रोटी पलटने में माहिर चाचा शरद पवार का चिमटा छीन भागे अजित!

<p><em><strong>82 साल के शरद पवार ने पांच दशक की राजनीति में कई दिग्गजों को पटखनी दी है। मराठा नेता के पैंतरे के सामने केंद्र और महाराष्ट्र के दिग्गज चारो खाने चित्त होते रहे हैं। विरोधियों को कई बार मुश्किल में डालने वाले शरद पवार के खिलाफ बगावत का असर भविष्य की राजनीति पर होने वाला है।</strong></em></p>

रोटी पलटने में माहिर चाचा शरद पवार का चिमटा छीन भागे अजित!
03-07-2023 - 08:08 AM
21-04-2026 - 12:04 PM

राजनीति में रोटी पलटने में माहिर शरद पवार से भतीजे अजित पवार ने फिलहाल चिमटा ही छीन लिया है। अजित अपने साथ चाचा के खास सिपाहसलार छगन भुजबल को भी ले गए। एक दिन पहले दिए गए शरद पवार के बयान को याद करें। उन्होंने डिप्टी सीएम देवेंद्र फड़नवीस को गुगली में फंसाकर एक्सपोज करने वाला बयान दिया था। देंवेंद्र फडणवीस ने दावा किया था कि 2019 में शरद पवार चुनाव नतीजों के बाद गठबंधन की हामी भरने के बाद वादे से मुकर गए थे। उनके दावे की पुष्टि करते हुए शरद पवार ने कहा कि देवेंद्र फडणवीस को एक्सपोज करने के लिए उन्होंने बीजेपी के सामने समर्थन की गुगली डाली थी। 
देंवेद्र फडणवीस और शरद पवार की बयानबाजी जब चल रही थी, तब बीजेपी अजित पवार के साथ महाराष्ट्र की राजनीति में नया समीकरण गढ़ रही थी। अजित पवार की बगावत के बाद फिलहाल महाराष्ट्र में शिवसेना (यूटीबी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण महाअघाड़ी की सत्ता में लौटने की संभावना खत्म हो गई है। अभी शिवसेना के 16 विधायकों की योग्यता के सवाल पर विधानसभा स्पीकर का आखिरी फैसला आना बाकी है। 11 मई 2023 को सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 16 बागी विधायकों का फैसला विधानसभा स्पीकर पर छोड़ दिया था। अब अजित पवार के दावे के अनुसार, राष्ट्रवादी कांग्रेस (एनसीपी) 30 से अधिक बागी विधायक बीजेपी-शिवसेना (शिंदे गुट) के समर्थन में आ गए हैं।
आखिर अजित ने क्यों की बगावत?
अजित पवार की बगावत की वजह नई नहीं है। सत्ता के गलियारों में यह सदियों से होता आया है। सत्ता की महत्वकांक्षा ने बड़े-बड़े सूरमाओं की सत्ता को हिला दिया है। अजित पवार इस राजनीतिक सोच के अपवाद भी नहीं हैं। 27 नवंबर, 2019 में उन्होंने अल-सुबह देवेंद्र फड़नवीस के साथ डिप्टी सीएम की शपथ ले ली थी। यह शपथ शरद पवार की मंजूरी के बाद हुई थी, मगर दो दिन में ही शरद पवार ने रोटी पलट दी। चाचा अजित पवार के चक्कर में देवेंद्र फडणवीस के साथ अजित पवार की भी काफी किरकिरी हुई। 
इस्तीफे की गुगली से किया बोल्ड
जैसा कि देंवेंद्र फडणवीस ने दावा किया था, 2019 में एनसीपी और बीजेपी में जो खिचड़ी पक रही थी, उसकी हांडी शरद पवार ने अचानक बदल ली। वह कांग्रेस और शिवसेना के खेमे से जुड़ गए। नई सरकार में मंत्री बनने के बाद अजित पवार ने सब्र बनाए रखा। मई 2023 में एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने फिर अजित पवार के सामने गुगली डाल दी। पहले पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया और नए नेतृत्व का जिक्र छेड़ दिया। दो दिन बाद ही विधायकों और पार्टी के नेताओं को अपने पक्ष में करने के बाद इस्तीफा वापस ले लिया। 
बेटी को सत्ता सौंपते ही पार्टी में बगावत
जब पार्टी की गाड़ी पटरी पर आती दिखी तो पवार ने बेटी सुप्रिया सुले को कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया। दो महीने पहले इस्तीफे के एक तीर से कई शिकार करने वाले 82 साल के शरद पवार यहीं बड़ी चूक कर दी। भतीजे अजित पवार की महत्वाकांक्षा को कुचलने के फेर में उन्होंने भतीजे के ऊपर बेटी को तरजीह दे दी और बगावत की चिंगारी को बुझा नहीं सके।

मिलती रही है बेटे-बेटी को तरजीह
राजनीति में कई मौके ऐसे आए, जब बड़े उसूल वाले नेताओं ने कार्यकर्ताओं और साथ संघर्ष करने वाले रिश्तेदारों पर खुद को बेटे-बेटी को तरजीह दी। क्षेत्रीय पार्टियों के इतिहास में यह अक्सर देखा गया है। शिवसेना के सुप्रीमो बाला साहेब ठाकरे ने भतीजे राज ठाकरे की जगह उद्धव ठाकरे को वारिस बनाया। यह फैसला उन्होंने तब किया था, जब राज ठाकरे दो दशक तक बाला साहेब की छवि में खुद को ढाल रहे थे। फिर 2006 में राज ठाकरे ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना बना ली। 
हर पार्टी की एक सी कहानी
बिहार में लालू प्रसाद यादव अपने वारिस के ऐलान के लिए तेजस्वी के युवा होने का इंतजार करते रहे। उन्होंने खुले तौर पर परिवार को आगे बढ़ाने का ऐलान किया था। उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव ने अपने भाई शिवपाल सिंह यादव पर बेटे अखिलेश यादव को तवज्जो दी। मेघालय में पीए संगमा ने अपने बेटी अगाथा संगमा और बेटे कोनराड संगमा को आगे बढाया। कांग्रेस में राहुल गांधी भी पार्टी के कई दिग्गजों पर भारी पड़े हैं।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।