर रहे बुलडोज़र की तस्वीरें वायरल होने के बाद यह विवाद और गहरा गया। कुछ तस्वीरों में ढहाई गई संरचना के पास मूर्तियां पड़ी दिखीं, जिसके बाद आरोप लगाए गए कि मणिकर्णिका कॉरिडोर के लिए रास्ता बनाने के नाम पर प्राचीन मंदिरों और पवित्र मूर्तियों को नष्ट किया जा रहा है।

राजनीतिक माहौल गरमाने के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं परियोजना स्थल कार्यालय पहुंचे और मणिकर्णिका घाट पर विकसित की जा रही दाह संस्कार अवसंरचना का निरीक्षण किया।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय सहित विपक्षी नेताओं ने इस कार्रवाई को सनातन परंपराओं और काशी की विरासत पर हमला बताया। उनका आरोप था कि विकास के नाम पर सरकार शहर के मूल आध्यात्मिक स्वरूप को नष्ट कर रही है।

इन आरोपों को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मंदिर या मूर्ति तोड़े जाने के दावे पूरी तरह झूठे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल कई तस्वीरें भ्रामक हैं या फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाई गई हैं।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा, “किसी भी मंदिर या मूर्ति को नहीं तोड़ा गया है। जानबूझकर गलत सूचना फैलाई जा रही है।”

प्रशासन क्या कहता है

जिला प्रशासन के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान सिर्फ एक मढ़ी को हटाया गया है। अधिकारियों ने माना कि इस प्रक्रिया में उस संरचना पर रखी कुछ मूर्तियां नीचे गिरीं, लेकिन किसी भी मूर्ति को नुकसान नहीं पहुंचा

वाराणसी के जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि सभी मूर्तियों को सुरक्षित तरीके से संरक्षित कर पुरातत्व विभाग (Archaeology Department) के कार्यालय में रख दिया गया है।
उन्होंने कहा, “मणिकर्णिका तीर्थ का पूरा विकास कार्य पूरा होने के बाद इन मूर्तियों को पूरे सम्मान के साथ फिर से स्थापित किया जाएगा।”

वाराणसी के मेयर अशोक तिवारी ने भी प्रशासन के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि घाट पर किसी भी मंदिर संरचना को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है

मणिकर्णिका घाट की ज़मीनी हकीकत

स्थल के निरीक्षण से पता चलता है कि मणिकर्णिका घाट के प्रमुख मंदिर—मसान मंदिर, तारकेश्वर मंदिर और रत्नेश्वर मंदिरपूरी तरह सुरक्षित और यथावत हैं। हालांकि, एक मढ़ी और घाट के किनारे बनी कुछ पुरानी सहायक संरचनाएं पुनर्विकास के तहत हटाई गई हैं।

घाट के कुछ पुजारियों ने कहा कि मढ़ी कोई मंदिर नहीं थी, लेकिन उन्होंने भारी मशीनरी के इस्तेमाल पर असंतोष जताया। उनका तर्क है कि वहां मूर्तियां स्थापित थीं, इसलिए लोगों की धार्मिक आस्था उस स्थान से जुड़ी हुई थी।

पुजारी निमिष द्विवेदी और दीपक आचार्य ने कहा, “हमें मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन विरासत को ज़्यादा संवेदनशीलता से संभाला जाना चाहिए था। बुलडोज़र के इस्तेमाल से अनावश्यक नुकसान हुआ।”

नया मणिकर्णिका तीर्थ क्यों बनाया जा रहा है

पुनर्विकास योजना की शुरुआत लगभग 3,000 वर्ग मीटर क्षेत्र से हो रही है, जिसे आगे बढ़ाकर 39,350 वर्ग मीटर के विशाल प्लेटफॉर्म में बदला जाएगा। इसके पूरा होने पर यह मणिकर्णिका घाट पर सबसे बड़ा समर्पित दाह संस्कार परिसर होगा।

चार चरणों में पूरा होने वाले इस प्रोजेक्ट में एक साथ 19 चिताओं पर दाह संस्कार की सुविधा होगी और साथ ही कई सार्वजनिक उपयोग की सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।

यह परियोजना तब शुरू की गई जब मणिकर्णिका के डोम राजा विश्वनाथ चौधरी ने काशी कॉरिडोर के बाद घाट के आधुनिकीकरण की मांग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की। उन्होंने बताया था कि घाट पर भीड़भाड़, संकरी गलियां, खराब स्वच्छता व्यवस्था और शोकाकुल लोगों के लिए जगह की भारी कमी है।
बरसात के मौसम में हालात और भी खराब हो जाते हैं, जब दाह संस्कार घाट की गलियों तक फैल जाते हैं और राख व धुआं आसपास के घरों में चला जाता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने 2023 में मणिकर्णिका तीर्थ परियोजना की आधारशिला रखी थी। इस परियोजना को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के SIR फंड से वित्तपोषित किया जा रहा है और इसे रूप फाउंडेशन द्वारा लागू

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।