गौर से देखे आप..अनपढ़ बताकर जिन पर कीचड़ उछालकर अपमानित कर रही है, उन पीएम नरेंद्र दामोदर दास मोदी की सार्वजनिक हैं ये डिग्रियां..!
<p><em>आम आदमी पार्टी इन दिनों बौखलायी हुई है। कारण है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री दिखाने से जुड़े आदेश को गुजरात उच्च न्यायालय ने ना केवल खारिज कर दिया बल्कि आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी ठोका। पढ़ाई की जिन डिग्रियों को दिखाने की बात आम आदमी पार्टी कर रही है, वे सार्वजनिक हैं और इंटरनेट पर सार्वजनिक भी हैं। आम आदमी पार्टी को भी उन डिग्रियों को गौर से देख लेना चाहिए। ये डिग्रियां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वर्ष 2016 में भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष और वर्तमान गृहमंत्री अमित शाह के साथ तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सार्वजनिक की थीं।</em></p>
यह भी उल्लेखनीय है कि जब आम आदमी पार्टी ने पीएम मोदी की डिग्रियों को फर्जी बताकर उन्हें फिर से सार्वजनिक करने की बात की तो दिल्ली विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार तरुण दास ने कहा कि पीएम मोदी की दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक करने वाली डिग्री बिल्कुल सही है। अलबत्ता उसमें टाइपिंग की गलती के कारण डिग्री का वर्ष 1979 के स्थान पर 1978 प्रकाशित हो गया।
ऐसे हुई मामले की शुरुआत
अप्रैल 2016 में, केंद्रीय सूचना आयोग ने अरविंद केजरीवाल से उनके चुनावी फोटो पहचान पत्र (ईपीआईसी) के बारे में जानकारी मांगी थी। इसी संदर्भ में अरविंद केजरीवाल ने आयोग से कहा था कि वह सीआईसी को अपने बारे में आवश्यक जानकारी देने के लिए तैयार हैं, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि पीएम को भी उनकी शैक्षिक डिग्री के विवरण का खुलासा करने के लिए कहा जाना चाहिए। केजरीवाल के जवाब को सीआईसी ने बतौर एक नागरिक का आरटीआई आवेदन माना। इसके बाद तत्कालीन मुख्य सूचना आयुक्त एम श्रीधर आचार्युलु ने प्रधानमंत्री कार्यालय को दिल्ली विश्वविद्यालय और गुजरात विश्वविद्यालय से पीएम मोदी की स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्रियों की विशिष्ट संख्या और वर्ष प्रदान करने का निर्देश दिया। इसके पीछे तर्क यह था कि देश के प्रधानमंत्री से संबंधित कोई भी दस्तावेज खोजने और प्रदान करने में आसानी हो।
मामला ऐसे पहुंचा कोर्ट में
केंद्रीय सूचना आयोग के इसी आदेश के विरुद्ध गुजरात विश्वविद्यालय (जीयू) ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने सीआईसी के आदेश पर रोक लगा दी और केजरीवाल पर जुर्माना ठोक दिया। विश्वविद्यालय ने कोर्ट के सामने तर्क दिया कि सीआईसी का आदेश क्षेत्राधिकार से बाहर और त्रुटिपूर्ण है और इसे रद्द कर देना चाहिए। विश्वविद्यालय की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता तुषार मेहता ने कहा कि जिज्ञासा को जनहित के साथ नहीं जोड़ा जा सकता है। उन्होंने आरटीआई अधिनियम के दुरुपयोग को रोकने के लिए याचिका के साथ जुर्माना लगाने की भी मांग की थी।
कोर्ट के इस आदेश के बाद से ही आम आदमी पार्टी बौखला गयी है और उसके नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस करके यह कह रहे हैं कि क्या देश को ये जानने का भी अधिकार नहीं है कि उनके पीएम कितना पढ़े हैं? मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और सांसद संजय सिंह भी ऐसा ही कह चुके हैं।
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